सामग्री पर जाएँ

सावत

विक्षनरी से

प्रकाशितकोशों से अर्थ

[सम्पादित करें]

शब्दसागर

[सम्पादित करें]

सावत पु ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰ सापत्न्य; देशी सावक्क, सावत्त, सावत या हिं॰ सौत]

१. सौतों में होनेवाला पारस्परिक द्वेष । सौति- याडाह ।

२. ईर्ष्या । डाह । उ॰— तहूँ गए मद मोह लोभ अति सरगहूँ मिटति न सावत । — तुलसी (शब्द॰) ।

सावत पु ^२ संज्ञा पुं॰ [सं॰ सामन्त, हि॰ सावंत] दे॰ 'सावंत' । उ॰—बड़े सावतं उद्द कनकेश मारे । — प॰ रासो, पृ॰४५ ।