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सुचि

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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सुचि ^१ वि॰ [सं॰ शुचि] दे॰ 'शुचि' । उ॰—(क) सहज सचिक्कन स्याम रुचि सुचि सुगंध सुकुमार । गनत न मन पथ अपथ लखि बिथुरे सुथरे बार ।—बिहारी (शब्द॰) । (ख) तुलसी कहत विचारि गुरु राम सरिस नहिं आन । जासु क्रिया सुचि होत रुचि विसद विवेक अमान ।—तुलसी (शब्द॰) ।

सुचि ^२ संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ सूची] सूई । उ॰—सुचि वेध ते नाको सकीर्न तहाँ परतीत को टाँडो लदावनो है ।—हरिश्चंद्र (शब्द॰) ।