हर्ष

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

हर्ष संज्ञा पुं॰ [सं॰]

१. प्रफुल्लता या भय आदि के कारण रोंगटों का खड़ा होना ।

२. प्रफुल्लता । आनंद । चित्तप्रसादन खुशी । क्रि॰ प्र॰—करना ।—मनाना । ।—होना ।

३. ३३ संचारी भावों में से एक का नाम । विशेष—साहित्य में 'हर्ष' की गिनती संचारी भावों में की गई है ।

३. धर्म के पुत्रों में से एक ।

४. भागवत के अनुसार कृष्ण के एक पुत्र का नाम ।

५. काम के वेग से इंद्रिय का उत्तेजित होना । कामोत्तेजना । कामोद्दीपन (को॰) ।

६. तीव्र आकांक्षा । उत्कट इच्छा (को॰) ।

७. एक दैत्य का नाम ।

८. कान्यकुब्ज के एक नरेश का नाम । दे॰ 'हर्षवर्धन' । यौ॰—हर्षविषाद = खुशी और रंज ।