सुसकना
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]सुसकना क्रि॰ अ॰ [हिं॰ सिसकना]दे॰ सिसकना' । उ॰—(क) पालने झूलो मेरे लाल पियारे । सुसकनि की हौं बलिबलि करौ तिल तिल हठ न करहु जे दुलारी । —सूर (शब्द॰) । (ख) कपि पति काम सँवार, बाली अध सुसकत परय़ो । तब ताही की नार रघुपति सों बिनती करे । —हनुमन्नाटक (शब्द॰) । (ग) अति कठोर दोउ काल से भरम्यो अति झझक्यो । जागि परय़ो तहँ कोउ नहीं जिय ही जिय सुसक्यो ।—सूर (शब्द॰) । (घ) घूँघट मैं सुसकै भरै साँसे ससै मुख नाह के सौंहै न खोलै ।—सुंदरीसर्वस्व (शब्द॰) ।