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सुखारी

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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सुखारी †पु वि॰ [सं॰ सुख+हिं॰ आरा (प्रत्य॰)]

१. जिसे यथेष्ट सुख हो । सुखी । आनदित । प्रसन्न । उ॰—(क) इहि विधान निसि रहहिं सुखारे । करहिं कूँच उठि बड़े सकारे ।—गिरधर- दास (शब्द॰) । (ख) नित ये मंगल मोद अवध सब बिधि सब लोग सुखारे ।—तुलसी (शब्द॰) ।

२. सुख देनेवाला । सुखद । उ॰—जे भगवान प्रधान अजान समान दरिद्रन ते जन सारा । हेतु विचार हिये जग के भग त्यागि लखूँ निज रूप सुखारा ।— (शब्द॰) ।

सुखारी वि॰ [सं॰ सुख+हिं॰ आरी] दे॰ 'सुखारी' । उ॰—(क) राम संग सिय रहति सुखारी ।—मानस, २ ।१४० । (ख) मुयो असुर सुर भए सुखारी ।—सूर (शब्द॰) । (ग) चौरासी लख के अधकारी । भक्त भए सुनि नाद सुखारी ।— गिरधरदास (शब्द॰) ।