हो

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

हो ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰] पुकारने का शब्द या संबोधन ।

हो ^२ क्रि॰ अ॰ [सं॰ √भू; प्रा॰ हव, हो]

१. सत्तार्थक क्रिया 'होना' के अन्य पुरुष संभाव्य काल तथा मध्यम पुरुष बहुवचन के वर्तमान काल का रूप । जैसे,—(क) शायद वह हो । (ख) तुम वहाँ हो । उ॰—तू मेरो बालक हो नँदनंदन तोहि बिसंभर राखें ।—पोद्दार अभि॰ ग्रं॰, पृ॰ २३४ ।

हो पु † ^३ ब्रज की वर्तमानकालिक क्रिया 'है' का सामान्य भूत का रूप । था । उ॰—(क) पहिले हौँ ही हो तब एक । अमल, अकल, अज,भेद विवर्जिति सुनि बिधि बिमल बिवेक ।—सूर॰, २ ।३८ । (ख) दोउ सीँग बिच ह्वै हौँ आयौ जहाँ न कोऊ हो रखवैया ।—सूर॰, १० ।३३५ ।