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सिहाना

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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सिहाना † ^१ क्रि॰ अ॰ [सं॰ ईर्ष्या, पु॰ हिं॰ हिसिषा]

१. ईर्ष्या करना । डाह करना ।

२. किसी अच्छी वस्तु को देखकर इस बात से दुःखी होना कि वैसी वस्तु हमारे पास नहीं है । स्पर्धा करना । उ॰—द्वारिका की देखि छबि सुर असुर सकल सिहात ।—सूर (शब्द॰)

३. पाने के लिये ललचना । लुभाना । उ॰—सूर प्रभु को निरखि गोपी मनहि मनहि सिहाति । सूर (शब्द॰) ।

४. मुग्ध होना । मोहित होना । उ॰—सूर श्याम मुख निराख जसोदा मनही मनहिं सिहानी ।—सूर (शब्द) । (ख) लाल अलौकिक लरिकई लखि लखि सखी सिहाति—बिहारी (शब्द॰) ।

सिहाना ^२ क्रि॰ सं॰

१. ईर्ष्या की दृष्टि से देखना ।

२. अभिलाष की दृष्टि से देखना । ललचना । उ॰—समउ समाज राज दशरथ को लोकप सकल सिहाहीं ।—तुलसी (शब्द॰) ।

३. अभिलाषुक अथवा मुग्ध होकऱ प्रशंसा करना । उ॰—देव सकल सुरपतिहि सिहाहीं । आज पुरंदर सम कोउ नाहीं ।—मानस १ ।३१७ ।