सुमंद्र
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]सुमंद्र संज्ञा पुं॰ [सं॰ सुमन्द्र] एक वृत्त जिसके प्रत्येक चरण में १६ + ११ के विराम से २७ मात्राएँ तथा अंत में गुरु लघु होते हैं । यह सरसी नाम से प्रसिद्ध है । (होली में जी 'कबीर' गाए जाते हैं, वे प्रायः इसी छंद में होते हैं ।)