सिलाह
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]सिलाह संज्ञा पुं॰ [अ॰]
१. जिरह बकतर । कवच । उ॰—जाली की आँगी कसी यों उरोजनि मानो सिपाहो सिलाह किए द्वै ।—मन्नालाल (शब्द॰) ।
२. अस्त्र शस्त्र । हथियार ।
सिलाह संज्ञा पुं॰ [अ॰]
१. जिरह बकतर । कवच । उ॰—जाली की आँगी कसी यों उरोजनि मानो सिपाहो सिलाह किए द्वै ।—मन्नालाल (शब्द॰) ।
२. अस्त्र शस्त्र । हथियार ।