सारना
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]सारना क्रि॰ स॰ [हि॰ सरना का सक॰ रुप]
१. पूर्ण करना । समाप्त करना । संपूर्ण रुप से करना । उ॰—धनि हनुमंत सुग्रीव कहत है, रावण को दल मारयो । सूर सुनत रघुनाथ भयो मुख काज आपनी सारयो ।—सूर (शब्द॰) ।
२. साधना । बनाना । दुरुस्त करना ।
३. सुशोभित करना । सुंदर बनाना ।
४. देख रेख करना । रक्षा करना । सँभालना ।
५. आँखों में अंजन आदि लगाना ।
६. (अस्त्र आदि) चलाना । संचलित करना । उ॰—ससि पर करवत सारा काहू । नख- तन्ह भरी दीन्ह बड दाहू ।—जायसी (शब्द॰) ।
७. गलाना । सड़ाना । उ॰—सन असंत है एक काट के जल में सारै ।—पलटू॰, भा॰ १, पृ॰ १७ ।
८. काढ़ना । लगाना । उ॰— (क) जाताहि राम तिलक तेहि सारा ।—मानस, ५ ।४९ । (ख) सारेहु तिलक कहेउ रघुनाथा—मानस, ६ ।१०५ ।