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सहजपंथ

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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सहजपंथ संज्ञा पुं॰ [हिं॰ सहज + पंथ] गौड़ीय वैष्णव संप्रदाय का निम्न वर्ग । विशेष—इस संप्रदाय के प्रवर्तकों के मतानुसार भजन साधन के लिये पहले एक नवयौवलमंपन्न सुंदर परकीया रमणी की आवश्यकता होती है । बाद रसिक भक्त या गुरु से सम्यक् रूप से उपदेश लेकर उस नायिका के प्रति तन मन अर्पणकर साधन भजन करने से अविलंव ब्रजनंदन रसिकाशिरोमणि श्रीकृष्ण की प्राप्ति होती है । सहजियों का कहना है कि इस प्रकार की लीला महाप्रभु सर्वसाधारण को न दिखाकर गुप्त रूप से राय रामानंद और स्वरूप दामोदर आदि कई मार्मिक भक्तों को बता गए हैं ।