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सुप्रतिष्ठा

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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सुप्रतिष्ठा संज्ञा स्त्री॰ [सं॰]

१. एक वृत्त जिसके प्रत्येक चरण में पाँच वर्ण होते हैं । इनमें से तीसरा और पाँचवाँ गुरु तथा पहला, दूसरा और चौथा वर्ण लधु होता है ।

२. मंदिर या प्रतिमा आदि की स्थापना ।

३. स्कंद की एक मातृका का नाम ।

४. अभिषेक ।

५. उत्तम स्थिति ।

६. सुनाम । प्रसिद्धि । शोहरत ।

७. उत्तम प्रतिष्ठा । स्थापना ।