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सर्वक्षार

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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सर्वक्षार संज्ञा पुं॰ [सं॰]

१. मोखा । मुष्कक वृक्ष ।

२. एक प्रकार का क्षार । महाक्षार (को॰) ।

३. सब कुछ नष्ट कर देना या काम लायक न रहने देना । यो॰—सर्वक्षारनीति = युद्ध में सेना द्वारा पीछे हटते हुए सब समान नष्ट कर देना जिसमें शत्रुपक्ष उसका उपयोग न कर सके और उसे आगे बढ़ने में बाधा हो ।