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सहरगही

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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सहरगही संज्ञा स्त्री॰ [अ॰ सहर + फ़ा॰ गह] वह भोजन जो किसी दिन निर्जल व्रत करने के पहले बहुत तड़के या कुछ रात रहे ही किया जाता है । सहरी । विशेष—इन प्रकार का भोजन प्रायः मुसलमान लोग रमजान के दिनों में रोजा रखने पर करते हैं । वे प्रायः ३ बजे रात की उठकर कुछ भोजन कर लेने हैं; और तब दिन भर निर्जल और निराहार रहते हैं । हिंदुओं में स्त्रियाँ प्रायः हरतालिका तीज का व्रत रखने से पहले भी इसी प्रकार बहुत तड़के उठकर भोजन कर लिया करती हैं । और इसे 'सरगही' कहती हैं । दे॰ 'सरगई' । क्रि॰ प्र॰—खाना ।