ICAT ke Sholay

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इस कहानी के समस्त पात्र एवं घटनायें काल्पनिक हैं और वास्तविक जीवन से इनका कोई भी सम्बन्ध नहीं है। कोई भी समानता एक संयोग मात्र है। केवल स्वस्थ मनोरंजन ही हमारा एकमात्र ध्येय है उम्मीद है आप सबको पसन्द आयेगा।
यह कहानी शुरु होती है उस जमाने में जब गब्बर सिंह ने अपने लूटमार के बिजनेस को आटोमेट्ड करना चाहा, आज गब्बर सिंह के पास कुछ्ह लोग इन्टरव्यूह देने आ रहे है।
साम्भा-सरकार कुछ लोग इन्टरव्यूह देने के लिये आये है।
गब्बर- सुअर के बच्चो इअतने सारे?
साम्भा-सरदार, वहां नहीं यहां
गब्बर'-अरे ये तो हमारा बहुत पुराना शिकार है आओ ठाकुर आओ, आज रामगढ़ का रास्ता कैसे भूल गये?
ठाकुर-गब्बर, नहीं गब्बर, तेरी कम्पनी का बडा़ नाम सुना है सोचा देखते चलु आज मुझे अपने हाथों की बहुत कमी खल रही है सुना है आइकैट में कैरम कम्पनी खुला है मैं भी बहुत अच्छा कैरम खेलता था काश मेरे भी हाथ होते कमबख्त न खा सकता हूँ न धो सकता हूँ, ये जाब मुझे दे दे गब्बर, ये जाब मुझे दे दे गब्बर
गब्बर-अरे ओ साम्भा, बहुत नाइन्साफी है रे, ठाकुर तुम्हे गन पाउन्ट पे काम करना आता है।
साम्भा-सरदार, गन पाउन्ट नहीं पावर पाइन्ट
गब्बर-खामोश, बताओ ठाकुर, तुम्हें हमारी जूती के नीचे काम करना पडेगा
ठाकुर-ठाकुर न झुक सकता है न टूट सकता है ठाकुर सिर्फ मर सकता है, अन्डरसटैण्ड
गब्बर-अरे ओ साम्भा चल डाल इसको अचार में(हसंते हुए)
सांभा-सरदार, अचार नहीं, हेच आर
गब्बर- चल दूसरा आदमी भेज
तब थोडी़ देर में एक मोटा सा आदमी आता है उसको देखकर गब्बर एक दम से डर जाता है
गब्बर-अरे ओ साम्भा एक् एक करके भेज रे
साम्भा-सरकार, दिखता 5 है और है 1
गब्बर-क्या नाम है तेरा?
खो खो-खो खो थू
साँभा-सरदार, यै कैसा नाम है खो खो
गब्बर-अरे वाह क्या तरीका है गला साफ करेने का, अरे ओ साम्भा कितने आदमी है मैंटिनेंस में
साँभा-सरदार, एक मैं ही हूँ।
गब्बर- चल आज से तेरा डिपारटमेंट चेंज
साँभा-हजुर, मैनें आपका नमक खाया है।
गब्बर-अब गोली खा!
खो खो-(हाथ हिलाता हुआ हरे रंग का कागज दिखाता हुआ)
गब्बर-क्या चाहिये समोसा? अरे , क्या है तेरे हाथ में
खो खो-हजुर, इसे ऐपरुबल नोट कहत है।
गब्बर-(हसते हुए), ये कौनसा नोट है रे जो हम आज तक नहीं लूटे।
खो खो-हजुर, एक हरा रंग के कागज पे कुछ काली काली चिडि़या उड़त है, बस उसे ऐपरुबल नोट कहत है।
गब्बर-जरा दिखा रे हम भी देख ये नोट, सारा नोट पे समोसा का चटनी लगा रखा है, चल भाग बुडभक्त!
फिर थोडी़ देर में मुन्ना भाई आते है।(संगीत और जादू की जप्पी)
गब्बर- आओ मुन्ना आओ, मम्मी कैसी है?
मुन्ना-देख बाप, अपुन का दिमाग खिसकेला है बोले तो धन्धें की वाट लगरेली है।
गब्बर-कैसा धन्धा था तुम्हारा, पहले गोली से मारते थे फिर दवाई से मारते थे और अब यहाँ
मुन्ना-बास, बोले तो अपुन को एक झक्कास नौकरी की जरुरत है।
गब्बर-तो आ ना, बहुत पुराना याराना है हमारा
मुन्ना-देख बाप अपुन गाँधीगिरी का फैन है।(हंसी)
गब्बर-चल बता, ये फोर्ड क्या है?
मुन्ना-अरे गाडी़ है रे मामू
गब्बर-तो फिर ये आक्सफोर्ड क्या है बता बता(हसते एवं मजाक उडा़ते हुए)
मुन्ना-बोले तो एक दम सिमपल है भाई, ओक्स बोले तो बैल और फोर्ड बोले तो गाडी मतलब बैलगाडी
गब्बर-मुन्ना, आज तक तू इन्सान की डाक्टरी करता था अब घोडो़ की डाक्टरी कर
मुन्ना-(जौशीली अवाज में), मेरे यंग घोडे़, वी रोक्स

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इतने में रामलाल आता है उड़ली उड़ली ऊ करते हूए,
गब्बर- आओ रामलाल आओ, ठाकुर के साथ बहुत याराना है, बता ठाकुर की कम्पनी में क्या क्या काम किया?
रामलाल-हजुर, ठाकुअर की कम्पनी में कई बार जय और वीरु को 5-5 हजाय रुपया गिन के दिये है तो गुणा भाग और गिनती तो कर ही लेत है और थोडा़ बहुत गा भी लेते है उडली उडली ऊ ऊ
गब्बर-अरे ओ रामलाल, ये जापड़ और पापड़ मे क्या फरक है?
रामलाल-हजुर, पता नहीं
गब्बर-तो खाके देख ले ना, चल फैंक इसको फिनेंस में
गब्बर-अरे ओ साम्भा कितना टारगैट डाले थे ट्रैकर में लूटमार का
सांभा-सरदार, 40 पेटी
गब्बर-अरे यार क्या है ये, ये अब तक लाल क्यों दिखायी दे रहा है
सांभा-सरदार, 30 पेटी ही हुई है अब तक
गब्बर-बहुत नाइन्साफी है, अरे ओ रामलाल ठाकुर की तिजोरी में कितना माल रखे है रे
रामलाल-हजुर, 10 पेटी
गब्बर-चलो हो गया हमार टारगैट पूरा, कर दो इसका हरा, चलो हो जाये मनोरंजन, आ जाओ सब लोगन इसटेज पे

(तब सबको स्टेज पर नचाने के लिये बुलाओ)