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सर्वसर

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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सर्वसर संज्ञा पुं॰ [सं॰] मुँह का एक रोग जिसमें छाले से पड़ जाते हैं तथा खुजली तथा पीड़ा होती है । विशेष— यह तीन प्रकार का होता है —वातज, पित्तज और कफज । वातज में मुख में सुई चुभने की सी पीड़ा होती है । पित्तज में पीले या लाल रंग के दाहयुक्त छाले पड़ते हैं । कफज में पीडारहित खुजली होती है ।