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विक्षनरी:भारतीय भाषा कोश ०३

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601कामयाबविशेषण----जिसे सफलता प्राप्त हुई हो, सफल।----कामयाब----कामयाब----कामयाब----कामयाबु----सफल, यशस्वी----कामयाब, कामियाब, कृतार्थ, सफळ----सफल----सफल, फलवली----सफळ----कृतकृत्युडयिन----वेट॒टि॒ पॆट॒ट॒----सफलन्----सफल----
602कायमविशेषण----स्थिर, पक्का, दृढ़।----काइम----क़ाइम----का॑यिम----काइमु----कायम, स्थिर, पक्का, दृढ----कायम----कायेम, चिरस्थायी, पाका----स्थिर, पक्का, दृढ़----स्थिर, पक्का, द्ददं----स्थिरमयिन----निलैयान----स्थिरमाय----कायम्, स्थिर----
603कायरविशेषण----उत्साह, बल या साहस से रहित, भीरू, डरपोक।----काइर----बुज़दिल----खोचु॑ बुड----कांइरु----भित्रा, भेकड----कायर----भीतु, भीरू, कापुरूष----भीरू, क्रापुरूष, निरुत्साह----कातर, भीरू डरकुरा----पिरिकि----कोळैयान, बयन्द----भीरु----हेडि----
604कायाकल्पपुंलिंगपुंलिंग---जिस क्रिया या व्यवस्था से काया की पूरी तरह शुद्धि हो जाए और वह अपना काम ठीक तरह से करने लगे;औषध के प्रभाव से वृद्ध शरीर को पुन: तरुण और सबल करने की क्रिया या चिकित्सा।---काइआकलप----काया पलट----कायाकलप----कायाकल्पु----कायापालटकायाकल्प---कायापलटकायाकल्प---कायाकल्पकायाकल्प---कायकल्परसायन चिकित्सा---कायाकळ्प----कायाकल्पमुकायाकल्पमु---मुऴु माट॒ट॒म्मुदियवरै इळमै पॆर शॆय्यप्पडुम् शिगिच्चै---कायाकल्पं, आमूल परिवर्तनंकायाकल्प चिकित्स---कायाकल्पकायकल्प---
605कारखानापुंलिंग----वह स्थान जहाँ यंत्रों आदि की सहायता से किसी वस्तु का वांछित परिमाण में उत्पादन किया जाता है।----कारखाना----कारख़ाना----कारखानु॑----कारिखानो----कारखाना----कारखानुं----कारखाना----कारखाना----कारखाना----कार्खाना, कर्मागारमु----तॊळिर्चालै----तोऴिल् शाल, व्यवसायशाल, फैक्टरि॒----फ्याक्टरि, कार्खानॆ----
606कारणपुंलिंगपुंलिंग---प्रेरक घटना या परिस्थिति;हेतु, उद्देश्य, प्रयोजन, वजह।---कारन----वजहसबब, बायिस---वजह----कारणु----कारण प्रेरक घटना क्रिंबा परिस्थितिहेतु, उद्देश्य, प्रयोजन---कारणहेतु, उद्देश्य---कारण॒, प्रेरक परिस्थिति (न)कारण॒, हेतु, उद्देश्य (न)---प्रेरक घटना बा परिस्थितिहेतु उद्देश्य, कारण---कारण----कारणमुकारणमु---कारणम्नोक्कम्---कारणंकारणं---कारणप्रयोजन, उद्देश्य---
607कारतूसपुंलिंग----बंदूक, रिवाल्वर आदि में रखकर चलाई जाने वाली धातु, दफ्ती आदि की बनी हुई खोली, जिसमें धातु की गोली और बारूद भरा होता है।----कारतूस----कारतूस----कारतूस----कारितूसु----काडतूस----कारतूस----कार्तुज, बन्दुकेर टोटा----बान्दुकर गुली----गुळि----तूटा----तोट्टा----तोट्ट----गुंडु, सिडिमदिदन तोटा----
608कारस्तानी (करिस्तानी)स्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---किसी को हानि पहुँचाने के उद्देश्य से गुप्त रूप से की हुई कोई युक्ति, चालबाजी;अनुचित काम, करतूत।---कारसतानी----कारस्तानी----का॑रिस्ता॑नी----कारिस्तानी, चालाकी----कारस्थानचलाखी---कारस्तानकरतूत---कारसाजि, कारचुबि, चालबाजिअनुचित काज, कम्म---चालाकि, घलनाबेया काम---चालबाजिअनुचित काम---कपटमु, पन्नागमुचेष्ट---सूदुकॆट्ट नडवडिक्कै---सूत्रं, चातुर्यंअनावश्य प्रवत्ति---पितूरिधूर्ततन---
609कारावासपुंलिंग----बंदीगृह में रहने का दंड।----कैद----क़ैद (हब्स)----जेल----जेलु, जेल में रहण जा सज़ा----कारावास, तुंरूग----कारावास----कारावास----काराबास, कारादण्ड----काराबास----कैदु----सिरै॒ वासम्----तटवुशिक्ष----कैदु----
610कारीगरपुंलिंग----छोटे-मोटे उपकरणों की सहायता से वस्तुओं की रचना या मरम्मत करने वाला (आर्टीजन)।----कारीगर----कारीगर----कारय्गर----कारीगरु----कारीगीर----कारीगर----कारिगर----कारिकर----कारिगर----पनिवाडु----सिर॒पि तॊऴिल्-तिरमैवाय्न्दवन्----तॊऴिलाळि शिल्पि----शिल्पि----
611कार्यपुंलिंगपुंलिंग---वह जो किया जाए या किया गया हो, काम;व्यवसाय, धंधा, नौकरी।---कारजकारज---कामधन्धा---को॑म----कमु, कार्युकामु, धंधोवापारु, कारोबारु---कार्य, कामव्यवसाय, धंदा, नोकरी---कार्यकामकाज---कार्य, काज कर्म (र्ज)काज, व्यवसा, चाकरि---कार्य, कामब्यवसाय, जीविका, चाकरि---कार्ज्य----कार्यमु, पनिपनि---वेलैउद्दियोगम, तॊऴिळ---कार्यजोलि, तॊऴिल्---कलसकसबु, उद्योग---
612कार्यकर्त्तापुंलिंगपुंलिंग---काम करने वाला व्यक्ति;कर्मचारी।---कारजकरता----कारकुन----का॑म करन वोल----कार्यकर्त्ता, कमकंदड़ुकर्मचारी---कार्यकर्त्ताकर्मचारी---कार्यकर्ता (र्त्ता)काम करनार---कर्मीकर्मचारी---कार्यकर्त्ता, कर्त्ताकर्मचारी---कार्ज्यकर्ता----कार्यकर्त्तउद्योगि---अलुवलर्अलुवलर्---प्रवर्तकन्अद्योगस्थन्---कॆलसगारकर्मचारी, कार्यकर्ता---
613कार्यकारिणीस्त्रीलिंग----किसी संस्था आदि का कार्य चलाने वाली समिति।----कारजकारनी----आ़मिला----इन्तिजा॑मी कमीटी----कारोबारी कामेटी----कार्यकारिणी----व्यवस्थापक समिति, कार्यवाहक सभा----कार्य॒कारिणी॒ कर्मसमिति (ज) (न)----कार्यनिर्बाह कमिटी, कार्यपालिका----कार्य्जकारी, कार्ज्यकारिणी----कार्यनिर्वाह----सॆयर् कुऴु----प्रवर्तक समिति, निर्वाहक समिति----निर्वाहक, कार्यकारी----
614कार्यक्रमपुंलिंगपुंलिंग---किसी उद्देश्य से किए जाने वाले कार्यें की पहले से तैयार की गई क्रम-सूची;उक्त सूचि के अनुसार होने वाला कार्य।---कारजकरम, प्रोगराम----प्रोग्राम (लाएहए अमल)----प्रोग्राम----कार्यक्रमु----कार्यक्रमकार्यक्रम---कार्यक्रमए प्रमाणे थनारूं कार्य---कार्य॒क्रम, कार्य॒सूची (ज)कार्य॒क्रम (ज)---कार्यक्रम, कार्यसूचीकार्यसूचीर विषय---कार्ज्यक्रम----कार्यक्रममुकार्यक्रममु---निगऴचि निरल्निगळ्चि निरल्---कार्यपरिपाटिकार्यपरिपाटि---कार्यक्रम पट्टिकार्यक्रम---
615कार्यपालिकास्त्रीलिंग----शासन का वह विभाग जो संसद द्वारा पारित विधियों को कार्य रूप में परिणत करता तथा उनका निष्पादन करता हो (एक्जेक्टिव)।----कारज पालका----आ़मिला (मुंतज़िमा)----मुनतु॑ज़िमीया----कारोबारी सभा, कार्यपालिका----कार्यपालिका----कारोबारी समिति----कर्म समिति----कार्यपालिका----कार्ज्यपालिका----कार्यपालिक----आट्चियिन् सेयर् कुऴु----एक्सिक्यूटीवॅ----कार्यांग----
616कार्यवाही (कार्रवाई)स्त्रीलिंग----किसी कार्य के संपादन के समय होने वाली या की जाने वाली आवश्यक क्रियाएँ;----कारवाई----कार्रवाई----कारवा॑यी----कारिवाई, कार्रवाई----कार्रवाई, कार्यवाही----कार्यवाही, कारवाई----प्रतिविधादिर व्यवस्था----ब्यवस्था, क्रिया, कार्य----कार्ज्यबाही----कारुबरु, चर्य----नडवडिक्कै----नटपटि----कार्यकलाप----
617कार्यालयपुंलिंग----वह स्थान या भवन जहाँ कार्य विशेष के निर्वाह के लिए कुछ लोग नियमित रूप से काम करते हैं, दफ्तर।----दफ़तर----दफ़्तर----दफतर----आफीस, दफ्तरु, कार्यालय----कार्यालयपुं----कार्यालय, ओफिस कचेरी----दप्तर, आफिस, कार्यालय (ज)----कार्जालय----कार्याळय (आफिस)----कार्यालयमु, आफीसु----अलुवलगम्----कार्यालयं, आप्पीस्----कचेरि, कार्यालय----
618कालपुंलिंगपुंलिंगपुंलिंग--समय;मौत, मृत्यु;क्रियाओं से सूचित वह तत्व जिससे किसी घटना या बात के घटित होने के समय ज्ञान होता है।--कालकालकाल--ज़मानाकाल, मौतवक़्त--समय, वखु॑तकाल---वक्तु, कालुकालु, मौतुअर्सो--काळ, समयमृत्यु, अंतकाल, वेळ--कालमोत, नाशवेळा--काल, समयकाल, मृत्युक्रियाकाल, क्रियानुष्ठान काल-ज्ञापक धातु रूप--समय, कालमृत्यु, मरणक्रियार काल--काळ, समयमृत्युसमयज्ञानसूचक तत्त्व क्रिया र काल (व्याकरण)--कालमुचावु, मृत्युवुकालमु--नेरम्सावुकालम्--कालंकालंकालं (वर्तमान कालं मुतलायव)--समय, कालसावुकाल--
619कालाविशेषणविशेषणविशेषण--जो काले रंग का हो, कृष्ण, श्याम;जिसमें प्रकाश न हो, अंधकार पूर्ण;अनुचित, कलंकित, लांछित।--कालाकाला---कालाअंधेरा, तारीक---क्रुहुन----कारोऊंदाहो---काळाअंधकार पूर्ण---काळुंअंधकारपूर्ण---कालो रङ, कृष्ण वर्ण, श्यामल (न.)कालो, तमिस्र---कंला (र्केला)एन्धार, अन्धकार---काळाअन्धकारपूर्ण---नलुपुप्रकाश हीनमु---करुमै निर॒मानइरुट्टान---करु॒त्तप्रकाशं इरुण्ट---कप्पुकत्ताळॆ---
620काला बाजारपुंलिंग----कानून-विरोधी व्यापार (ब्लैक मार्किट)----काला बजार, काला धंदा----काला बाज़ार----च़ूरु॑-बापार----ब्लैक मार्केटु, कारी बाज़ारि, अजो॒गु वापारु----काळा बाजार----काळुं बजार----काला बाजार, चोर कारबार----कंला (कॅला) बजार, चोरां कारबार----कळाबजार----चीकटि बजारु, दोंग व्यापारमु----करुप्पु मार्केट----कळ्ळक्कंपोंळं----संतॆ कळ्ळ----
621कालीनपुंलिंगविशेषण---ऊन, सूत आदि का बना हुआ एक प्रकार का मोटा बिछावन जिस पर रंग-बिरंगे बेल-बूटे आदि होते हैं, गलीचा।काल विशेष से संबधित या उसमें होने वाला।---कलीन, कालीन----क़ालीनज़मानी---का॑लीनु॑का॑लीनु॑---ग़ालीचोकाल जो, वक्त जो---गालीचाकालीन, त्या काळचा---गलीचोकाळनुं के ते संबंधी---गलिचा, कार्पेटकालीन---गलिछा, कार्पेटकालीन---गलिचाकाळविशेष सहित संबंधित काळीन---तिवाचीकालिकमु---विरिप्पु (जमक्काळ्म, कंवळि)कालत्तिय---कार्पेट्, परवतानिकालत्तिलुळ्ऴ कालीनं---रत्नगंबळिकालद---
622काल्पनिकविशेषणविशेषण---मनगढ़ंत;कल्पित, कल्पनाप्रसूत।---कालपनिककालपनिक---ख़याली, फ़र्ज़ी----खयो॑ली----मन घड़ति, ख्यालीकाल्पनिकु---काल्पनिककल्पित---कल्पेलुंकाल्पनिक---काल्पनिक, मनगड़ाकाल्पनिक, कल्पना प्रसूत---मने गंढा, काल्पनिककल्पनाप्रसूत---काळ्पनिक, मनगढाकळ्पित---बूट़कमु, ऊहिंचिनकल्पितमु---कर्पनै सॆय्यप्पट्टकर्पनसॆय्यप्पट्ट---काल्पनिकंऊहाधिष्ठितं---मन: कल्पनॆयकल्पित---
623काव्यपुंलिंग----पद्यात्मक साहित्यिक रचना, कविता आदि।----कावि----नज़्म (कलाम)----शो॑यरी----काव्यु, कविता, शइरु----काव्य----काव्य----काव्य----काव्य----काव्य----काव्यमु----काप्पियम्----काव्यं----काव्य, पद्य----
624काश्तकारपुंलिंगपुंलिंग---किसान, खेतिहर;वह व्यक्ति जिसने जमींदार को लगान देकर उसकी जमीन पर खेती करने का स्वत्व प्राप्त किया हो।---वाहीवान, काशतकार----काश्तकार----काशकार----हारी, किसानु----शेतकरीखंडकरी, कूळ---किसान, खेडूतगणोतिया---चाषा, चाषी, कृषिजीवीकृषक---कृषक, खेतियकरायत---कृषकरइत, रचूत---रैतुरैतु---कुडियानवन्विवसायि---कर्षकन्पाट्टक्कारन्---रैतऒक्कलिग---
625काष्टपुंलिंग----लकड़ी, काठ।----काठ----काठ----काठ-बाठ----काठु----लाकूड----लाकडुं----काठ, काष्ठ----काठ----काष्ठ, काठ----कट्टेलु----कट्टै----तटि----मर, सौदॆ----
626किताबस्त्रीलिंग----पुस्तक, ग्रंथ।----किताब----किताब----किताब----किताबु----पुस्तक, ग्रंथ----किताब, पुस्तक, चोपडी----बइ, ग्रंथ----किताप----पुस्तक, ग्रंथ, र्बाउ----पुस्तकमु----पुत्तगम्----ग्रंथं, पुस्तकं----पुस्तक----
