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सर्वहित

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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सर्वहित ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰]

१. शाक्य मुनि । गौतम बुद्ध ।

२. सबका कल्याण ।

३. मरिच । मिर्च ।

सर्वहित ^२ वि॰ जो सबके लिये हित पथ्य या कल्याणकारी हो [को॰] ।

सर्वहित कर्म संज्ञा पुं॰ [सं॰] सामाजिक समारोह, उत्सव या जलसा आदि । विशेष— कौटिल्य ने लिखा है कि जो नाटक आदि सामाजिक जलसों में योग न दे, उसे उसमें संमिलित होने या उसे देखने का अधिकार नहीं है; उसे हटा देना चाहिए । यदि न हटे तो वह दंड का भागी हो ।