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सीङ्क

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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सींक संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ इषीका]

१. मूँज या सरपत की जाति के एक पौछे के बीच का सीधा पतला कांड जिसमें फूल या घूआ लगता है । मूँज आदि की पतली तीली । उ॰—सींक धनुष हित सिखन सकुचि प्रभु लीन । मुदित माँगि इक धनुही नृप हँसि दीन ।—तुलसी (शब्द॰) । विशेष—इस कांड का घेरा मोटी सूई के बराबर होता है और यह कई कामों में आता है । बहुत सी तीलियों को एक में बाँधकर झाड़ू बनाते हैं ।

२. किसी तृण का सूक्ष्म कांड । किसी घास का महीन डंठल ।

३. किसी घास फूस के महीन डंठल का टुकड़ा । तिनका ।

४. शंकु । तीली । सूई की तरह पतला लंबा खंड ।

५. नाक का एक गहना । लौंग । कील । उ॰—जटित नीलमनि जगमगति सींक सुहाई नाक । मनौ अली चंपक कली बसि रस लेत निसाँक ।—बिहारी (शब्द॰) ।

६. कपड़े पर की खड़ी महीन धारी ।