627किनारापुंलिंगपुंलिंग---किसी वस्तु का अंतिम छोर, सिंरा;नदी या समुद्र का छोर, तट।---कंढा, किनाराकंढा, किनारा---किनारा----बॊठबॊठ---सिरो, छेड़ो, किनारोकिनारो---टोककिनारा---किनारो, कोरकांठो, तट---धार, किनाराकूल, किनारा, तीर, तट---काष, किनारकूल, पार---किनारा, घड़ीकूळ, तट, किनारा---अंचुओड्डु---ओरम्करै---कर, ओरंतीरं, तटं---तुदि, कॊनॆदड---
628किफायतस्त्रीलिंग----किसी चीज के उपयोग में या व्यय में की जाने वाली कमी, बचत।----किरस, सरफा----किफ़ायत----क्यफायत----किफायत----बचत----किफायत----किफायत, मितव्ययिता----मिताचार, मितब्यय----मित ब्यथिता----पोदुपु----सिक्कनम्----चिलवुचुरुक्कल्----मितव्यय, उळिताय----
629किरकिराविशेषण----वह वस्तु जिसमें महीन और कड़े कंकड, बालू आदि के कण मिले हों।----किरकिरा----किरकिरा----बद्मजु॑गी----किर्किरो----रेताळ----करकरवाळुं----किरकिर, करकर, काँकर अथवा बालि यु॒क्त (ज)----खेचखेचीया----किरकिरी----गुलकराळ्ळुगल----कल् मणल् कलन्द पोरुळ्----करटु----हरळुवुळ्ळ----
630किरानापुंलिंग----पंसारी या बनिए की दुकान में मिलने वाला समान-दाल, मसालें आदि।----किरिआना----किराना----किरियानु॑----पसारु, किर्यानो----किराणा----करियाणुं---------गेलामाल----ड़ालि त्रसला आदि वस्तुएं----चिल्लरसरुकुलु----मळिगै सामान्----पल व्यंजनं----किराणि----
631किरायापुंलिंगपुंलिंग---भाड़ा;किसी की अचल संपत्ति का उपयोग करने के बदले में उसे दिया जाने वाला धन।---किराइआकिराइआ---किराया----किरायकिराय---भाड़ोमसुवाड़---भाडेंभाडे---भाडुंभाडुं---भाड़ा, केरायाभाड़ा, केराया---केरेया भाराभारा---भड़ासुध, कळंतर---बाडुगअद्दे, बाडुग---बाडगैकुडिक्कूलि---वाटकवाटकक्कूलि---बाडिगॆबाडिगॆ---
632किरायेदारपुंलिंग----किसी की अचल संपत्ति किराये पर लेने वाला व्यक्ति।----किराएदार----किरायेदार----किरायिदार----मसुवाड़ी----भाडेकरू----भाडूत, भाडवात----भाड़ाटिया, भाड़ाटे----भारातीया----भड़टिआ----अद्देकुतीसुकोनुवाडु----वाडगैक्कु इरुप्पवन्----वाटकक्कारन्----बाडिगॆयवनु----
633किलकारीस्त्रीलिंग----बच्चे की हर्ष ध्वनि।----किलकारी----किलकारी----बोल-बोश----किलकारी (बा॒रनि जो खुशीअ जो आवाजु)----लहान मुलाचा हर्ष ध्वनि----किलकारी----शिशुदेर हर्षध्वनि----खिलखिलनि, ठेरा-धोवालीर हर्षोल्लास----पिलांक, हर्षध्वनि कल्लोळ----किलकिल मनि हर्षध्वनि चेयुट किलकिलारवमु----कुळन्दैगळिन् मगिऴचिक्कुरल्----किलुकिलारवं, कॊञ्चल्----केकॆ----
634किलापुंलिंग----दुर्ग, गढ़।----किला----क़िल़ा (क़लआ़)----कु॑लु॑----किलो----किल्ला, गड----किल्लो---------किल्ला, दुर्ग----दुर्ग, गड़----कोट----कोट्टै----कोट्ट, दुर्गं----कोटॆ----
635किवाड़पुंलिंग----दरवाजे का पल्ला, कपाट।----किवाड़, भित्त, बार----किवाड़----दरवाजु॑ पॊट----ताकु, कपाटु, दरु----दाराची फळी----कमाड, बारणुं----कपाट, दरजा----दुवारर, पाल्ला, कपाट----कबाट----तलुपु----कदवु----कतकु----कद----
636किशोरविशेषण----बाल्यावस्था और युवावस्था के बीच का अर्थात् ग्यारह से पंद्रह वर्ष तक की अवस्था का बालक।----गभरेट, किशोर----कमसिन, नौ उ़म्र----लडकु॑----किशोरु----किशोर----किशोर----किशोर----किशोर----किशोर----किशोरुडु----11 वयदुक्कुमेल 15 व्यदुक्कुट्पट्ट पैयन्----किशोरन्----किशोर----
637किसानपुंलिंग----खेती करने वाला, कृषक।----किरसाण----किसान----ग्रूस----किसानु, हारी----शेतकरी, कृषक----किसान, खेडूत----कृषक, चाषी, चाषा----कृषक, खेतियक----कषक----रैतु----कुडियानवन्----कर्षकन्----रैत----
638किस्तस्त्रीलिंग----किसी ऋण या देनदारी का वह भाग जो किसी निश्चित समय पर दिया जाय (इनस्टालमैंट)।----किशत----क़िस्त----कु॑सतु॑----किस्त----हप्ता----क़िस्त, कांधु----किस्ति, भाग, अंश----किस्ति----किस्ति, अंश, भाग----किस्तु, वायदा, कंतु----तवणैप्पणम्----किस्त्, तवण, गडु----कंतु----
639किस्मस्त्रीलिंग----प्रकार, गुण, धर्म।----किसम----क़िस्म----कु॑सु॑म----किस्मु----प्रकार----प्रकार----प्रकार, रकम----प्रकार, बिध----किसम, प्रकार----रकमु----मादिरि, विदम्----तरं----जाति----
640किस्सापुंलिंग----विवरणात्मक रूप में लिखी या कही गई घटना, कहानी, वृत्तांत।----किस्सा----क़िस्सा----कु॑सु॑----किसो----किस्सा, गोष्ट, कहाणी----किस्सो----काहिनी, गल्प----काहिनी, आख्यान, बृत्तान्त----काहाणी, बुतान्त----कथ, वृत्तांतमु----कदै वरलारु॒----कथ----कतॆ----
641कीचड़पुंलिंग----पानी मिली धूल या मिट्टी, पंक, कर्दम।----चिक्कड़----कीचड़----रब----गप, चिक----चिखल----कीचड़----कादा, पाँक----बोका----कादुअ, पंक----बुरद, अडुसु----सगद, सेरु॒----चॆळि----कॆसरु, कॊच्चॆ----
642कीटपुंलिंग----रेंगने या उड़ने वाला छोटा जीव, कीड़ा।----कीड़ा, कीट----कीड़ा, किर्म----क्यॊम----कीड़ो, जीतु----किडा----कीट, कीडो----कीट, कीड़ा, पोका----कीट, पोक----कीट----पुरुगु----पूच्चि----कीटं, पुळु----हुळु----
643कीटाणुपुंलिंगपुंलिंग---बहुत छोटे कीड़े;ऐसे बहुत छोटे कीड़े जो कई प्रकार के रोगों के मूल कारण माने जाते हैं।---कीटाणू, जरासीम----जरासीम----कॆक्य-क्री॑ल जरो॑सीम----जीविड़ा (ब.व.)----जंतुरोगजंतु---कीटाणुरोगना कीटाणुं, जंतु---कीटाणु (न)रोगेर कीटाणु॒ (न)---कीटाणुबीजाणु---कीटाणु----क्रिमि कीटकालुकीटाणुवुलु---पूच्चि-पॊट्टुउयिरणु (सेल)---कीटाणुरोगाणु---कीटकृमि---
644कीडापुंलिंग----उड़ने या रेंगने वाला छोटा जंतु, कीट।----कीड़ा----कीड़ा----क्यॊम----कीड़ो----किडा----कीडो----कीट, कीड़ा, पोका----कीट, पोक----पोक----पुरुगु----पुळु, पूच्चि----पुळु----हुळु----
645कीमतस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---दाम, मूल्य;महत्व।---कीमतकीमत---क़ीमतक़द्र---कू॑मथ----कीमतकदुरु---किंमत मूल्य, दाममहत्त्व---कीमत, किंमतकदर, ब्रूज लेखुं---दाम, मूल्य, किम्मतमहत्त्व---दाम, मूल्यमहत्त्व, मूल्य---दाम, मूल्यमहत्त्व---विलुव, खरीदुविलुव---विलैमदिप्पु---विलप्राधान्यं---बॆलॆमहत्त्व---
646कीमतीविशेषणविशेषण---अधिक कीमत या मूल्य का, मूल्यवान;महत्त्वपूर्ण।---कीमती----क़ीमतीअहम---कू॑मती----कीमतीअहमियत भर्यो---बहुमूल्यमहत्त्वपूर्ण---कीमती, मूल्यवानअगत्यनुं---बहुमूल्य, मूल्यवान्, दामीमहत्वपूर्ण॒ (न)---मूल्यवान्, दामीमहत्त्वपूर्ण---मूल्यबान, दामिकामहत्त्वपूर्ण---खरीदयिनविलुबेन---विलैयुयर्न्दमदिप्पुळ्ळ---विलयेरि॒यप्रधानप्पॆट्ट---दुबारि, बॆलॆयुळ्ळमहत्त्वपूर्ण---
647कीर्तिस्त्रीलिंग----यश, ख्याति।----जस, सोभा, कीरती----शुहरत (शोहरत)----महा॑शूरी----जसु, नामूसु, कीर्ती----कीर्ति यश, ख्याति----कीर्ति----कीर्ति य॒श, ख्याति (ज)----यश, कीर्ति, ख्याति----कीत्ति, ख्याति----कीर्ति----कीर्ति, पुगळ्, पॆरुमै----कीर्त्ति----कीर्त्ति----
648कुंजपुंलिंग----झाड़ियों, लताओं आदि से घिरा हुआ, प्राय: गोलाकार स्थान।----कुंज----कुंज----पोशि वो॑र----कुंजु, वलियुनि सां ढक्यल जग॒ह----लताकुंज----कुंज----कुञ्ज----कुंजबन----कुंज, लता-गृह----पोदरिल्लु----शोलै, कॊडिप्पन्दल्----निकुंजंवळ्ळिक्कुटिल्----कुंज----
649कुंजीस्त्रीलिंगस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग--वह उपकरण जिससे ताला खोला और बंद किया जाता है, चाबी, ताली;ऐसी सहायक पुस्तक जिसमें किसी दूसरी कठिन पुस्तक के अर्थ स्पष्ट किए गए हों;ऐसा सरल साधन जिससे कोई उद्देश्य सहज में सिद्ध हो।--कुंजीकुंजीकुंजी--कुंजीशर्हा (कलीद)चाबी (कुंजी)--कुंज़कुंज़कुंज़--कुंजी, चाबीसूहों, कुंजीकुँजी--किल्लीसहायक पुस्तकगुरुकिल्ली--कूंचीगाईडरहस्य जाणवानुं साधन उपाय--चाबि काठिटीका, नोटबइचाबि-काठि--तलार चाबिसहायक पुथि हात-पुथिसहज उपाय--कुंची, चाबीमानेबहिसरल साधन सहज-उपाय--ताळपुचेविटीकाकीलकमु--साविविळक्क उरैऎळिदिल् पुरिन्दु कॊळ्ळ उदवुम् सादनम्--ताक्कोल्पठनसहायि, गैडुसूत्रं--बीगदकैगाइड् पुस्तकउपाय--
650कुंभपुंलिंगपुंलिंगपुंलिंग--धातु, मिट्टी आदि का बना पानी रखने का एक पात्र, घड़ा, कलश;ज्योतिष में ग्यारहवीं राशि;प्रति बारहवें वर्ष मनाया जाने वाला एक प्रसिद्ध पर्व जो सूर्य और बृहस्पति की कुछ विशेष राशियों में प्रविष्ट होने के समय आता है।--कुंभकुंभकुंभ--घड़ादल्वकुम्भ--मठ, नॊटकॅम्बकॅम्ब--दिलो, घड़ोकुंभुकुंभु--कुंभ, कलशकुंभ राशिकुंभ (मेळो)--कुंभ, घडोएक राशिकुंभ (मेळो)--कुंभ राशिकुंभ राशिकुस्भयो॒ग (ज)--कलहकुम्भराशिकुम्भ मेला--कुंभ, माठिआ, घट, कळशज्योतिष रे एकादश राशि कंभराशिकुंभ-मेळा--कुडकुम्भराशिपुष्करमु--पानैकुंभ राशिकुंब मेलां ऎन्नुम तिरुविऴा--कुटंकुंभंकुंभ मेळ--कॊडकुंभ राशिकुंभ मेळ--
651कुकर्मपुंलिंग----बुरा काम, निंदनीय कर्म।----कुकरम----फ़ेले बद----कॅकरु॑म----कुकर्मु----कुकर्म वाईट काम, निंदनीयकर्म----कुकर्म----कुकर्म----कुकर्म----कुभमेळा----कुकर्म, दुष्कृत्यमु----कॆट्ट वेलै----दुष्कर्मं----कुकर्म----
652कुचक्रपुंलिंग----किसी को हानि पहुंचाने के लिए बनाई गई छलपूर्ण योजना।----कुचक्कर----साज़बाज़, साज़िश----कॅचखु॑र, सा॑ज़िश----मन्सूबो----कुचक्र----कावतरूं----कुचक्र, चक्रान्त----कुचक्र, चक्रान्त----कुकर्म, खरापकाम----कुट्र----सूऴच्चि----गूढालोचन----ऒळ संचु----
653कुचलनासकारात्मक क्रियासकारात्मक क्रियासकारात्मक क्रिया--किसी पदार्थ को इस प्रकार पीसना कि वह बिलकुल महीन हो जाए;आघात, प्रहार आदि से दबा कर घायल या बेकार कर देना;रौंदना।--कुचलणा----कुचलना----लतु॑मॊडं करु॑न्यलतु॑मॊडं करु॑न्यलतु॑मॊड करु॑न्य--चिथणुचीभाटणुलताड़णु--चेंचणेंचिरडणेतुडवणे--कचडवुंचगदवुं, कूटो करवोपगथी मसळवुं--पेषा, गुँडी कराआघात, प्रहारादिर द्वारा जखमकरा अथवा थेतलानपददलित करा--पिंह, येतालयेतालगचक, खच--कुचक्र, षड़जन्त्रदळिबाघाएल करिबा, आघात करिबा--अणगदोक्कुटदंचुटमदिंचुट, तोक्कुट--नशुक्कनॆरुक्ककालाल् मिदिक्क--नशिप्पिच्चुकळयुकमर्दिच्चवनाक्कुकचविट्टित्तेक्कुक--हिसुकुवुदुजज्जुवुदुतुळियुवुदु--
654कुछविशेषणक्रिया विशेषणसर्वनामसर्वनाम-थोड़ी संख्या या मात्रा का, अल्प, कम जरा-सा, थोड़ा-सा।अज्ञात, अनिर्दिष्ट या अनिश्चित परिणाम, मात्रा या रूप में।कोई अज्ञात अनिर्दिष्ट या अनिश्चित वस्तु या बात;कोई हानिकारक चीज या बात।-कुझ, कुछ----कुछकुछकुछ--कॆहंकॆहं---कुछु----थोडेकिंचितकाहीएखादी हानिकारक वस्तु वा गोष्ट-थोडुंकेटलुंककाईक, कशुंककंईक-किछु, किञ्चित, अल्प कम, इषतकिछुकिछुकिछु-अलपयि कोनो (परिणाम)किबाकिबा (हानिकारक)-किळि, अल अळ्प, कम किचितअनिर्दिष्ट परिमाणेरेअज्ञात, अनिर्दिष्ट बस्तु वा कथा (किंबा)हानिकारक कथा (किछि)-कोन्निऍदो, ऍन्नो, एवरोएदोएदो-कॊजंम्, सिलकॊजंम्, सिलएदोसिल (पोरुळ्गळ्)ऎदुवो-कुर॒च्चु, अल्पंकुरच्चुएतोऎन्तो-कॆलवुस्वल्पएनोएनादरू-
