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साम्ब

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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सांब संज्ञा पुं॰ [सं॰ साम्ब]

१. श्रीकृष्ण के एक पुत्र का नाम जो जांबवती के गर्भ से उत्पन्न हुए थे । विशेष—बाल्यावस्था में इन्होंने बलदेव से अस्त्रविद्या सीखी थी । बहुत अधिक बलवान् होने के कारण ये दूसरे बलदेव माने जाते थे । भविष्यपुराण में लिखा गया है कि ये बहुत सुंदर थे और अपनी सुंदरता के अभिमान में किसी को कुछ न समझते थे । एक बार इन्होंने दुर्वासा मुनि का कृश शरीर देखकर उनका कुछ परिहास किया, जिससे दुर्वासा ने शाप दिया था कि तुम कोढ़ी हो जाओगे । इसके उपरांत एक अवसर पर रुक्मिणी, सत्वभामा और जांबवती को छोड़कर श्रीकृष्ण की और सब रानियाँ इनके रूपपर इतनी मुग्ध हो गई कि उनका रेत स्खलित हो गया था । इसपर श्रीकृष्णँ ने भी इन्हें शाप दिया था कि तुम कोढ़ी हो जाओ । इसी लिये ये कोढ़ी हो गए थे । अंत में इन्होंने नारद के परामर्श से सूर्य की मित्र नामक मूर्ति की उपासना आरंभ की जिससे अंत में इनका शरीर नीरोग हो गया । कहते हैं कि जिस स्थान पर इन्होंने 'मित्र' की उपासना की थी, उस स्थान का नाम 'मित्रवण' पड़ा । इन्होंने अपने इस नाम से सांबपुर नामक एक नगर भी, चंद्रभागा के तट पर बसाया था । महाभारत के युद्ध में ये जरासंध और शाल्व आदि से बहुत वीरतापूर्वक लड़े थे ।

२. शिव का एक नाम, जो अंबा, पार्वती के सहित हैं (को॰) ।