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सायुज्य

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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सायुज्य संज्ञा पुं॰ [सं॰]

१. एक में मिल जाना । ऐसा मिलना कि कोई भेद न रह जाय ।

२. पाँच प्रकार की मुक्तियों में से एक प्रकार की मुक्ति जिसमें जीवात्मा परमात्मा लीन हो जाता है । उ॰—हरि भे कहत गरीयसि मेरी । भक्ति होई सायुज्य बड़ेरी ।—गर्गसंहिता (शब्द॰) ।

३. समानता । एकरूपता ।