655कुटियास्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---घास-फूस का बना छोटा मकान या घर, झोंपड़ी, कुटी;साधु-संतों आदि के रहने की झोंपड़ी।---कुटीआकुटीआ---कुटिया----कुटिया, जोम्फु॑र----झूपिड़ीकुटिया---झोंपडीसाधु संताच्या राहाण्याची जागा, कुटी---कुटि, कुटिर, झूंपडीकुटिर, झूंपडी, पर्णकुटी---कुड़े घरकुटिर---किबासाधु सन्त-लोक थका जूपुरी---कुटीर, जुपुरीसाधुपंथक रहिबा कुड़िआ---कटीर, गुडिसेकुटीरमु---कुडिशैमुडिल्---कुटिल्आश्रमम्---कुटिल्कुटीर---
656कुटिलविशेषणविशेषण---टेढ़ा;मन में छल, कपट, द्वेष आदि रखने और छिपकर बदला लेने वाला, कपटी, दुष्ट।---कुटिल----कज (टेढ़ा)कजतबअ़---कॅट्यल----डिं॒गोकपटी, चालाकु, हिर्फती---कुटिल बाईट, वाकडाकपटी, दुष्ट---कुटिल, वांकुछळवाळुं---कुटिल, बणाकुटि॒ल (वल)---टँरा, बेकाँकुटिल, कपटीया---कटिळ, तेढ़ाकपटी, दुष्टं---कुटिल मयिन, वंकरयिनकपटि---कोणलानवंजगमान---वळञ्ज, वक्रमायदुष्टन्, कपटशालि---वक्र, सॊट्टकपटि, कुटिल---
657कुटीर-उद्योगपुंलिंग----ऐसे छोटे-मोटे काम जिन्हें लोग घर में ही करके जीविका निर्वाह के लिए धन कमा सकते हैं, घरेलू-उद्योग।----घरेलू दसतकारी, घरेलू उदिओग----घरेलू सन्अ़त (काटिज इंडस्ट्रीज़)----लॅकुट गरेलू सनत----धरू हुनिर----कुटीर उद्योग, गृहोद्योग----कुटीर उद्योग, गृहोद्योग----कुटीर-शिल्प----कुटीरशिल्प----कुटीर, शिळ्प----कुटीर परिश्रम----कुडिसै-तॊऴिल्----कुटिल् व्यवसायं----गृह कैगारिकॆ----
658कुटुंबपुंलिंग----परिवार।----टब्बर, कुटंब----कुंबा (ख़ानदान)----कॅटंब, अयाल----कुटुंबु----कुटुंब----कुटंब----कुटुम्ब, कुटुम----कुटुम----कुटुंब परिबार----कुटुंबमु----कुडुंबम्----कुटुंबं----कुटुंब----
659कुढ़नाअकारात्मक क्रिया----मन ही मन दुखी और विकल होना।----कुढ़ना----कुढ़ना----बॆज़ार----खफे थियणु, बेजारु थियणु----कुढणे----कुढवुं, बळापो करबो----विरक्त हओआ----सन्तप्त ह, विकल ह----घारिबा, बिरकृध्बा, बिकलहबा----कुमिलिपोवु----वॆरु॒प्पु कॊळ्ळ्----मनस्सुरुकुक----संकटपडु----
660कुतरनासकारात्मक क्रिया----दांत से छोटे-छोटे टुकड़ों के रूप में काटना।----कुतरणा----कुतरना----त्रुकुन, ब्रकुन----कुतिरणु----कुरतडणें----दांतथी कांपवुं----दाँत दिया कुटि कुटि करे काटा----कुट (दाँतेरे)----दोंतरे टुकड़ा करिबा दांतरे कतुरिबा----कोरुकुट----कडित्तुक्कुदर----कटिच्चुपॊट्टिक्कुक----कच्चुवुदु----
661कुतूहलपुंलिंगपुंलिंग---किसी नई और अनोखी चीज को जानने के लिए मन में होने वाली प्रबल इच्छा, जिज्ञासा;आश्चर्य।---उतसुकता, जगिआसा----तजस्सुसइस्त़ेजाब, तहय्युर---खोव, शोख----अजबु, हैरत----कुतुहल, जिज्ञासाआश्चर्य---कुतूहलनवाईभरी वस्तु---कुतूहल, औत्सुक्य, जिज्ञासाआश्चर्य॒ (ज)---कौतुहलआश्चर्य, बिस्मय---कौतुहलआश्चर्य---कुतूहलमुआश्चर्यमु---पुदुविषयंगळै तोरिन्दुकोळ्ळुम् आवल्आच्चरियम्---कुतुहलं, कौतुकंआश्चर्यं---कुतूहलआश्चर्य---
662कुप्पीस्त्रीलिंग----तेल, चिकनाई आदि रखने या डालने के लिए छोटा पात्र।----कुप्पी----कुप्पी----कुप्प----कुपी, दबी॒----बुधली----कुप्पी---------तेलर कुपी----कुप्पी----सिद्दे, गिन्ने----शीशा, कुप्पी, पुट्टि ऎण्णैक्कुप्पि----कुप्पि----बुड़िड----
663कुबड़ापुंलिंग----ऐसा व्यक्ति जिसकी पीठ टेढ़ी हो गई हो या झुकी हुई हो (हंच बैक)।----कुब्बा----कुबड़ा----कॊब----कुबि॒ड़ो----कुबडा----कूवडु, बेढंगु----कुँजो----कुँजा----कुजा----गूनिवाडु----कूनन्----कूनन्----गून----
664कुमकुमपुंलिंगपुंलिंग---केसर;रोली।---केसर----ज़ाफ़रानरोली (कुंकुम)---कँगं----कैसरिरोली (हैड ऐं चुनो गडे॒ ठहियलु लेपु जेको निरिड़ते लगाइबो आहे)---केशरकुंकुम---केसर, कुमकुमकंकु---केशर, कुमकुमकुमकुम चूर्ण॒ (र्न)---कुंकुमसिन्दुर---केसरकंकुम (ठाकुरकं पांइ)---कुंकुमंएर्रमन्नु---कुंकुमम्कुकुमम्---कुंकुमंकुंकुमं---केसरिकुंकुम---
665कुमुदिनीस्त्रीलिंग----एक प्रकार का पौधा जिसमें कमल की तरह के सफेद पर छोटे-छोटे फूल लगते हैं तथा जो रात में खिलते हैं, कुई।----कम्मी----नलोफ़र (निलोफ़रे माहताबी)----पंपोश----कुमुदिनी, कूणीअ जो गुलु----चंद्रकळ, कुमुदिनी----कुमुदिनी----कुमुदिनी----भेटफुल----कुमुदिनी, कईं----तेल्लकलुव----अल्लिप्पू----आंपल् कुमुदिनि----कन्नदिलं----
666कुम्हलानासकारात्मक क्रियासकारात्मक क्रिया---मुरझाना;चेहरे का रंग फीका पड़ना।---कुमलाउणा----कुमहलाना----च़मु॑ठुनशुसुनन---कूमाइजणुमुंहं पीलो पवणु---क़ोमेजणें,चेहप्याचा रंग फिका पडणें---करमावुंचहरानोरंग फीको पडवो---शुकाइया याओया॒ (जा)म्लान हओया, निष्प्रम हओआ---मरह, लेरेलशेंता पर---झाउंळि पड़िबाफीका पड़िबा---वाडिपोवुटपालिपोवुट---वडिप्पोगमुगंवाड---वाटुकवाटुक---बाडुवुदुसप्पॆयागुवुदु---
667कुलपुंलिंगविशेषण---खानदान, घराना, वंश।पूरा सारा।---कुलकुल---ख़ानदानकुल---खानदान, कॅलसोरुय---कुल, खानदानुकुलु, खान्दानु---कुल वंश, घराणेपूर्ण, सारे---कुल (ळ)वधुं, तमाम---कुल, वंशपुरो, समस्त---कुल बंशसकलो, पूर्ण, सम्पूर्ण---कुल, बंशपूरा, समल, समस्त संपूर्ण (पूर्ण्ण, संपूर्ण्ण)---कुल़मुमोत्तमु, पूर्ति---वंशम्, कुलम्पूरा, मुऴु---कुलं, वँशंआकॆ, मॊतं---वंश, कुलऒट्टु---
668कुल देवतापुंलिंग----वह देवता जिसकी पूजा किसी कुल में परम्परा से होती आई हो।----कुलदेवता----ख़ानदानी देवता----कॅलदिवता----कुलु देवता----कुलदेवत----कुलदेवता---------------------------------------
669कुलीनविशेषण----उच्च कुल में उत्पन्न, ख़ानदानी।----खानदानी----ख़ानदानी, मुअ़ज्ज़ज़----खानदा॑न्य----खान्दानी, सुठे कुल जो----कुलीन----कुलीन----कुलीन----कुलीन, सद्बंशज----कुळीन, खानदानी----कुलीनुडु, मंचिवंशमुन्पुट्टिन्----उयर् कूलत्तु----कुलीनन्----कुलीन----
670कुल्हड़पुंलिंग----मिट्टि का बना हुआ छोटा पात्र।----कसोरा----कुल्हड़----मचिवा॑र----ठिकर जो प्यालो----मतीचे लहान पात्र----कुलडी----भांड़----मदिर मत्रा----शरा----मट्टिपिडत----मण् किण्णम्----मण् कुटुक्क, मण् किण्णं----मण्णिन कुडिकॆ----
671कुशलविशेषणविशेषणपुंलिंग--चतुर, होशियार;जिसने कोई काम अच्छी तरह करने की शिक्षा पाई हो, प्रशिक्षित (स्किल्ड)।खैरियत, राजी-खुशी।--हुनरमंद-राजी-बाजी, कुशल--उस्ताद, मश्शाक़माहिरख़ैरियत--हुशार-रु॑च़र--भड़ु, होशियारुमाहिरुचङभलाई--कुशल चतुर, हुशारकुशल, प्रशिक्षित (कारागीर)कुशल, क्षेम--कुशल (ळ)कुशल (कारीगर)शुभ, कल्याण--चतुर, चालाककुशल, निपुण॒, (दक्ष) (न)कुशल, मंगल--कुशल, पार्गतनिपुणकुशल-मंगल--कुशळ, चतुरकुशळी, विशेषज्ञखुसि (कुशल-मंगल)--चतुरुडुसमर्थुडु, प्रवीणुडुकुशलमु--कैतेर्न्दकैर्तेर्न्द, निपुणन्क्षेमम्, सौक्कियम्--समर्थन्प्रवीणन्, प्रगल्भन्, विदग्धन्क्षेमं--कुशलनिपुणक्षेम--
672कुश्तीस्त्रीलिंग----एक प्रसिद्ध भारतीय खेल जिसमें दो व्यक्ति अपने शारीरिक बल तथा दांव-पेच से एक दूसरे को चित करने का पयत्न करते हैं (रैस्लिंग)।----कुशती, घोल----कुश्ती----कुश्ती----कुश्ती----कुश्ती, मल्लयुद्ध----कुस्ती----कुस्ति, मल्लयु॒द्ध (ज)----कुस्ति, मालयुँज----कुस्ति (मल्लजुद्ध)----कुस्ती, मल्लयुद्धमु----गुस्ति----गुस्ति----कुस्ति----
673कुष्ठपुंलिंग----एक संक्रामक रोग जिसमें शरीर की त्वचा, नसें आदि सड़ने-गलने लगती है; कोढ़।----कोढ़----कोढ़----म्योंद----कोढु----कोड, महारोग----कुष्ठ, कोठ----कुष्ठ----कुष्ठरोग----कुष्ट (रोग) कोढिया----कुष्ठु रोगमु----तॊऴुनोय्----कुष्ठ रोगं----कुष्ठ----
674कुसुमपुंलिंग----पुष्प, फूल।----फुल्ल----फूल----पॊश----गुलु, पुष्पु----कुसुम, फूल----कुसुम, फूल----कुसुम, फुल, पुष्प----कुसुम, फुल----कुसुम, फुल, पुष्प, सुमन----कुसुममु, पुव्धु----पू----पुष्पं, कुसुमं----हूवु----
675कूंची (कूची)स्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---चित्रकार की वह कलम जिससे वह चित्रों में रंग आदि भरता है, तूलिका;मूंज आदि का बनाया हुआ एक प्रकार का ब्रुश जिससे दीवारों पर पुताई की जाती है।---कूचीकूची---कूची (कूंची)----बुरुश----बुर्शु (चित्रकारी-अजो)मुञ जी ठह्यिल पोची---तूलिका, ब्रशकुंचला---पींछीकूचडो---तुलिब्रुशं---तुलिकाबेरत चूण दिया ब्रुरूज, ब्राछ---तुळिका, तुळी(ब्रुश)---कुंचेकुंचे---वर्णम् तीट्टुम् तूरिकैविरष्, वॆळ्ळै आडिक्कुम् मट्टै---ब्रष्ब्रष्---ब्रशसुण्णद कुंच---
676कूंआ (कुआं, कुवां)पुंलिंग----पानी निकालने के लिए जमीन में खोदा हुआ गहरा तथा गोल गड्ढा, कूप।----खूह----कुवाँ (कुंआ)----क्रूल----खूहु----विहीर----कूवो----कुआ, कूप----नाद, कुँवा----कूअ----बावि----किणरु॒----किणरु॒, कूपं----बावि----
677कूटनासकारात्मक क्रियासकारात्मक क्रियासकारात्मक क्रिया--किसी चीज को महीन करने के लिए उस पर भारी वस्तु से बार-बार मार करना;ठोंकना, पीटना;भूसी अलग करने के लिए धान को ऊखल (ओखली) में रख कर मूसल आदि से उस पर बार-बार आघात करना।--कुट्टणा----कूटना----च़ेटुनठुकुनमुनुन--कुरणुठोंकणुछंड़णु--कुटणेठोकणे, पिटणेकांडणे--कुटवुंठोंकवुंकुटवुं--कोटा, कुटा गुँडो करापेटानकोटा, कुटा, निस्तुषकरा--कोबा, खुन्दकाबा, मारबान (ढेकीत)--कूटिबापिटिबा, ठुंकिबाकुटिबा--दंचुटदंचुटदंचुट--पॊडियाक्कतट्ट, आडिक्कइडिक्क--पॊटिक्कुकतल्लुकउरलिल् इट्टु इटिक्कुक--कुट्टुवुदुहॊडॆयुवुदु, बडियुवुदुकुट्टुवुदु--
678कूटनीतिस्त्रीलिंग----व्यक्तियों या राष्ट्रों के पारस्परिक व्यवहार में दांव-पेच की नीति, छिपी हुई चाल।----कूटनीति----सियासत (हिकमते अ़मली)----चाल, सियासत----कूट नीती, हिकमत असली, राज॒नीती चालाकी----कूटनीति----कूटनीति----कूटनीति----कूटनीति, गोपन चक्रान्त----कूटनीति----कुटु, कूटनीति----अरसियल् तंदिरम्----नयतंत्रं----कूटनीति, रायभार व्यवहार----
679कूदनाअकारात्मक क्रियाअकारात्मक क्रिया---किसी ऊँचे स्थान से नीचे स्थान की ओर बिना किसी सहारे के छलांग लगाना;किसी काम या बात के बीच झट आ पहुंचना या दखल देना।---कुद्दणा, टप्पणाकुद्दणा---कूदना----वॊठ त्रावु॑न्यवॊठ त्रावु॑न्य---टपणु, अपो डि॒यणुटपी पवणु, दखलु डि॒यणु---उडी मारणेमध्ये पडणे---कूदवुंकूदी पडवुं---लाफानदखल देओया---जापियामाजत सोमा---डेंइबा----दूकुटदूकुट---कुदिक्कदिडीरेन वंदु शेर्न्दुकोळ्ळ---चाटुकइट्क्कु कायरु॒क, चाटि वीळुक---हारुवुदु जिगियुवुदुमध्यॆ बरुवुदु---
680कृतघ्नविशेषण----उपकार को न मानने वाला----किरतघन----नाशुक्रा (एहसान फ़रामोश), नमक हराम----एहसान फरामोश----कृतध्नु गुणचोरु अहिसान फरामोशु----कृतध्न----कृतध्न----कृतध्न----कृतघ्न, अकृतज्ञ----कृतध्न----कृतध्नुडु----नन्रि मर॒न्द----कृतध्नन्----कृतध्न----
681कृतज्ञविशेषण----उपकार को मानने वाला----किरतग्न----एहसानमंद, ममनून----मशकूर----आहिंसानमंदु, शुकुरु गुज़ारु----कृतज्ञ----कृतज्ञ----कृतज्ञ----कृतज्ञ----कृतज्ञ----कृतज्ञुडु----नन्रि॒ मर॒वाद----कृतज्ञन्----कृतज्ञ----
