सुगंधबाला
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]सुगंधबाला संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ सुगन्ध+हिं॰ बाला] क्षुप जाति की एक प्रकार की वनौषधि । विशेष—यह पश्चिमोत्तर प्रदेश, सिंध, पश्चिमी प्रायद्वीप, लंका आदि में अधिकता से होती है । सुगंधि के लिये लोग इसे बगीचों में भी लगाते हैं । इसका पौधा सीधा, गाँठ और रोएँदार होता है तथा पत्ते ककही के पत्तों के समान २११-३ इंच के घेरे में गोलाकार, कटे किनारेवाले तथा ३ से ५ नोकवाले होते हैं । पत्र- दंड़ लंबा होता हैं और शाखाओं के अंत में लंबे सीकों पर गुलाबी रंग के फूल होते हैं । बीजकोष कुछ लंबाई लिए गोलाकार होता है । वैद्यक में इसका गुण शीतल, रूखा, हलका, दीपक तथा केथों को सुंदर करनेवाला और कफ पित्त, हुल्लास, ज्वर, अतिसार, रक्तस्राव, रक्तपित्त, रक्तविकार, खुजली और दाह को नाश करनेवाला बताया गया है । पर्या॰—बालक । वारिद । ह्नीवेर । कुंतल । केश्य । वारितोय ।