सामग्री पर जाएँ

सारोपा

विक्षनरी से

प्रकाशितकोशों से अर्थ

[सम्पादित करें]

शब्दसागर

[सम्पादित करें]

सारोपा संज्ञा स्त्री॰ [सं॰] साहित्य में एक प्रकार का लक्षण जो उस स्थान पर होती है जहाँ एक पदार्थ में दूसरे का आरोप होने पर कुछ विशिष्ट अर्थ निकलता है । जैसे,—गरमी के दिनों में पानि ही जान है । यहाँ 'पानी' में 'जान' का आरोप किया गया है । पर अभिप्राय यह निकलता है कि यदि थोड़ी देर भी पानी न मिले तो जान निकलने लगती है ।