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साष्टांग

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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साष्टांग वि॰ [सं॰ साष्टाङ्ग] आठो अंग सहित । यौ॰—साष्टांग प्रणाम=मस्तक, हाथ, पैर, हृदय, आँख, जाँघ, बचन, और मन से भूमि पर लेटकर प्रणाम करना । मुहा॰— साष्टांग प्रणाम करना=बहुत बचना । दूर रहना । (व्यंग्य) । जैसे—हम यहीं से उन्हें साष्टांग प्रणाम करते हैं ।

साष्टांग योग संज्ञा पुं॰ [सं॰ साष्टाङ्ग योग] वह योग जिसमें यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि ये आठो अंग हों । विशेष दे॰ 'योग' ।