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सुढार

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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सुढार पु † वि॰ [सं॰ सु + हिं॰, ढलना] [वि॰ स्त्री॰ सुढारी]

१. सुंदर ढला या बना हुआ । उ॰—गृह गृह रचे हिडोलना महि गच काच सुढार । चित्र विचित्र चहूँ दिसि परदा फटिक पगार ।—तुलसी (शब्द॰) ।

२. सुंदर । सुडौल । उ॰—हिय मनिहार सुढार चार हय सहित सुरथ चढ़ि । निसित धार तर- वार धरि जिय जय विचार मढ़ि ।—गिरधर (शब्द॰) । (ख) दीरघ मोल कह्यो व्यापारी रहे ठगे से कौतुकहार । कर ऊपर लै राखि रहे हरि देत न मुक्ता परम सुढार ।—सूर (शब्द॰) । (ग) लखि बिँदुरी पिय भाल भाल तुअ खौरि निहारी । लखि तुअ जूरा उनकी बेनी गुही सुढारी ।— अंबिकादत्त (शब्द॰) ।