682कृतार्थविशेषणविशेषण---जिसका उद्देश्य सिद्ध हो गया हो;जो अपने उद्देश्य के सिद्ध हो जाने के कारण संतुष्ट हो।---किरतारथकिरतारथ---शादकाम (फ़ारिग़)----क्रितारथ----कृतार्थु, सफलुमनोरथु---कृतार्थकृतार्थ---कृतार्थकृतकृत्य---कृतार्थकृतार्थ---कृतार्थसन्तुष्ट---कृतार्थकार्यसिद्धि रे संतुष्ट---कृतार्थुडुकृतार्युडु---नोक्कत्तिल वेट॒टि॒ पेट॒ट॒तिरुप्ति अडैन्द---कृतार्थन्चरितार्थन्---कृतार्थकृतार्थ---
683कृत्रिमविशेषणविशेषण---जो प्राकृतिक न हो, मानव निर्मित;बनावटी, दिखावटी।---बनाउटी----मसनूई, नक़ली----नकली----गैर कुदरती, हथराधू;बनावटी, नकुली---कृत्रिमबनावटी, दिखावटी---कृत्रिम, अकुदरतीबनावटी---कृत्रिम, अप्राकृतिककृत्रिम, आडम्बरपूर्ण---कृत्रिमसज्जित, देखनिचार---कृत्रिमदेखाइहेबा---कृत्रिममयिनकपटमु---शॆयकैयानपगट्टान---कृत्रिमंकॊट्टिच्चमच्च---कृतक, कत्रिमतोरिकॆय---
684कृपास्त्रीलिंग----अनुग्रह, दया।----किरपा----मेहरबानी, इनायत----क्रपा, दया----कृपा----कृपा----कृपा----कृपा, अनुग्रह, दया----कृपा, अनुग्रह, दया----कृपा----कृप----दयवु----कृप----कृपॆ, अनुग्रह----
685कृषिस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---खेतों को जोतने-बोने और उनमें अन्न आदि उपजाने का काम, खेती-बारी;फसल।---खेती, वाहीफसल---खेती (ज़राअ़त)फ़स्ल---जमींदारी----खेतीफसुलु---शेती, शेती बाडी;पीक-पाणी---कृषि, खेतीफसल---चाष, कृषिचाष, फसल---कृषि, खेतिफचल, खेति---कृषिफसल---व्यवसायमुपंट---वेळाण्मैपयिर्, विळैच्चल्---कृषिविळवु---सागुवळिबेळें---
686केंद्रपुंलिंगपुंलिंगपुंलिंग--किसी गोले या वृत के बीच का वह बिंदु जिससे उस गोले या वृत की परिधि का प्रत्येक बिंदु बराबर दूरी पर पड़ता है (सेंटर);मध्य भाग;वह मूल या मुख्य स्थान जहाँ से चारों ओर दूर-दूर तक फैले हुए कार्यों की व्यवस्था तथा संचालन होता है।--केंदर----मर्कज़----मरकज़मंज़बागमरकज़, केंद्र--मर्कर्ज़ुविचुमर्कज़ु, केंद्रु--केंदमध्य भागकेंद्र--केन्द्रमध्यबिंदुकोई वस्तु नुं मध्य या मुख्य स्थान--केन्द्रकेन्द्र, मध्यभागकेन्द्रस्थान--केन्द्रमध्यभाग, माजकेन्द्र--केन्द्रमध्यभागमूळ बा मुख्यस्थान--केंद्रमुकेन्द्रमुकेन्द्रमु--मैयम्नडुप्पगुदितलैमै निलैयम्--केंद्रमध्य भागंकेद्रं--केंद्रमध्यमुख्य स्थान--
687केवलविशेषणक्रिया विशेषण---जिसका या जितने का उल्लेख किया जाए वही या उतना ही।मात्र, सिर्फ---सिरफ, केवल----फ़कत, महज़सिर्फ़---सिरिफ----रुगो, फ़कुतिरुगो॒, सिर्फ़ु---केवल मध्य भागफक्त, एक मात्र, मात्र---केवल (ळ)मात्र, फक्त---शुधु, केवलमात्र, शुधु, केवल---केवल, एकमात्रमात्र---केबळमात्र, सिर्फ---अन्ते, केवलमुकेवलमु---मट्टुम्मात्तिरम---केवलंबॆरुं॒, मात्रं---बरॆ, कॆवलमात्र---
688केशपुंलिंग----सिर के बाल।----केस----मू (सिर के बाल)----मस, किह----वार, केस----केस----केश, बाल----चुल, केश----केश, चुलि----केश, बाळ----केशमुलु, जुट्टु वेंट्रकलु----तलै मयिर्----तलमुटि, केशं----कूदलु----
689कैस्त्रीलिंग----उलटी, वमन।----कै----क़ै----कय, द्रॊरव----कइ, उलटी----ओकारी----ऊलटी, वगन, ओकारी----बमि, वमन----बमि----बांति, बमन----डोकु, वांति----वान्दि----छेर्दि----वांति----
690कैदस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---अपराधियों को दंड देने के लिए बंद स्थान में रखना, कारावास;बंधन।---कैद----क़ैद----का॑दखानु॑----कैदुब़ंधनु---कैदबंधन---केद, जेलबंधन युक्त स्थिति---कयेद, जेल, कारावास, बन्दिशालाबन्धन---काराबासबन्धन, बान्धोन---कइदिखाना, कारागर, बन्दिशाळाबन्धन---चॆर, जैलुबंधनमु---कैदकट्टु---तटवुबंधनं---जैलुकैदु---
691कैदीपुंलिंग----वह जिसे कैद अर्थात् बंधन में रखा गया हो, बंदी।----कैदी----क़ैदी----कू॑द्य----कैदी----कैदी बंदी----केदी----कयेदी, बन्दी----कयदी, बन्दी----कइदी, बंदी----खैदी----कैदि----बंधनस्थन्, तटवुपुळ्ळि----बंदि, कैदि----
692कोंपलस्त्रीलिंग----पेड़-पौधों आदि में से निकलने वाली नई मुलायम पत्तियाँ, कल्ला।----तूई, करूंबल----कोंपल----बामन----गौचु, नओं फुटलु पनु----अंकुर----कूंपळ----किशलय, कचिपाता----कुँहिपात----कंअळिया पत्र किशळय----चिगुरुटाकु----तळिर्----अंकुरं, पॊटिप्पु----चिगुरु----
693कोईसर्वनामविशेषणक्रिया विशेषण--दो या दो से अधिक वस्तुओं, व्यक्तियों आदि में से ऐसी वस्तु या व्यक्ति, जिसका निश्चित उल्लेख या परिज्ञान हो।न जाने कौन एक, बहुतों में से चाहे जो एकलगभग।--कोईकोईकोई--कोईकोईकोई--काँह----को, कोई, काकोईलगि॒ भगि॒--कोणीकोणीतरीसुमारे, जवळ जवळ, बहुधा--कोईगमे ते, एक, कोई एक, कोईकलगभग--कोनो, केह, केउकोनो, केह, केउप्राय--कोनो, यकोनो, कोनोबा, किबायिकोनोप्राये, प्रायेइ--केहि, कौणसिबहुतंक मध्यरू एकप्राय--ऍवरैननु, ऍवरो, एदोऍवरो ओकरुसुमारु, रमारमि--एदावदु ऒरु, ऎवनोएदावदु ऒरु, ऎवनोसुमार्--आरो, एतोआरो, एतोएकदेशं--यारोयारादरु, यावुदादरुसुमारु--
694कोठरीस्त्रीलिंग----छोटा कमरा।----कोठड़ी----कोठरी----कूठु॑र----कोठिड़ी----लहानखोली, कोठरी----कोटडी----कुठरी, खोप----कुठरी----कोठरी, बखरा----कोटिटडि, गदि----सिरु॒ अरै॒----चॆरिय मुरि॒----कोणॆ कोणॆ----
695कोठीस्त्रीलिंग----बहुत बड़ा, ऊँचा और पक्का मकान।----कोठी----कोठी----कूठ्य----कोठी, बडो॒ घरु, बंगुलो----कोठी, वाडा----मोट़ु भव्य मकान----कुठि, अट्टालिका----डाङर पकीघर, दालान----कोठी, कोठाघर----भवनमु, भवन्ति----माळिगै, बंगला----बंगळावु----बंगलॆ----
696कोतवालपुंलिंग----पुलिस का वह प्रधान कर्मचारी जिसके अधीन कई थाने और बहुत-से सिपाही होते हैं।----कोतवाल----कोतवाल----कुटवाल----कोटिवालु----कोतवाल पोलिस इन्स्पेक्टर----कोटवाल (ळ)----कोटाल, कोतोयाल----दारोगा----कटुआक (पोलिस-इन्सपेक्टर)----पोलीस इन्स्पेक्टरु----कावळ तुरै आदिकारी पोलिस इंस्पक्टर्----पोलिस इन्स्पेक्टर॒ कॊत्तुवाळ्----पोलीसु अधिकारि----
697कोतवालीस्त्रीलिंग----कोतवाल का मुख्यालय।----कोतवाली----कोतावाली----कुटवा॑ली----कोटिवाली, मुख्यु पुलीस थाणो----कोतवाली, मुख्य पोलिस ठाणे----थाणुं----कोतोयालि, थाना----पुलिच थाना, आरक्षी चकी----कटुआळक कार्ज्याळय----पोलीस स्टेशनु----कावल् निलैयम्----पोलिस् स्टेशन्----ठाणॆ----
698कोमलविशेषणविशेषण---जिसके देखने, सुनने अथवा स्पर्श से प्रिय अनुभूति तथा सुखद संवेदन होता हो;जो सहज में काटा, तोड़ा या मोड़ा जा सके।---कूला, कोमलकूला, कोमल---मुलाइम, नर्म----कूमल, नरु॑म----कोमलुनर्मु, मुलाइमु---कोमलनरम, मुलायम---कोमल (ळ)कुमळु---कोमलकोमल, नरम---कोमलकोमल, ढिला---कोमलनरम---कोमलमयिनसुन्नितमयिन---मिरुदुवानऎळिदिल् वॆट्ट अल्लदु मडिक्कक्कूडिय---कोमळंऎळुप्पत्तिल्, मृदु, किळुन्नु---कोमलमृदु---
699कोराविशेषण----जो अभी तक उपयोग या व्यवहार में न लाया गया हो, बिलकुल ताजा और नया।----कोरा----कोरा----कोरु॑----कोरो, नओं----कोरा,----कोरूं----कोरा, आनकोरा, नूतन----नतुन----अरखनुमा----कोत्त, वाडनि----इदुवरै उपयोगिक्काद, पुदिय----पुतिय, कोटि----होस----
700कोलाहलपुंलिंग----बहुत से लोगों के बोलने अथवा चीखने-चिल्लाने से होने वाला घोर शब्द, शोर।----हाल-दुहाई----शोर, गुल----शोर----कोलाहलु----कोलाहल,----कोलाहल----कोलाहल----कोलाहल----केळाहळ, पाटितुण्ड करिबा----कोलाहलमु----कोलाहलम् इरैच्चल्----कोलाहलं----गद्दल, गलाटॆ----
701कोल्हूपुंलिंग----बीजों आदि को पैर कर उनका तेल और गन्ने आदि पेर कर रस निकालने का एक यंत्र।----कोल्हू----कोल्हू----तीलु॑वान्यवान----घाणो----चरक, घाणा----कोलु----घानि----शाल, घानी----घणा----गानुग----सॆक्कु----चक्कु----गाण----
702कोश (कोष)पुंलिंगपुंलिंग---वह ग्रंथ जिसमें किसी विशेष क्रम से शब्द और उनके अर्थ दिए हों, शब्द कोश;इकट्ठा किया हुआ धन आदि।---कोश----लुग़त (लुग़ात)ख़ज़ाना---डिकश॑नरी, लॅगत----कोशु, डिक्शिनरी, लुग़तकोशु, खज़ानो---शब्द कोशकोष, निधि---कोश (ष), शब्द कोशभंडार, खजानो---कोश, शब्द-कोष, अभिधानकोष---अभिधान, कोषपूँजि, एकत्रित धन---कोश, शब्दकोशएकत्रराशीकृत धन, कोष---कोषमु, निघंटुवुखजाना---अगरादिपॊक्किषम्---शब्द कोशं, निघंटुनिधि, खजानावु---शब्दकोशबोक्कस---
703कोशकारपुंलिंग----शब्द कोश के लिए शब्दों का संग्रह तथा उनका संपादन करने वाला।----कोशकार----मुदव्विने लुग़त (लुग़तनवीस)----डिकश॑नरी बनावन वा॑ल, लॅगतनवीस----कोशकारु, लुग़तनवीसु----कोशकार----कोशकार----कोषकार, अभिघानकार----कोषकार, अभिधान लिखक----कोशकार----निघंटुकर्त----अगरादि आशिरियर्----निघण्टुकारन्, कोशकारन्----कोशकार----
704कोशिशस्त्रीलिंग----प्रयत्न, चेष्टा।----कोशिश----कोशिश----कूशिश----कोशिश----प्रयत्न----कोशिश----प्रयास, प्रय॒त्न, चेष्टा (ज)----यत्न, चेष्टा----प्रजत्न चेष्टा----प्रयत्नमु----मुयर्चि----प्रयत्नं----प्रयत्न----
705कोषाध्यक्षपुंलिंग----वह कर्मचारी जिसके पास कोष रहता है, खजांची।----खजानची----ख़ज़ांची (ख़ज़ानची)----खँजॊची----ख़ज़ांची----कोषाध्यक्ष खजीनदार----कोशा (षा) ध्यक्ष----कोषाध्यक्ष॒, खजाञ्ची (क्ख)----कोषाध्यक्ष----कोशाध्यक्ष, खजांची----कोशाधिकारि----पाक्किषदार----खजांचि----खजांचि----
706कोष्ठकपुंलिंग----( ), [ ] और { } चिह्नो में से कोई एक जिसमें अंक शब्द, पद आदि विशेष स्पष्टीकरण के लिए संकेत रूप में अथवा ऐसे ही किसी और उद्देश्य से रखे जाते हैं।----कोशठ, ब्रैकट, बंधनी----क़ौसैन----ब्रेक्यठ----डिं॒ग्यूं, डिं॒ग्युनि जी निशानी, ब्रैकेट----कंस----कौस----बन्धनी----बन्धनी----कोष्ठक, बन्धनी चिह्न----ब्रेकेट्टु, कुंडलि----अडैप्पुक्कुरि॒----कोष्ठकं ब्राक्कट्टु----आवरण चिह्नॆ----
707कोसनाअकारात्मक क्रिया----सताये जाने पर किसी की अशुभ कामना करना।----कोसणा----कोसना----बॊहु॑वोह करु॑न्य----पिट-पारातो करणु----शिव्याशाप देणे----महेणुं भारवुं----अभिशाप, अभिसम्पात----अभिशाप दि, अमंगल कामना-कर----गळिदेबा----तिट्टुट----शबिक्क----पिराकुक, शापिक्कुक----बैयुवुदु, शपिसुवुदु----
708कौंधनाअकारात्मक क्रिया----कुछ क्षणों के लिए (बिजली का) चमकना।----चमकणा, कूंदणा----कोंदना----बुज़ु॑मलु॑----चिम्कणु----(बीज) चमकणे----बीजळीनो चमकारो थवो----चमकानो----जिलिक, चिकमिका----बिजुळि चमकिबा----मेरयुट----मिन्न----मिन्नुक----हॊळॆयुवुदु----
709कौतुकपुंलिंगपुंलिंग---ऐसी अद्भुत या विलक्षण बात जिसे देखकर आश्चर्य भी हो और जिसे जानने की उत्सुकता भी हो;मनोविनोद, दिल्लगी।---कौतक----अ़जूबातमाशा---तमाशिजॆशनु॑---कौतुकु, करामततमाशो, मनोरंजनु---कौतुक, विलक्षण गोष्टथट्टा---कौतुकटीखल---कौतुकआमोद, परिहास, हासि ठाट्टा, क्रीड़ा कौतुक---कौतुकआनन्द, फुर्त्ति---कौतुकमनोविनोद---कौतुकमु, आश्चर्यमु, कौतूहलमुतमाशा---विन्दैयान विषयतै अरि॒युम आवल्परिगासम्, आवल्---कौतुक्मनोविनोदं, नेरंपोक्कु---सोजिग कौतुकविनोद---
