सावर
प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]सावर ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰शाबर] शिवकृत एक तंत्र का नाम । विशेष—इसके संबंध में इस प्रकार की कथा हैं — एक बार जब शिवपार्वती किरात देश में बन में विचरण कर रहे थे, तब पार्वतीजी ने प्रश्न किया कि प्रभो । आपने संपूर्ण मंत्र कील दिए हैं, पर अब कलिकाल है, इस समय के जीवों का उपकार कैसे होगा । तव शिवजी ने उसी वेश में नए मत्रों की रचना की जो शावर या सावर कहाते हैं । इन मंत्रों को जपने या सिद्ध करने की आवश्यकता नही, ये स्वयंसिद्ध हैं । न इनके कुछ अर्थ हो हैं ।
२. एक प्रकार का लोहे का लंबा औजार जिसका एक सिरा नुकीला और गुलमेख की तरह होता है । इसपर खुरपा रखकर हथौड़े से पीटा जाता है जिससे खुरपा पतला और तेज हो जाता है ।
सावर ^२ संज्ञा पुं॰ [सं॰ शबर या साम्बर] एस प्रकार का हिरन । उ॰— चीते सु रोझ सावर दबंग । गैडा गलीनु डोलत अभंग ।— सूदन (शब्द॰) ।
सावर ^३ संज्ञा पुं॰ [सं॰]
१. लोध्र । लोध्र ।
२. पाप । अपराध । सुनाह ।
३. एक प्रकार का मृग ।