सुरभङ्ग
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]सुरभंग संज्ञा पुं॰ [सं॰ स्वरभङ्ग] प्रेम, आनंद, भय आदि में होने— वाला स्वर का विपर्यास जो सात्विक भावों के अंदर्गत है । उ॰— (क) स्तंभ स्वर रोमांच सुरभंग कंप वैवर्ण । अश्रु प्रलाप बखानिए आठो नाम सुवर्ण—केशव (शब्द॰) । (ख) निसि जागे पागे अमल हित की दरसन पाइ । बोल पातरो होत जा सो सुरभंग बताइ । — काव्यकलाधर (शब्द॰) । (ग) क्रोध हरख मद भीत तें वचन और विधि होय । ताहि कहत सुरभंग हैं कवि कोविद सब कोय । — मतिराम (शब्द॰) ।