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साँम

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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साँम ^२ † संज्ञा पुं॰ [सं॰ साम] साम वेद । दे॰ 'साम'—१ । उ॰—भृकुटी विराजत स्वेत मानहुँ मंत्र अदभुत साम के ।—पोद्दार अभि॰ ग्रं॰, पृ॰ ४५७ ।

साँम † ^३ संज्ञा पुं॰ [सं॰स्वामी] स्वामी । मालिक । प्रभु । उ॰— रिजक उजालै साँम रौ पालै साँमधरम्म ।—बाँकी॰ ग्रं॰, भा॰ १, पृ॰ १ ।