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सारुप्य

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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सारुप्य ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰]

१. पाँच प्रकार की मुक्तियों में से एक प्रकार की मुक्ति जिसमें उपासक अपने उपास्य देव के रुप में रहता है और अंत में उसी उपास्य देवता का रुप प्राप्त कर लेता है ।

२. समान रुप होने का भाव । एकरुपता सरुपता ।

३. अनुकूल वस्तु की सरुपता अथवा रुपसादृश्य के कारण जन्य चित्तक्षोभ की वृद्धि अथवा क्रोधादि व्यवहार (को॰) ।

४. किसी पदार्थ को या उससे मिलती जुलती सूरत को देखकर होनेवाला आश्चर्य (को॰) ।

सारुप्य ^२ वि॰ समुपयुक्त । उचित । ठीक [को॰] ।