सामग
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]सामग ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰] [स्त्री॰ सामगी]
१. वह जो सामवेद का अच्छा ज्ञाता हो ।
२. विष्णु का एक नाम ।
सामग ^२ वि॰ सामगायक । उ॰—गर्जना के साथ वेदों को गानेवाले सामग ऋषि समाज ने राजसूय यज्ञ करवाया तो भी यज्ञपूर्ति का शंख नहीं बजा ।—राम॰ धर्म॰, पृ॰ २८० ।