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सारङ्गिक

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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सारंगिक संज्ञा पुं॰ [सं॰ सारङिगक]

१. वह जो पक्षियों को पकड़कर अपना निर्वाह करता है । चिड़ीमार । बहेलिया ।

२. एक प्रकार का वृत्त जिसके प्रत्येक चरण में नगण, यगण औ सगण (न, य, स) होते हैं । विशेष—कवि भिखारीदास ने इसे मात्रिक छंद माना है ।