710कौनसर्वनामसर्वनाम---एक प्रश्नवाचक सर्वनाम जो किसी वस्तु, व्यक्ति आदि के संबंध में जानकारी प्राप्त करने के लिए प्रयुक्त होता है;कोई व्यक्ति।---कौण----कौन----कुस----केरुको---कोणकोणी व्यक्ति---कोणकोई पण व्यक्ति---कि (वस्तु), के (व्यक्ति) कोन्कोनो लोक---कोन, कोनटोकोनोबा---किएकौणसि व्यक्ति---ऍवरुऍवरु---यार्, ऎन्दऎवन्---आरुएतॆङकिलुं व्यक्ति, एवन्---यारुयावनु---
711क्यासर्वनामक्रिया विशेषण, अव्यय---एक प्रश्नवाचक सर्वनाम जो उद्दिष्ट या अभिप्रेत वस्तु, किसी तथ्य, स्थिति आदि के संबंध में जिज्ञासा का भाव व्यक्त करता है या उसकी ओर संकेत करता है;आश्चर्यजनक प्रसंगों में किसी प्रकार का आधिक्य या श्रेष्ठता सूचित करने वाला तथा उपेक्षासूचक प्रसंगों में तुच्छता या हीनता का बोध कराने वाला।---की----क्या----क्याह----छा ?छा !---कायकाय!---शुंशुं---किकी---किहाँ! आशचर्य प्रकाशक उक्ति विशेष---काण़----एमिटिअलागा---ऎन्नवियप्पु, अवमदिप्पिनैकुरिक्कुम सॊल्---ऎन्तुऎन्तु---एनुएनु---
712क्योंक्रिया विशेषण----किसी उद्देश्य, अधिकार अथवा कारण से, किसलिए।----किओं----क्यों----क्याज़ि----छो? छा लाइ?----कां----शामाटे, केम----केन----किय----काहिंकि----ऍन्दुकु----एन्----ऍन्तिनु, ऍन्तु कॊण्डु----एकॆ, एतक्कॆ----
713क्योंकिअव्यय----कारण यह है कि, इसलिए कि।----किओं जे, किओंकि----क्योंकि----तिक्याणि----छो त----अशासाठी की----केमके----कारण॒, केनना (न)----कारण----कहिंकि ना----ऍन्दुकन्टे, एन्दुकनगा----एन्नॆरा॒ळ्----एन्तु कॊण्डॆन्नाल्----एकॆन्दरॆ----
714क्रमपुंलिंगपुंलिंग---कोई नियत या निश्चित पद्धति, तरतीब, सिलसिला;उचित रूप या ठीक तरह से काम करने का ढंग।---लड़ी, क्रम----तरतीब, सिलसिलासलीक़ा, (नज़्म)---सिलसिलु॑त॑मीजु॑---सिलसिलो, क्रमु----अनुक्रमरीत---क्रमतरीका---क्रमक्रम, नियम---क्रमक्रम---क्रमठीक भाबरे काम करिबा ढंग---क्रममुक्रममु---वरिशैआळुंगु, मुरै॒---क्रमंमुर॒---क्रमरीति---
715क्रमश:क्रिया विशेषणक्रिया विशेषणक्रिया विशेषण--नियत क्रम के अनुसार, सिलसिलेवार;एक-एक करके, बारी-बारी से (रेस्पेक्टिवली);थोड़ा-थोड़ा करके।--लड़ीवार, क्रमवारलड़ीवार, क्रमवारलड़ीवार, क्रमवार--तरतीबवारबित्तर्तीबबतद्रीज--सिलसिलु॑वारसिलसिलु॑वारवारु॑वारु॑--सिलसिलेवारुवारे सांदर्जे बदर्जे--क्रमश:क्रमवारथोडे थोडे करून--क्रमश:क्रमथीथोडा थोडा करीने--क्रमश: क्रमानुसारेएक-एक करे, पालाक्रमेएकट-एकट करे, अल्प अल्प करे--क्रमश:, क्रमागतक्रमे, अनुक्रमेअलप अलपकै--क्रमश:, क्रमानुसारजणक्रमेअळ्प अळ्प करि--क्रमंगाक्रममुगाकोद्दिकोद्दिगा--बरिशै किरममागमुरैप्पडिपोगप्पोग--क्रममायि, मुर॒य्क्कुओरोन्नायि, क्रमत्तिल्अल्पाल्पमायि, क्रमेण--क्रमवागि क्रमश;ऒन्दॊन्दागिस्वल्प स्वल्पवागि--
716क्रयपुंलिंग----मोल लेने या खरीदने की क्रिया या भाव, खरीद।----खरीद----ख़रीदारी (ख़रीद)----मेल्यह्यॊन, खरीदारी----खरीद----खरेदी----क्रय, खरीदी----क्रय, केना, खरिद----क्रय, किना----क्रय, खरीद, किठिबा----क्रयमु, कोनुट----किरयम् विलैक्कु वांगुदल्----क्रयं, वाङ्ङल्----कॊळ्ळुवुदु, क्रय----
717क्रांतिस्त्रीलिंग----एक दशा से दूसरी दशा में भारी परिवर्त्तन।----करांती----इन्क़िलाब----इंकलाब----क्रांति, इन्कलाबु----क्रान्ति----क्रांति----क्रान्ति----क्रान्ति, बिप्लव----क्रान्ति, दशान्तरप्राप्ति----क्रांति----विप्लवं----विप्ळव़ं----क्रान्ति----
718क्रांतिकारीपुंलिंग, विशेषण----क्रांति का प्रयत्न करने वाला।----कारांतीकारी----इन्क़िलाबी----इंकला॑बी----क्रांतिकारी, इन्कलाबी----क्रांतिकारी----क्रांतिकारी----क्रान्तिकारी----बिप्लबी----क्रान्तिकारी----क्रान्तिकारुडु----पुरट्चिकरमान----विप्ळवकारि----क्रान्तिकार----
719क्रियास्त्रीलिंगस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग--कोई कार्य चलते या होते रहने की अवस्था या भाव;कोई काम करने का ढंग या विधि;व्याकरण में वे शब्द जो किसी कार्य, घटना आदि के होने या किये जाने के वाचक होते हैं।--किरिआकिरिआकिरिआ--अ़मल, फेअ़ल----का॑मअमल---कमुतरीको, ढंगु, विधीग्रामर में 'फइलु'--क्रियापद्धत, रीतक्रिया पद--क्रिया, कार्यतरीकाक्रियापद--क्रियाविधि, प्रक्रियाक्रिया (व्याकरणे)--क्रियाकार्यविधिव्याकरणत (क्रियापद)--क्रिया, कार्याबस्थाकाम करिबा ढंगव्याकरणरे कार्यसंपादन वाचक शब्द (क्रियापद)--क्रियपद्धतिक्रिय--सॆयल्सॆयल् मुरैविनैच्चॊल्--क्रियक्रिय(व्याकरणत्तिले) क्रियापदं--क्रियॆरीतिक्रियापद--
720क्रीड़ास्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---आमोद-प्रमोद;खेलकूद।---खेड----खेल----अ॑सुल-गिंदुनगिंदुन---मौज-मस्तीरांदि-रूंदि---क्रीडा मौजमजाक्रीडा खेळ---क्रीड़ा, खेल----क्रीडा, आमोद-प्रमोदक्रीड़ा, खेलधूला---क्रीड़ा, आमोद-प्रमोदखेला धुला---क्रीड़ा, आमोद-प्रमोदपेळिबा---विनोदमुआट, क्रीड---केळिक्कैविळैयाट्टु---क्रीडकळि---आमोद-प्रमोदआट, क्रीडॆ---
721क्रूरविशेषण----निर्मम तथा हिंसक कार्य करने वाला, निर्दय।----जालम----सफ़्फ़ाक, बेरहम (ज़ालिम)----बेइंसाफ----कर्ड़ो, कठोरु, निर्दयी----क्रूर कठोर, निर्दयी----क्रूर----क्रूर, निर्दय----क्रूर, निर्दय----क्रूर, निर्दय, निष्ठुर----क्रूर मयिन----कॊडूरमान----क्रूरन्, निर्दयन्----निर्दय, क्रूर----
722क्रोधपुंलिंग----किसी के अनुचित या अन्यायपूर्ण काम के फलस्वरूप मन में उत्पन्न होने वाला उग्र तथा तीक्ष्ण मनोविकार, कोप, गुस्सा।----करोध----गुस्सा इ़ताब----गुस्स्----क्रोधु, कावड़ि, गुसो----क्रोध, राग----क्रोध----क्रोध, राग, गोसा----क्रोध, खं----क्रोध----क्रोधमु, कोपमु----कोबम्----क्रोधं----सिट्टु, कोप----
723क्लेशपुंलिंग----कष्ट पूर्ण मानसिक स्थिति, मनोव्यथा।----कलेस----रंज, कोफ़त----वॅदा॑सी, दॅख----क्लेशु, कलह----क्लेश----क्लेश, पीड़ा, दु:ख----कलेश, मनोव्यथा----क्लेश, मानसिक दु:ख----मनोव्यथा, क्लेश----क्लेशमु----आयासम्----क्ळेशं----व्यथॆ----
724क्षणपुंलिंग----काल का एक बहुत छोटा परिमाण।----खिण, छिण----लम्हा----च़्युह----खिन, पलु----क्षण----क्षण----क्षण॒ (खन)----क्षण, मूहूर्त्त----क्षण, (ख्यण)----क्षणमु----कणम नोड़ि----क्षणं----क्षण----
725क्षतिस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---आघात या चोट लगने से होने वाला घाव;हानि, घाटा।---सट्टघाट---ज़ख्मज़रर, नुक़्सान---नॅकसान----घाउघाटो, नुकसानु---क्षति, जखमहानि, तोटा, क्षति---क्षति, क्षत, धानुकसान, हानि, घाटो---क्ष॒त (क्ख)क्ष॒ति (ख) लोकसान---क्षत, घाक्षति, हानि---क्षति, आघातहानि, लोकसान---क्षति, देब्ब, गायमुनष्टमु---अळिवुनष्टम्---मुरिवुनष्टं, हानि---गायहानि, नष्ट---
726क्षतिपूर्तिस्त्रीलिंग----हानि या घाटे का पूरा होना।----मुआवजा, हरजाना----तलाफ़ी----नॅकसान पूरु॑ करून----भरिपूराई----क्षति पूर्ति----क्षतिपूर्ति----क्ष॒तिपूर्ति (ख)----क्षतिपूरण----क्षतिपूरण----नष्टपरिहारमु इच्चु----नष्ट ईडु----नष्टपरिहांर----ईडु प्रतिफल----
727क्षत्रियपुंलिंगपुंलिंग---हिन्दुओं के चार वर्णों में से दूसरा वर्ण;उक्त वर्ण का पुरुष।---खत्री----छत्री (खत्री)----ख्यतु॑र्य----खत्री, खित्री----क्षत्रिय वर्णक्षत्रिय पुरुष---क्षत्रिय (वर्ण)क्षत्रिय (पुरुष)---क्ष॒त्रिय (ख)क्ष॒त्रिय (ख)---क्षत्रियक्षत्रिय लोक---ख्यत्रिय (ख्यत्रिय)----क्षत्रियक्षत्रियुडु---क्षत्रिय कुळम्क्षत्तिरियन्---क्षत्रियजातिक्षत्रियन्---क्षत्रियक्षत्रिय---
728क्षमतास्त्रीलिंगस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग--सामर्थ्य;कोई काम करने का गुण या पात्रता;ग्रहण या धारण करने की पात्रता (कैपेसिटी)।--समरत्त्था----ताक़त, मक़्दूरअह्लियत, इस्त़ेदादगुंजाइश, वुसअ़त--ह्यमथ----ताकतलियाकत, योग्यताजग॒ह, गुंजाइश (रखण या धारण करण जी)--सामर्थ्य, क्षमतापात्रता, योग्यतासामर्थ्य, शक्ति--शक्तियोग्यतापात्रता--क्ष॒मता (ख) साममर्थ्य (र्थ)क्ष॒मता (ख)क्ष॒मता (ख)--क्षमता, सामर्थ्यसामर्थ्य, योग्यतासामर्थ्य, शक्ति--क्षमता (ख्यमता)----सामर्थ्यमुसामर्थ्यमुसामर्थ्यमु, शक्ति--तिरमैसामर्त्तियम्सामर्त्तियम्--कऴिवुप्राप्तिसामर्थ्यं--सामर्थ्ययोग्यतॆ, अर्हतॆधारणशक्ति--
729क्षमास्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---मन की वह भावना या वृत्ति जिससे मनुष्य दूसरे के द्वारा पहुँचाया हुआ कष्ट चुपचाप सहन कर लेता है और कष्ट पहुँचाने वाले के प्रति मन में कोई विकार नहीं आने देता;किसी दोषी या अपराधी को बिना किसी प्रतिकार के छोड़ देने का भाव, माफ़ी।---खिमा----मआ़फ़ी----बरव़शुन----खिम्या, माफी----क्षमामाफी---क्षमा, माफीमाफी---क्ष॒मा (ख)माफ, क्ष॒मा (ख)---क्षमाक्षमा---क्षमा (ख्यमा)----ओर्पुक्षमापण---मन्निक्कुम् इयल्बुमन्निप्पु---क्षममाप्पु---क्षमॆक्षमॆ---
730क्षयपुंलिंगपुंलिंगपुंलिंग--क्रमश: तथा प्रकृतिश: होने वाला ह्रास;नाश;यक्ष्मा नामक रोग।--खैखैखै--ज़वालख़ातिमादिक़ (तपेदिक़)--नाश-सिलु॑--खइनासु, खइसिल्ह, तपेदिक--क्षयनाशयक्ष्मा नामक रोग--क्षयनाशक्षय (रोग)--क्ष॒य, (ख्) (ख)क्ष॒य (ख) नाशक्ष॒य रोग, यक्ष्मा (ख)--क्षयनाश, ध्वंसयक्ष्मा, क्षयरोग--क्षय (ख्यय)----क्षयमुनाशनमुक्षय--तेय्दलअळिवुकाश नोय्--क्षयंनाशंक्षय रोगं--कोरगुनाशक्षय--
731क्षितिजपुंलिंग----पृथ्वी तल के चारों ओर की वह कल्पित रेखा या स्थान जहाँ पर पृथ्वी और आकाश एक दूसरे से मिलते हुए जान पड़ते हैं (होराइजन)।----दुमेल, दिसहद्द----उफुक़----उफ़क----उफ़कु----क्षितिज----क्षितिज----क्षितिज (ख)----दिग्बलय, दिगन्त----चक्रबाळ, दिगन्त----दिगन्तरेख दिग्वलयमु----आडिवानम्----चक्रवाळं----क्षितिज----
732क्षुधास्त्रीलिंग----भोजन करने की इच्छा, भूख।----भुख, खुधिआ----भूक----बॅछि----बुख----क्षुधा, भूक----क्षुधा, भूख----क्षधा, खिदे----क्षुधा, भोक----सुधा (च्युधा) भोक----क्षुत्तु, आकलि----पसि----विशप्पु----हसिवु----
733क्षेत्रपुंलिंगपुंलिंग---जोता-बोया जाने वाला भूमि-खंड़, खेत;प्राकृतिक, भौगोलिक, राजनीतीक आदि दृष्टियों से निर्दिष्ट भूभाग।---खेतर----खेतख़ित्ता, इ़लाक़ा---खाहअलाकु॑---खेतु, ब॒नीखेत्रु---शेतीक्षेत्र---क्षेत्र, जमीन, खेतरस्थान, जगा---क्षेत्र, खेत, जमिक्षेत्र---खेत, खेतिर पधारक्षेत्र, भूभाग---क्षेत्र (क्खेत्र)----पोलमुक्षेत्रमु---वयळ्निलंप्पगुदि---वयल्प्रदेशं---हॊलप्रदेश---
