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सुक्त

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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सुक्त संज्ञा पुं॰ [सं॰] प्राचीन काल की एक प्रकार की काँजी जो पानी में घी या तेल, नमक और कंद या फल आदि गलाकर बनाई जाती थी । विशेष—वैद्यक में इसे रक्तपित्त और कफनाशक, बहुत उष्ण, तीक्ष्ण, रुचिकर, दीपन, और कृमिनाशक माना है ।

सुक्त ^१ संज्ञा [सं॰]

१. वेदमंत्रों या ऋचाओं का समूह । वैदेक स्तुति या प्रार्थना । जैसे—देवीसुक्त, अग्निसूक्त, श्रीसूक्त आदि ।

२. उत्तम कथन । उत्तम भाषण ।

३. महद् वाक्य ।