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सार्वधातुक

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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सार्वधातुक ^१ वि॰ [सं॰] [स्त्री॰ सार्वधानुकी] संस्कृत व्याकरण के अनुसार सभी धातुओं में व्यवहृत होनेवाला । गण विकरण लगाने के पश्चात् धातु के समग्र रुपों में व्यवहृत होनेवाला ।

सार्वधातुक ^२ संज्ञा पुं॰ संस्कृत व्याकरण में चार लकारों (लट्, लोटु, लङ् और लिड़्) के तिङादि प्रत्यय या लिट् तथा आशीलीङ् को छोड़कर और सभी लकारों के विभक्तिचिह्न और 'श्' ध्वनि से प्रकट होनेवाले विकरण ।