734क्षेत्रफलपुंलिंग----किसी क्षेत्र की लम्बाई और चौड़ाई को गुणन करने से निकलने वाला वर्गात्मक परिमाण, रकबा (एरिया।)----खेतरफल----रक़्बा----बाडव, रॅकबु----एराज़ी----क्षेत्रफळं----क्षेत्रफळ (ल)----क्षे॒त्र फल (खे)----क्षेत्रफल, कालि परिमाण----क्षेत्रफल (क्खेत्रफळ)----विस्तीर्णमु, वैशाल्यमु----परप्पु, विस्तीरणम्----क्षेत्रफलं----क्षेत्रफल----
735खंडपुंलिंगपुंलिंग---किसी टूटी या फूटी हुई वस्तु का कोई अंश, टुकड़ा;किसी संपूर्ण वस्तु का कोई विशिष्ट भाग या विभाग।---खंडखंड---टुकड़ाजुज़्व (जुज़)---हिसु॑हिसु॑---हिसो, भाङो, खंडु----खंड, तुकड़ावस्तूचा विशिष्ट भाग किंवा विभाग---खंड, ककडोभाग---खंड, अंश, टुकराविभाग---खण्ड, टुकुरा, डोखरभाग, विभाग, खण्ड---खंड----खंडमु, मुक्कभागमु---बागम्तुण्डु---खंडं, कषणंअंशं, भागं---तुण्डुखंड---
736खंडहरपुंलिंग----वह स्थान जिस पर बनी हुई इमारत या भवन खंड-खंड होकर गिरा पड़ा हो, गिरे या टूटे हुए मकान का बचा हुआ अंश, भग्नावशेष।----खंडर----खंडर----खंडुरात, आसार----खंडहरु----भग्नावशेष----खंडेर----भग्नावशेष----भग्नावशेष----भग्नाबशेष----शिथिलमु शिथिलावशिष्टुमु, भग्नावशेषमु----इडिपाडु----भग्नावशेषं----हालु विद्द मनॆ भग्नावशेष----
737खंभापुंलिंग----ईंट, पत्थर, लकड़ी, लोहे आदि की बनी हुई गोल या चौकोर रचना जिस पर छत, या कोई भारी चीज टिकी रहती है।----खंबा----खम्बा (सुतून)----च़्यून----थंभु, थंभो----स्तंभ, खांब----थांमलो----स्तम्भ, थाम----स्तम्भ----खम्ब, खुंट----स्तंभमु----तूण, कबम्----तूणु----कंब----
738खगोलपुंलिंग----आकाश मंडल।----खगोल----कुरए आसमान (कुरए फ़लक)----आकाशि मंडुल----आकासु मंडलु----आकाश मंडळ खगोल----खगोळ----खगोल----आकाश मण्डल----आकाश मंडळ, खगोळ----आकाश मंडलमु----विण् वॆळि----आकाश मंडलं----आकाश मंडल, खगोल----
739खटकनाअकारात्मक क्रियाअकारात्मक क्रिया---दो वस्तुओं के परस्पर टकराने से शब्द उत्पन्न होना;किसी बात का मन में भली न जान पड़ने के कारण कुछ कष्टदायक जान पड़ना, खलना।---खटकणाखटकणा---खटकना----अंदु॑री दज़ुन, खटकुन----ठड़िकणुचुभणु, खटिकणु---वाजणेखटकणे, सलणे---खडखड अवाज थवोखूंचवुं---खट्खट् शंब्द हओयाखटका हओया---ठेळा खाइ शब्द हमनत बाज, बा जाग---खट् खट् शब्द हेबा, खटकाखटका लागिबा---कटकटमनुटनच्चकपोवुट---मोदुम् शत्तम्मनदै उरु॒त्त---तट्टुकमनस्सिल् कोळ्ळुक---सद्दु आगुवुदुकॆट्टदॆनिसुवुदु---
740खटाईस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---खट्टे होने की अवस्था, गुण या भाव;कोई खट्टी वस्तु।---खटिआई----खटाई----चॅक्यर----खटाई (खटो सवादु), खटिखटाणि---आंबटपणाआंबट वस्तू---खटाई, खाटापणुंखाटी वस्तु---टक, अम्लटक जिनिस---टेङा गुणटेङा वस्तु---खटा----पुलुपुपुल्लनिवस्तुवु---पुळिप्पुपुळिप्पान वस्तु---पुळिपुळिक्कुन्न वस्तु---हुळिहुळि वस्तु---
741खट्टाविशेषण----जिसमें खटाई हो, आम, इमली आदि के से स्वाद वाला।----खट्टा----खट्टा----चॊक----खटो----आंबट----खाटुं----टक, खाट्टा----देङा, देङचीपा----खटा----पुल्लनि----पुळिप्पान----पुळिच्च, पुळिरसमुळ्ळ----हुळियाद----
742खड़ाविशेषण----जो धरातल से सीधा ऊपर की ओर उठा हुआ हो।----खड़ा----खड़ा, क़ाइम----खडा, वॅदनि----सिधो, उभो, खडो॒----उभा----ऊभुं----खाड़ा, दण्डायमान----थिय----ठिआ----निलबडिन----निन्रूकोण्डिरु॒क्किर॒----निल्क्कुन्न, कुत्तनेयुळ्ळ----निंतिरुव----
743खड़ाऊँस्त्रीलिंग----काठ की बनी हुई एक प्रकार की पादुका जिसमें आगे की ओर पैर का अंगूठा और उंगली फंसाने के खूंटी लगी रहती है।----खड़ां, खड़ावां----खड़ाऊं----ख्राव----चाखिड़ी, खड़ाऊ----खडावा----पावड़ी, चाखडी----खड़म----खरम, काठर पादुका----कठउ, खड़म----पावुकोळळु----मिदियडि, पादुकै----मितियडि----हावुगॆ----
744खतरनाकविशेषण----जो खतरे से भरा हो या खतरे का कारण बन सकता हो, जोखिम-भरा।----खतरनाक----ख़तरनाक----खतरनाक----खतरनाकु----भयंकर, जोखिमीचा----खतरनाक, जोखम भरेलुं----विपज्जनक----भयावह, बिपदजनक----विद्धपूर्ण----प्रमादकरमयिन----अबायकरमान----अपकटकरं----अपायकरवाद----
745खतरापुंलिंग----अनिष्ट, संकट आदि की आशंका या संभावना से युक्त स्थिति।----खतरा----ख़तरा----खतरु॑----खतिरो----धोका----भय, जोखम----विपद----भय, बिपद----बिपद----प्रमादमु----अबायम्----अपकटं----अपाय----
746खनिजविशेषणपुंलिंग---खान से खोद कर निकाला हुआ।खनिज पदार्थ।---खणिज----म़ादिनीम़ादिनीयात---मॊदनी (कानि मंज कॊडमुत)----खाणि मां खोटियलुमैदनी पदार्थु---खनिजखनिज पदार्थ---खनिजखजिन पदार्थ---खनिजखनिज---खनिजखनिज पदार्थ---खणिज----खनिजमुखनिज पदार्थमु---सुरंगत्तिनिन्रू ऎडुन्तकनिप्पॊरुळ्---खनियिल् निम्नु ऍटुतखनिज पदार्थ---खनिजगणि पदार्थ---
747खपतस्त्रीलिंग----खपने या खपाने की क्रिया या भाव, माल की कटती या बिक्री।----खपत----खपत----खरचि----खपति----खपणे----खपत मालनो उपाड----काटति----प्रयोजनीय सामग़्रीर खरच बा उपभोग----काटति----वाडुक----सेलवादल्----चिलवु----खर्चु, वॆच्च, व्यय----
748खराविशेषणविशेषण---जिसमें किसी प्रकार की खोट या मैल न हो, विशुद्ध;लेन-देन व्यवहार आदि में ईमानदार, सच्चा और शुद्ध हृदय वाला।---खराखरा---खराखरा---शॅद----खरो, निंजु, शुधि.डे॒-वठुजे वंहिवार में खरो, सचो, ईमान्दारु---विशुद्ध खराचोख---खरूंखरो---खाँटि, विशुद्धखाँटि, साच्चा---खाँटि, विशुद्ध----बिशुद्धसच्चा---शुद्धमयिन कल्तीलेनिनम्मकस्थुङु---सुद्धमान, असल् कलप्पड मिल्लादनम्बिक्कैयान---शुद्धमाय, तनिविश्वस्तन्, नेरुकारन्---अप्पटसाचा, प्रामाणिक---
749खरादपुंलिंग----एक प्रकार का यंत्र जो लकड़ी अथवा धातु की बनी हुई वस्तुओं को छीलकर उन्हें सुडौल तथा चिकना बनाता है या विशेष आकार देता है।----खराद----ख़र्राद (ख़राद)----खह्रन----जंडी, लेथि----रंधा----खराद, संघाडो----कुँद----कुन्द----रंदा----तरिमन पट्टुयन्त्रमुचित्रिक----कडैसल् यन्दिरम्----कटच्चिल् चाण----कडॆतद यंत्र कडॆचलु----
750खरीदस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---मोल लेने की क्रिया या भाव, क्रय;वह जो खरीदा जाय।---खरीदखरीद---ख़रीदारीख़रीद---ह्यॊन----खरीद----खरेदीमाल---खरीदमाल---खरीद, क्रयखरिद, केना---खरिद, क्रयकिना बस्तु---किठिबा, (किषिबा) खरिदक्रीत---क्रयमु, कोनुटकोनु गोलु, कोन्न सामानु---विलैक्कु वांगुदल्वांगिय पॊरुळ्---विलक्कु वाङ्ङल्क्रयवस्तु---खरीदि, क्रयपण्य---
751खरीदनासकारात्मक क्रिया----मोल लेना, क्रय करना।----खरीदणा----ख़रीदना----ह्यॊन----खरीदणु, खरीद करणु----विकत घेणे----खरीदवुं----खरिद, करा केणा----किन, खरिद कर----किणिबा----कोनुट----विलैक्कु बांग----विलक्कु वाङ्ङुक----कॊळ्ळुवुदु----
752खरोंचस्त्रीलिंग----नख अथवा अन्य किसी नुकीली वस्तु से छिलने के कारण पड़ा हुआ दाग या चिह्न, खराश।----झरीट----खरोंच, ख़राश----जु॑ल----रहिंड, रहिड़----बोचकारा ओरखडा----उझरडो----आँचडेर दाग----आँचोर----रांचुड़िबा रांपुड़ा दाग (रांचुड़ा-दाग)----गंटु----सिराय्प्पु----पोर॒ल्----गीटु, गीचु----
753खर्च (खरच)पुंलिंगपुंलिंग---धन, वस्तु, शक्ति आदि का होने वाला उपभोग, व्यय;वह धन-राशि जो किसी वस्तु को खरीदने या बनाने के लिए अथवा आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए व्यय की जाती है।---खरच----ख़र्च----खरु॑च----खर्चु----खर्चखर्च---खर्चखर्च---खरच, व्ययखरचा---खरच, व्ययखरच करा धन---खर्च----खर्चुविनियोगमु, खर्चु---सॆलवुउर्पत्तिच्चॆलवु---चिलवुचिलवु---खर्चुवॆच्च---
754खलनाअवयय----अनुचित, अप्रिय या कष्टदायक प्रतीत होना, अखरना, खटकना।----खटकणा----खलना----खरुन----खटिकणु, खुटिकणु----खटकणे, बोचणें सलणे----खटकवुं----अनुचित लागा, खाराप लागा----अप्रीतिकार बा कष्टदायक ह----अप्रिय लागिबा----चेडुगा तोचुट----अरुवरुप्पु उण्डाग, पुण् पड----विषयमायि तोंन्नुक----नोयुवुदु कॆट्टद्दॆनिसुवुदु----
755खलियानपुंलिंगपुंलिंग---वह समतल भूमि या मैदान जहाँ फसल काट कर रखी, मांडी तथा बरसाई जाती है;अव्यवस्थित रूप से लगाया हुआ ढेर।---खलवाड़ा, पिड़----खलियान----खाहखाह---देरोढेरु, ढिगु---खळेढीग, रास---खळुंखळुं---खामारस्तूप करा---खोला शस्य रखा ठाइदॆम, (दॅम) थूप---खळागदा, स्तूप---कळ्ळमु, खलमुकुप्प---कळत्तु मेडुओऴुंगाग वैक्कप्पाडाद, कुवियल्---कळंक्रममिल्लातॆ कूट्टिय कूंपारं---कणगुप्पॆ, राशि---
756खलीस्त्रीलिंग----तिलहन का वह अंश जो उसे पेर-कर तेल निकालने के बाद बच रहता है जिसे गाय-भैसों को भूसे में मिलाकर खिलाया जाता है।----खल----खली----ख॑ज----खडु.----पेंड----खोळ----खोल, खइल----खलिहै----पीड़िआ----गानुगपिंडि----पिण्णाक्कु----पिण्णाक्कु----हिंडि----
757खस्ताविशेषणविशेषण---भुरभुरा, बहुत थोड़ी दाब से टूट जाने वाला, मुलायम तथा कुरकुरा;टूटा-फूटा, भग्न, दुर्दशा ग्रस्त।---खसता----ख़स्ताखस्ताहाल---खस्तु॑खस्त॑---भुर्किणोसकीमु, भग॒लु-भुर्यलु---खुसखुशीततुटलेले-फुटलेले---बरडतुटेलु, भांगेलुं--खास्ता, मुचमुचेखास्ता---मुर मुरीया, चनका, कोमलफटा-फुटा, भगा दुर्दशाग्रस्त---खास्ता, बहुत नरमभग्न---मेतकजीर्णिचिन---मुरु॒गलान, सुलबमानपाडियागक्कूडिय, उडैन्द---पारिञ्ञ, अमर्त्तियाल् पॊट्टुन्नपॊट्टिय, मोश स्थिति यिल् उळ्ळ---गरिगरि, ऒडॆदु चूरागुवजीर्ण, भग्न---
758खांसनाअकारात्मक क्रिया----गले में रुका हुआ कफ़ या और कोई अटकी हुई चीज निकालने या केवल शब्द करने के लिए झटके से वायु कंठ के बाहर निकालना, खांसी आने या होने का-सा शब्द करना।----स्वंघणा----खांसना----चास करुन्टा----खंघणु----खोकणे----खांसवुं----कासा----काह----खासिबा, काशिबा----दग्गुट----इरुम----चुमय्क्कुक, कुरय्क्कुक----कॆम्युवुदु----
759खाईस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---दुर्ग के चारो ओर खोदी हुई नहर;युद्ध क्षेत्र में छिप कर गोली चलाने के लिए खोदे जाने वाले गड्ढे (ट्रेंच)।---खाई----खाई, ख़ंदक़----खयखंदुख---खाही----खंदकखंदक---खाईसंरक्षणार्थे खोदेलो खाडो---खाईपरिखा---खाईखाल---खाई----कंदकमुकंदकमु---किडंगुकिडंगु---ट्रेंचट्रेंच, कुऴि---हळ्ळहळ्ळ---
760खाकीविशेषण----खाक अर्थात मिट्टी के रंग का, भूरा।----खाकी----ख़ाकी----खा॑क्य----खाकी (रंग जो)----भुरकट, खाकी----खाखी----खाकी----मटीया बा खाकी रङर----माटिआ----खाकी रंगु, बूडिद रंगु----पळुप्पुनिर॒म् मण्निर॒मान----काक्कि निर॒म्----खाकि----
761खाटस्त्रीलिंग----चारपाई।----मंजी----खाट (चारपाई)----चारपाय----खट----बाज खाट----खाटलो----खाट, खाटिया----खाट----खट----मंच़मु----कट्टिल्----कट्टिल्----हॊरसु----
762खादस्त्रीलिंग----सड़ाया हुआ गोबर, पत्ते आदि जो खेत को उपजाऊ बनाने के लिए उनमें डाले जाते हैं (मैन्योर)।----खाद, रेह----खाद----खाद, पाह----भाणु----खत----खातर----सार----पचन सार----खत----ऍरुवु----ऎरु----वळं----गॊब्बर----
