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सिङ्गारभोग

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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सिंगारभोग संज्ञा पुं॰ [सं॰ श्रृंङ्गार+भोग] श्रृंगारकालीन भोग । वह भोग या नैवेध्य जो देवविग्रह के स्नान एवं धूप आरती के उपरांत तथा श्रृंगार आरती के पूर्व अर्पण किया जाता है । बालभोग । कलेवा । उ॰— फेरि रसोइ में जाइ, समै भए भोग सराइ श्रीठाकुरजी की मंगला आदि करि, सिंगार करि सिंगार- भोग धरतेँ । — दो सौ बावन॰, भा॰ १, पृ॰१०१ ।