सुवर्णस्तेव
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]सुवर्णस्तेव संज्ञा पुं॰ [सं॰] सोने की चोरी । विशेष—मनु के अनुसार सोने की चोरी पाँच महापातकों में से एक है ।
सुवर्णस्तेव संज्ञा पुं॰ [सं॰] सोने की चोरी । विशेष—मनु के अनुसार सोने की चोरी पाँच महापातकों में से एक है ।