763खादीस्त्रीलिंग----हाथ से कते सूत का हाथ करघे पर बना कपड़ा, खद्दर।----खद्दर, खादी----खादी----खदु॑र----खाधी----खादी----खादी----खादि, खद्दर----खादी, खद्दर----खदी----खादी, खद्दरु----कदर् तुणि----खादि, खदर॒----खादि, खद्दर्----
764खाद्यविशेषणपुंलिंगपुंलिंग--जो खाए जाने के लिए हो अथवा खाये जाने के योग्य हो, भक्ष्य, भोज्य।खाए जाने वाले पदार्थ;भोजन।--खाण-जोगखाध, खाध-खुराकखाध, खाध-खूराक--ख़ुर्दनीख़ूराकखाना--खॅरदनीएवम्ख्यन--खाइण जोगो॒खाजु, खाधो---खाद्यखाद्य पदार्थभोजन--खाद्यखाद्य पदार्थभोजन--खाद्य----खाद्य, भक्ष्य, भोज्यखाद्य वस्तुभोजन--खाद्य----तिन दगिनतिनुबंडारमुलुआहारमु--उण्णत्तहुन्दउणवुप्पॊरुळ्साप्पाडु--खाद्यंखाद्य वस्तुभक्षणं--भक्ष्यखाद्यऊट, खाद्य पदार्थ--
765खाद्यान्नपुंलिंग----वे अन्न जो खाने के काम आते हों।----अन्न, अनाज----ग़ल्ला----अनाज----अनु, अनाजु----खाद्यान्न----खाद्यान्न, अनाज----खाद्यान्त----खाद्य शस्य----खाद्यान्न----ख़ाद्यान्नमुलु----उणवु दानियंगळ्----भक्ष्यधान्यं----खाद्य धान्य गळु----
766खानस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---वह स्थान जहां से धातु, पत्थर आदि खोद कर निकाले जाते हैं;वह स्थान जहां कोई वस्तु अधिकता से होती या पाई जाती है।---खानखान---कान----कानकान---खाणि----खाणखाण---खाणखाण---खनिखाण---खनि, आकरआकर---खणि----गनिगनि---कनि, सुरंगम्शॆळिप्पाह किडैक्कू इडम्---खनिशेरवरं---गणिभंडार---
767खानासकारात्मक क्रियापुंलिंगपुंलिंग--पेट भरने के लिए मुंह में कोई खाद्य वस्तु रखकर उसे चबाना और निगल जाना, भोजन करना।भोजन;दीवार, आलमारी, मेज आदि में बना हुआ वह अंश या विभाग जिसमें वस्तुएं आदि रखी जाती हैं।--खाणाखाणाखाना--खानाखानाख़ाना--ख्यॊनख्यन---खाइणुखाधोखानो--खाणें, भोजन करणेंभोजनकप्पे--खावुंभोजनखानुं--खाओयाभोजन, आहारदेयालेर ताक--खा, भोजन करभोजन, खानावस्तु रखा ठाइ--खाइबा, भोजन करिबाभोजनथाक--तिनुटतिंडि, आहारमुसोरुगु--साप्पिडसाप्पाडु उणवुअलमारी, शुवर् गळिल् अरैगळ्--तिन्नुक, उण्णुकभक्षणंअर॒, कल्ळि--ऊट माडुवुदुऊटगूडु--
768खाराविशेषण----जिसमें क्षार का अंश या गुण हो, जो स्वाद में नमकीन हो।----खारा----खारा----नून॑दार----खारो (सवाद में)----खारट----खारूं----लवणा॒क्त (न)----खार, खार लगा खारुबा, लुणीया----लुणिआ (लुणिआ)----उप्पनि----उप्पुक्करिक्किर----क्षारमुळ्ळ, उप्पुरसमुळ्ळ----उप्पु----
769खालस्त्रीलिंग----पशुओं आदि के शरीर पर से खींच कर उतारी हुई त्वचा जिस पर बाल या रोएं होते है, चमड़ी।----खल्ल----खाल----मु॑सलु॑----खल----चामडी----खाल, चामड़ी----चामड़ा, छाल, खाल----छाल, चामरा----त्वचा, चम----तोलु, चर्ममु----तोल्----तोलु----चर्म, तॊगलु----
770खालीविशेषणविशेषणविशेषण--जिसके अंदर कोई चीज न हो, रीता;रोजगार-रहित;जो उपयोग में न आ रहा हो।--खालीखालीखाली--ख़ालीबेकार, बेरोज़गारग़ैरमुस्ताम़ल--छ़ॊरबॆकारब्यूठ--खालीवांदोखाली, बेकारु--रिकामा, रिता, रिक्तबेकारनिरूपयोगी--खालीबेकारनिरूपयोगी--खालि, रिक्तखाली, बेकार---खाली, शून्यनिबनुवाकोनो कामत नहा अकामिला--खालि, रिक्तरोजगार रहित (बेकार)(अनुपयोगी)--खालीखाली, उद्योगमुलेनिखाली--कालियानवेलै इल्लादअबयोगमट॒ट॒--कालियाय, ऒऴिञ्ञतोळिल् इल्लात्तउपयोगत्तिल् इल्लात्त--खालिनिरुद्योगिउपयोगक्के बारद--
771खासविशेषणविशेषण---विशेष, विशिष्ट;किसी के पक्ष में व्यक्तिगत रूप से होने वाला, निज का।---खासखास---ख़ासमख़सूस---खास----खासि----खासखाजगी---खासखाजगी---खाश, विशिष्टखास, निजेर---खाच, आचतनिजर, स्वयं---खासा, बिशिष्टनिजर---मुख्यमयिनव्यक्तिगतमयिन---विशेषमानतनिप्पट्ट---प्रत्येकंस्वन्तं, तन्टेताय---विशेषबेकाद, स्वंत---
772खिड़कीस्त्रीलिंग----घर, गाड़ी, जहाज आदि की दीवारों में बना हुआ वह बड़ा झरोखा जिसमें से धूप और रोशनी अंदर जाती है और जिसमें से झांक कर बाहर का दृश्य देखा जाता है (विंडो)।----बारी, खिड़की----खिड़की----दा॑र----दरी, गिड़िखी----खिडकी----बारी----जानाला, खिड़िकि----खिरिकी----झटका----किटिकी----जन्नल्----जन्नल्----किटकि----
773खिन्नविशेषणविशेषण---उदास, विकल;अप्रसन्न, अंसतुष्ट।---उदासउदास---अफ़्सुर्दारंजीदा---वॅदास----उदासनाराजु, बेज़ारु---खिन्नचिंतित, असंतुष्ट---खिन्नचिंतित, असंतुष्ट---खिन्न, उदास, विकल----बियाकुल, उदासबिषण्ण, मनमरा---खिन्न-विकळ उदासअप्रसन्न---खिन्नुडगुअसंतृप्तुडगु---वरुत्तमडैन्दमनम् वेदुंबिय---दु:खितन, खिन्नन्अप्रसन्नन्---उदासअप्रसन्न---
774खिलखिलानाअकारात्मक क्रिया----बहुत प्रसन्न होने पर जोर से हंसना----खिड़खिड़ हस्सणा----खिलखिलाना----स्यठाह खॊख सप़दुन----डा॒ढ्यां खिलणु टहिक डि॒यणु----मोठ्याने हंसणे----खडखड हसवुं----खिलखिल, करिया हासा----खिलखिला, खिलखिलाइ हाँहा----खिल् खिल हसिबा----पकपकनव्वुट----उरक्कच्चिरिक्क----पॊट्टिच्चिरिक्कुक----जोरागि नगुवुदु----
775खिलनाअकारात्मक क्रियाअकारात्मक क्रियाअकारात्मक क्रिया--कली या फूल का पंखुडियां खोलना;कोई सुखद कार्य या बात होने पर आनंदित या प्रसन्न होना;सुन्दर लगना, फबना।--खिड़णाखिड़णाखिड़ना--खिलना----खॊश सपदुनखॊश सपदुनखॊश सपदुन--टिड़णु, खिड़णु-ठाहूको लग॒णु--उमलणेप्रसन्न होणेंसुन्दर दिसणे, शोभणे--खीलवुंप्रसन्न थवुंसुंदर देखावुं, शोभवु--फोटा, प्रस्फुटित हओयाप्रफुल्ल हओआभालो लाग--मेल, मेलरबा, खोल, बिकसितहआनन्द याभाल लाग--फुटिबा----विकसिंचुटविकसिंचुटविकसिंचुट--मलरमनम् मगिळ्अऴगाह तोन्र॒--विटरुकआनंदिक्कुकसुन्दरमायि तोन्नुक--अरळुवुदुसंतोषपडुवुदुशोभिसुवुदु--
776खिलाड़ीपुंलिंग----वह जो खेल खेलता हो।----खिडारी----खिलाड़ी----खिला॑ड्य----रांदीगरु, खिलाड़ी----खेळाडू----खेलाड़ी----खेलोयाड़, खेलुडें----खेलुवै----खेष्ठाळी----आटगाडु----विळैयाडुबवन्----कळिक्कारन्----आटगार----
777खिलानासकारात्मक क्रियासकारात्मक क्रियासकारात्मक क्रिया--किसी को कोई चीज खाने में प्रवृत्त करना, भोजन कराना;खेल खिलाना;दुलारना।--खुआउणाखिडाउणाखिडाउणा--खिलाना----ख्यावुनगिंद॑नावुन---खाराइणुरांदि कराइणु, खेडा॒इणुकोडा॒इणु--जेवायला धालणेखेळ खेळविणेंलाड करणें--जमावुंरमाडकुंलाड करवां--खाओयानोखेलानोआदर करा--खुवाओमलामरम कर--खुआइबख्रळेइबागेलेइब--तिनिपिंचुटआडिंचुटमुरिपिंचुट--ऊट्ट, उणवु कॊडुक्कविळै॒याडच्चॆय्यसॆल्लम कोंज--ऊणु कऴिप्पिक्कुक, तीट॒टुककळिप्प्किकुककॊञ्ञिक्कुक--ऊट, मडिसुवुदु, तिन्निसुवुदुआडिसुवुदुमुद्दाडुवुदु--
778खिलौनापुंलिंगपुंलिंग---बच्चों के खेलने के लिए बनाई हुई धातु, मिट्टी आदि की आकृति, चीज या सामग्री;किसी के मन बहलाने का साधन या सामग्री।---खिडौणां----खिलौना----तमाशु॑----रांदीको, खिलौनो----खेळणेंखेळणे-मन वळविण्याचें साधन---रमकडुंमन बहॆलाववानुं साधन के सामग्री---खेलना----खेल्ना, खेलार सामग्रीपुतला बा तेने मन---खेळनामन भुलोवा वस्तु---आटवस्तुवु, बोम्मआटवस्तुवु---विळैयाट्टु सामान्मागिऴ्च्चितरुम् वस्तु---कळिप्पाट्टंविनोदसामाग्रि---आटद सामानुआटद सामानु---
779खिसकनाअकारात्मक क्रियाअकारात्मक क्रियाअकारात्मक क्रिया--बैठे-बैठे किसी ओर बढ़ना या हटना, सरकना;किसी वस्तु का अपने स्थान से कुछ हट जाना;चुपके से उठ कर चल देना।--खिसकणाखिसकणाखिसकणा----खिसकना--हिलुन, नीरिथ चलुननीरिथ च़लुनलिपु॑र थ॑वु॑न्य--सुरणुखिस्कणुखिस्कणु--सरकणेहटणेंसटकणे--सरकवुंहटवुंखसवुं--चुचरि याआँतार हपुलका मार--खसिजिबास्थानरु हटिजिबखसि करि पळाइबा--खसिजिबा----जरुगुटजारुटतप्पिंचुकुपोवुट--उट्कार्न्दपडिये नगरऒरु पॊरुळ् तन् इडत्तिलिरुन्दु नगर्न्दु पोगनळुव--निरङ्ङुकबळुतुकतटि तप्पुक--सरियुवुदुजारुवुदुजारिकॊळॆळुवु--
780खींचनासकारात्मक क्रियासकारात्मक क्रियासकारात्मक क्रिया--किसी वस्तु को बलपूर्वक अपनी ओर लाना या अपने साथ लेते हुए आगे बढ़ना;किसी वस्तु या स्थान में स्थित कोई दूसरी वस्तु बलपूर्वक बाहर निकालना;किसी वस्तु का तत्व, सार या सुगंध निकालना।--खिच्चणाखिच्चणाखिच्चणा--खींचना----लमुनलमुनसत, आ॑रख कडुन--छिकणुछिके कढणुअर्कु कढणु--ओढणेंबाहेर ओढणें, खेचणेअर्क काढणे--खेंचवुंजोर थी बहार काढवुंकोई पण चीजनो अर्क काढवों--टाना, खेंचाहैचड़ानो---टान, आकषर्ण करटानि उलियाउलिया--क्सिकि आणिबाटाणि आणिबासार बाहार करिबा--लागुट, तीयुटलागुट, पीकुटरसमु तीयुट--इळुक्कइळुत्तु वॆळिये ऎडुक्कसारतै ऎडुत्तुविड--बलिक्कुकवलिच्चु पुर॒न्तॆटुकुकपिळिञ्ञॆटुक्कुक--ऎळॆयुवुदुतॆगॆयुवुदुतॆगॆयुवुदु--
781खुजलीस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---शरीर के किसी अंग में रक्त का संचार रुक जाने के कारण होने वाली सुरसुरी;एक चर्म रोग जिसमें शरीर पर छोटे-छोटे दाने निकल आते हैं और बहुत अधिक खुजलाहट होती है, खाज।---खुरक, खुजलीखुरक, खुजली---खुजली (ख़ारिश)----त॑छिन्यखा॑रिश---खार्सि, खुजिलीखार्सि, खाजि---खाजखरूज, खाज---खुजली, चळ, खंजवळखस---सुड सुड़िचुलकुनि---सुरसुरणि, पिरपिरनिखजुवति, खजुलि---कुंडेइ हेबाकुंड़िआ (रोग)---दुरदगज्जि---अरिप्पुसॊरि---चॊरि॒च्चिल्चॊरि---नवॆ, तुरिकज्जि---
782खुजानासकारात्मक क्रिया----शरीर के किसी अंग में खुजली होने पर उस स्थान को नाखूनों अथवा उंगलियों से बार-बार मलना या रगड़ना।----खुरकणा----खुजाना----कशुन, तछुन----खन्हणु----खाजविणे----खणवुं----चुलकानो----खजुवा----कुंड़ाइबा----गोकुट, गीकुट----सॊरिय----चॊरि॒युक, मान्तुक----कॆरॆयुवुदु----
783खुदरापुंलिंगपुंलिंगविशेषण--किसी पूरी चीज के छोटे-छोटे अंश, खंड या टुकड़े, फुटकर;वस्तुओं की बिक्री का वह प्रकार जिसमें वे इकट्ठी या थोक नहीं बल्कि एक-एक करके या थोड़ी-थोड़ी बेची जाती हैं।थोड़ा-थोड़ा करके बिकने वाला।--फुटकरपरचूनपरचून--ख़ुर्दा-ख़ुर्दा--छांठपरचून---रेज़ो, भञरेज़िकीरेज़िकी--किरकोळ, फुटकळ, चिल्लरकिरकोळकिरकोळ--खुडदो, खुरदी, परचूरणपरचूरणपरचुण--खुचरोखुचराखुचरो बिक्रि--सरु सरु खण्ड, टुकुराखुचुरा, खुचुरियाखुचरा बिक्रि--खुचुराखुचरा बिक्रयखुचरा बिक्रेता--चिल्लर सरुकुलुचिल्लर अम्मकमुचिल्लर अम्मकमु--सिल्लरै सामान्सिल्लरै विर्पनैसिरि॒दु सिरि॒दाग--चिल्लर॒चिल्लर क्कच्चबटंचिल्लर॒यायि बिल्क्कुन्न--चिल्लरॆ सामानु बिक्रयचिल्लरॆचिल्लरॆ--
784खुरपुंलिंग----कुछ पशुओं के पैरों का अगला सिरा जो प्राय: गोल तथा बीच में से फटा हुआ होता है, टाप, सुम।----खुर----खुर (सुम)----पडुर----खुरु----खूर----खरी----खुर----खुरा----खुरा----गिट्ट----कुळंबु----कुळंपु----गॊरसु----
785खुरचनासकारात्मक क्रिया----किसी नुकीली वस्तु को किसी दूसरी वस्तु पर इस प्रकार रगड़ना कि वह कुछ छिल जाए।----खुरचणा----खुरचना----जु॑लुन----खुरिडणु, छिलणु----खरडणें----उझरडवुं----चाँचा----रोक----रंवुरुपिबा रंचिबा----गीरुट----तुरुव, शुरण्ड----चुरण्डुक----कॆरॆयुवुदु----
