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साँझी

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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साँझी संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ सान्ध्य या सज्जा?] देवमंदिरों में देवताओं के सामने जमीन पर की हुई फऊल पत्तों आदि की सजावट जो विशेषतः पितृपक्ष में सायंकाल के समय की जाती है । प्रायः सावन के महीने में श्रृंगार आदि के अवसर पर भी ऐसी सजा- वट होती है । मुहा॰—साँझी खेलना या साँझी पूजावना पु—सायंकाल के समय साँझी की सजावट तैयार करना या पूरी करना । उ॰— (क) सखि क्वार मास लग्यौ सुहावन सबै साँझी खेलहीं ।— भरतेंदु ग्र॰, भा॰ २, पु॰ ४०५ । (ख) पुजावती साँझी कीरति माय कुँवरि राधा को लाड़ लड़ाय ।—घनानंद, पृ॰ ५६१ ।