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सहस्त्रबाहु

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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सहस्त्रबाहु संज्ञा पुं॰ [सं॰]

१. शिव ।

२. कार्त्तवीर्यार्जुन, जिसके विषय में पुराणों में कई कथाएँ हैं । विशेष—यह क्षत्रिय राजा कृतवीर्य का पुत्र था । इसका दूसरा नाम हैहय था । इसकी, राजधानी माहिष्मती में थी । एक बार यह नर्म्दा में स्त्रियों सहित जलक्रीड़ा कर रहा था । उस समय इसने अपनी सहस्त्र भुजाओं से नदी की धारा रोक दी जिसके कारण समीप में शिवपूजा करते हुए रावण की पूजा में विध्न पड़ा । उसने क्रोद्ध होकर इससे युद्ध किया, पर परास्त हुआ । एक बार यह अपनी सेना सहित जमदग्नि मुनि के आश्रम के निकट ठहरा था । मुनि के पास कपिला कामधेनु थी । उन्हों ने कार्त्तिकेय का अच्छी तरह से आदर किया । राजा ने लालच में आकर मुनि से कामधेनु छीन ली । जमदग्नि ने राजा को रोका और वे मारे गए । कार्त्तिकेय गौ लेकर चला पर वह स्वर्ग चली गई । परशुराम उस समय आश्रम में नहीं थे । लौटने पर उन्होंने अपने पिता के मारे जाने का हाल सुना, तो उन्होंने कार्त्तिकेय को मार डालने की प्रतिज्ञा की और अंत में मार भी डाला ।

३. विष्णु का एक नाम (को॰) ।

४. राजा बलि के सबसे बड़े पुत्र बाणासुर का नाम ।