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सुनंद

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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सुनंद ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰ सुनन्द]

१. एक देवपुत्र ।

२. श्रीकृष्ण का एक पार्षद् ।

३. बलराम का मूसल ।

४. कुंजृंभ दैत्य का मूसल जो विश्वकर्मा का बनाया हुआ माना जात है ।

५. बारह प्रकार के राजभवनों में से एक । विशेष—यह सुनंद नामक राजप्रासाद राजाओं के लिये विशेष शुभकर माना गया है । कहते है, इसमें रहनेवाले राजा को कोई परास्त नहीं कर सकता । 'युक्तिकल्पतरु' के अनुसार इस भवन की लंबाई राजा के हाथ के परिमाण से २१ हाथ और चौड़ाई४० हाथ होनी चाहिए ।

६. एक बौद्ध श्रावक ।

सुनंद ^२ वि॰ आनंददायक ।