786खुराकस्त्रीलिंगस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग--खाद्य पदार्थ, भोजन, आहार;भोजन की उतनी मात्रा जितनी एक बार अथवा एक दिन में खाई जाय;किसी दवाई की उतनी मात्रा जितनी एक बार में लेनी उचित या उपयुक्त हो।--खुराकखुराकखुराक--ख़ुराक----खॅराखडंगखॅराख--खोराक, खाधोखोराकखोराक--भोजन, खाद्य पदार्थ आहार, भक्ष्यभोजनाची मात्रा, खुराकऔषधिची मात्रा, खुराक--खोराकभोजन नी मात्रादवानी मात्रा--खोराकखोराकखोराक दाग--आहार भोजनखोराकऔषधर रोज, पाली--खोराक, आहारखाइवा, परिमाणमात्रा--भोजनमु, आहारमुआहारमुडोसु--उणवुऒरु मुरै॒, ऒरु नाळ्, शाप्पिडुम उणवुऒरु वेळै कॊडुक्कुम् मरुन्दिन् अळवु--भक्षणंपध्यं ऒरु नस्तॆयो दिवसत्तॆयो आहारंऒरु डोस्--आहार, ऊट भोजनऒन्दु हॊत्तिन ऊटप्रमाण--
787खुशविशेषण----प्रसन्न, संतुष्ट----खुश----ख़ुश----खॅश----ख़ुशि----खुश प्रसन्न, संतुष्ट----खुश----प्रसन्न, खुशी----प्रसन्न, सूखी----खुसि, प्रसन्न----आनन्दमयिन, प्रसन्नमयिन संतोषमुपोंदिन----संतोषप्पट्ट, मगिळ्युट॒ट॒----सन्तोषमुळ्ळ----प्रसन्न----
788खुश किस्मतविशेषण----अच्छे भाग्यवाला, सौभाग्यशाली, भाग्यवान।----खुशकिसमत----ख़ुशक़िस्मत----खॅश क॑स्मत, बाग्यवान----खुशकिस्मतु----भाग्यवान, नशीबवान----खुशकिस्मत, नसिबवाळुं----सौभाग्य शाली, भाग्यवान----भाग्यवान्----भाग्यबान्, सोभाग्यशाळी----अदृष्टवन्तुडु----बाग्गिय शालि----भाग्यवान्----अदृष्टशाली, भाग्यवंत----
789खुशखबरीस्त्रीलिंग----प्रसन्न करने वाला समाचार, शुभ समाचार----खुशखबरी----ख़ुश ख़बरी----खुशखबरी----शुभ समाचार----खुश खबर----खुश खबरी----सुसंवाद----शुभ बार्त्ता, सु खबर----शुभ समाचार----शुभवार्त----नर्चेय्दि----नल्ल वर्त्तमानं, सन्तोष वार्त्त----शुभ समाचार----
790खुश्कविशेषणविशेषणविशेषण--जो तर न हो, सूखा;जो चिकना हो, चिकनाई-रहित;जिसमें कोमलता या रसिकता न हो।--खुश्क----ख़ुश्क-ख़ुश्क--खॅशिखहॊख---खुश्कु----कोरडा, शुष्क-शुष्क--सूंकु-शुष्क--शुष्करुक्ष---शुकान, शुष्करुक्ष, खहटानीरस, कर्कश--शुखिलाशुष्करसहीन--ऍण्डिपोयिन, शुष्कमयिनगरुकयिननीरस मयिन--उलर्न्दवरण्डमुरडु--ईर्प्पमिल्लात्त, उणङ्ङियऍण्णमयभिल्लात्त, बरण्डविरसनाय--ऒणगिदजिड्डिल्लादनीर सवागिरुव--
791खूनपुंलिंगपुंलिंग---रक्त, रुधिर, लहू;हत्या।---खून----ख़ून----खून, रथ----खूनु----रक्त, रुधिर----खुन, लोही----रक्त, रुधिरखुन, हत्या---तेजहत्या, बध---रक्तहत्या, बध---रक्तमु, नेत्तुरुहत्य, खूनी---रत्तम्कॊलै---चोरकॊल---रक्त, नॆत्तरुकॊलॆ, खूनि---
792खूबविशेषणक्रिया विशेषण---सब प्रकार से अच्छा और उत्तम, बढ़िया।अच्छी तरह से, भली भांति।---खूब----ख़ूब----खूब, का॑फी----खूब----चागला, उत्तमफार चांगल्या प्रकारे---खूब, सारुं सुंदरघणुं---खुब, भाल, उत्तमभाल भाबे---बेय, बढ़िया, अति उत्तमबेच भालकै---खुब, उत्तम----मंचि, उत्तममयिनबागुगा---सिर॒न्दनन्रा॒ग---मेल्त्तरंसुन्दरमाय---उत्तमवाद, अंदवादचॆन्नागि, बेकादष्टु---
793खूबसूरतविशेषण----जो देखने में बहुत अच्छा लगता हो, सुन्दर।----खूबसूरत----ख़ूबसूरत----खूबसूरत, खॅशशकु॑ल----खूबसूरतु----सुन्दर सुरेख, देखणा----खूबसूरत----सुन्दर, खुबसूरत----बढ़िया, सुन्दर----बढ़िया, सुन्दर, खुबसूरत----अन्दमयिन----अऴगान----सुन्दरमाय अऴकुळ्ळ----सुन्दरवाद, अन्दवाद----
794खेतपुंलिंग----वह भू-खंड जो फसल उपजाने के लिए जोता-बोया जाता है।----खेत----खेत----खाह----खेतु, ब॒नी----शेत----खेतर----जनि, खेत----खेत, खेतिर पधाथर----खेत----पोलमु----वयल्----वयल्----हॊल, गद्दॆ----
795खेतिहरपुंलिंग----जमीन को जोत-बोकर उसमें फसल उपजाने वाला व्यक्ति, किसान, कृषक।----वाहीवान, वाहीकार, किरसाण----किसान----ग्रूस----हारी, किसानु----शेतकरी----खेडूत----चापा, कृषक----खेतियक, कृषक----कृषक, चषा----रैतु, कर्षकुडु, कृषीवलुडु----कुडियानवन्----कर्षकन्, कृषिक्कारन्----रैत, ऒक्कालिग----
796खेतीस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---खेत को जोतने-बोने तथा फसल उपजाने की कला तथा काम;खेत में बोई हुई फसल।---खेतीखेती---खेतीफ़स्ल---खाहु॑-का॑मफ़सु॑ल---खेती----शेतीपीक---खेतीफसल---चाषफसल, शस्य---खेति, कृषिशस्य, खेति---चाषा, कृषि कर्म्मफसल---व्यवसायमुपैरु---विवशायम् पयिर् तोऴिळ्पयिर्---कृविप्पणिविळ---बेसायबॆळॆ, पैरु---
797खेदपुंलिंग----कोई अपेक्षित काम न करने अथवा कोई काम या बात ठीक तरह से न होने पर मन में होने वाला दु:ख, अप्रसन्नता, रंज।----अफसोस, खेद----रंज----दॅख----डुखु, अफसोसु----खेद----खेद----खेद, दु:ख----खेद----खेद, दु:ख----दु:खमु विचारमु----वरुत्तम्----खेदं, दु:खं----दु:ख, व्यथॆ----
798खेनासकारात्मक क्रिया----डांडों की सहायता से नाव को चलाना।----खेवणा----खेना----नाव वायिन्य----बे॒ड़ी हलाइणु, वंझु हणणु----वल्हविणे----हलेसां मारवां----दाँड़ चालानो----(नाओ) बा----नौका चकाइबा कात-मारिबा----तेड्लुवेयुट----तुडुप्पाल पडगोट्ट----तुऴयुक----हुट्टु हाकुवुदु----
799खेलपुंलिंगपुंलिंग---समय बिताने तथा मन बहलाने के लिए किया जाने वाला कोई काम, क्रीडा;बहुत साधारण या तुच्छ काम।---खेडखेड---खेल----खेलखेल---खेलु, रांदि----खेळखेळ, तुच्छ कार्य, सोपी गोष्ट---खेल, रमतसरल काम---खेला----खेल, धेमलिसाधारण बा तुच्छ काम---खेळ, क्रीडातुच्छ काम---आटआट---विळैयाट्टुमिग ऎळिदान वेलै---विनोदं, कळिऎळुप्पमाय---आटआट---
800खेल-कूदस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---खेल, क्रीडा;(बच्चों की) उछलकूद, आमोद-प्रमोद, कलोल।---खेड----खेलकूद----गिंदुन----रांदि-रूदि, ठेग-टपा----खेळ-क्रीडाखेळ---रमत-गमतखेल---खेला, क्रीड़ाखेला धूला---खेल, धेमालिखेल-धेमालि---खेळ-क्रीड़ापिलांक, खोळकुद---आटलु-पाटलुआटपाटलु, विनोद विलासमु---विळैयाट्टु निगऴचिगळ्केळिक्कै---कळिचाट्टवुं कठिव्युं---आट, क्रीडॆकुणिदाट, विनोद---
801खेलनाअकारात्मक क्रियाअकारात्मक क्रिया---मन बहलाने के लिए शारीरिक क्रियांए करना या व्यायाम करना;खेलवाड़ (खिलवाड़) समझकर और परिणाम का ध्यान छोड़कर कोई काम करना।---खेडणा----खेलना----गिन्दुन----खेड॒णु, रांदि करणु----खेळणे, व्यायाम करणे----रमवुं----खेलाखेला करा---खेलकाम एरि धेमालि---खेळिवा----आडुटआडुट---विळैयाडविळैयाट्टाग सॆय्य---कळिक्कुकआलोचनयिल्लातॆ प्रवर्तिक्कुक---आट आडुवुदुआट आडुवुदु---
802खैरातस्त्रीलिंग----दान के रूप में दिया जाने वाला धन या पदार्थ, दान।----खैरात----ख़ैरात----खा॑रात----खैरात----दान----खेरात----दान, खारात----दान----दान----दानमु----दान-दरुमम्----दानं----दान----
803खोखलाविशेषणविशेषण---जिसके भीतर कुछ न हो, भीतर से रिक्त;निस्सार, थोथा।---पोला, खोखलापोला, खोखला---खोखला----खॅखुर----पोरो, खोखिलो----पोकळनिस्सार---खोखलुंनिस्सार---फांपा, रिक्तसार रहित---फोपोलाअसारुबा, असार---पाला, फंपानि:सार---बोलुनिस्सारमु---पॊन्दु उळ्ळपदर् पोन्र, सारमट॒ट॒---ऒऴिञ्ञ, पॊळ्ळयायपॊळ्ळयाय---पॊळ्ळुसारविल्लद---
804खोजस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---कोई नई बात, तथ्य आदि का पता लगाने का काम, शोध, अनुसंधान;किसी खोई या छिपी हुई वस्तु को ढूंढने की क्रिया।---खोजखोज---दर्याफ़्त (तहक़ीक़)तलाश, जुस्त्तुजू---छा॑ड, खोज----खोजखोज, तलाश, गो॒ल्हा---शोध, संशोधनशोधणे---खोज, शोधखोजवुं---खोंज, सन्धान----बिचार, अनुसन्धानबिचार---खोजिबा, अनुसंधान----परिशोधन, अन्वेषणवेत् कुट---आराय्च्चितेडुदल्---अन्वेषणं, गवेषणंतिरच्चिल्, तेटल्---शोधनॆ, अनुसंधानहुडुकु---
805खोजनासकारात्मक क्रियासकारात्मक क्रिया---किसी खोई या छिपी हुई वस्तु के पता लगाने का प्रयत्न करना, ढूंढना;अनुसंधान या शोध करना।---खोजणाखोजणा---खोजनातहक़ीक़, तहक़ीक़ात (करना)---छ़ारुन----गो॒ल्हणुखोजणु, खोजना करणु---शोधणेसंशोधन किंवा शोध करणें---खोजवुंशोध करवी---खोंज करा, तल्लाश कराअनुसन्धान करा---बिचारअनुसन्धान---खोजिबाअनुसंधान करिबा---वेदकुटपरिशोधिंचुट---तेडआराय---अन्वेषिक्कुकगवेषणं नटत्तुक---हुडुकुवुदुशोधनॆ माडुवुदु---
806खोटस्त्रीलिंगस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग--दूसरों को ठगने के लिए सोने में मिलाया हुआ तांबा;दोष;किसी कार्य या व्यक्ति के प्रति मन में होने वाली बुरी भावना।--खोटखोट---खोट----खॅचर----खोटु----भेसळ, खोटदोषदुर्भावना--खोटदोषदुर्भावना--खोटदोषदुष्ट बिचार--सोणत दिया तामर भाँजदोष, खुँतईर्षा, कपटता--तंबा मिशा सुनादोषकपटता-कटिळत, दुर्भाबना--कल्तीदोषमुदुर्भावन--तंगत्तुडन् कलप्पडम शॆय्द तामिरम्कुट॒ट॒म्-कुरै॒कॆट्ट ऍण्णम्--स्वर्णत्तिल चेर्त्त चॆपु, कलर्पु, मायंकुट॒ट॒म्दुर्भावन--बॆरकॆयागिरुवताम्रदोष, कुंदुकॆडकु--
807खोटाविशेषणविशेषण---मिलावटी;नकली, झूठा, बनाबटी।---खोटा----खोटा (मिलावटी)नक़ली (ज़ाली)---खॊट----खोटो, कूडोखोटो, नकुली---खोटा, असत्य, भेसळांचेंबनावटी, नकली, मिथ्या, खोटा---खोटुबनावटी, नकली---भेजालनकल, मिथ्या---भाँज, भेंजालनकली, भुबा---अ-खाण्टिनिक्षितनकली---कल्ती अयिनबूटकमु, नकली---कलप्पडमानपोली---कलर्प्पुळ्ळकृत्रिममाय, कळ्ळमाय---बॆरकॆयादनकळि, सुळ्ळु---
808खोदनासकारात्मक क्रियासकारात्मक क्रियासकारात्मक क्रिया--कुदाल आदि से जमीन पर आधात करके गड्ढा बनाना;उक्त क्रिया द्वारा दबी पड़ी हुई वस्तु बाहर निकालना;नक्काशी करना।--पुट्टणा, खोदणापुट्टणा, खोदणाखुणना, उक्करना--खोदना----खनुनखनुनखनुन--खोटणु-उकिरणु, चिटु कढणु--खणणें, खोदणे, उकरणेखणणेनक्षीकाम करणें--खोदवुंखणवुंनकशीकाम करवुं--खोंडा खननकरा, गर्तकराखोदाइ करानकाशि करा, उत्किरण करा--खान्द, गाँत करखान्दि उलिया, खोचरखोदाइ कर--खोळिबाखोळि-काढिबाखोदाइ करिबा--त्रव्वुटत्रव्वुटचेक्कुट--तोण्डतोण्डि ऎडुक्कनकासु वेलै--कुऴिक्कुककुळिच्चॆटुक्कुककॊत्तुवेल चॊय्युक--अगॆयुवुदुअगॆदु तॆगॆवुयुदुकॆत्तनॆय कॆलस माडुवुदु--
809खोनासकारात्मक क्रियासकारात्मक क्रिया---किसी वस्तु को भूल से कहीं छोड़ देना;असावधानी, दुर्घटना, मृत्यु आदि के कारण क्षति से ग्रस्त होना।---गुआउणागुआउणा---खोना----रावुन----विञाइणु, खोहिणु----हरविणे, गमावणे, गहाळ करणेंहरविणे, वंचित होणे---खोवुं----हारानखोया---हेरुवाक्षतिग्रस्त ह---हजाइबक्षतिग्रस्त हेबा---मरचिपोवुटपोगोट्टुकोनुट---इऴक्कनष्टप्पड---कळयुककष्टप्पॆटुक---कळदुकॊळ्ळुवुदुनष्ट पडुवुदु---
810खोलपुंलिंगपुंलिंग---किसी चीज का ऊपरी आवरण;विशिष्ट प्रकार के कीडे-मकोड़ों का प्राकृतिक आवरण।---खोलकुंज---खोल----मु॑सलु॑, द्यल----पोशु, ढकु, खोलुखोपो---खोळकात, कवच---खोल, खोळराफडो---खोलखोलस---खोल, खोलाखोला---खोळ, आबरणकोषा---मूत, पैकप्पुपैकप्पु---उरै॒, मूडिपूच्चि पुऴुक्कळिन् मेलुरै---उर॒, पुरं॒तोटुउर॒---आवरणहुळ हुप्पटॆगळहॊरमै---
811खोलनासकारात्मक क्रियासकारात्मक क्रियासकारात्मक क्रिया--अनावृत करना, आवरण हटाना;किसी बंधी हुई वस्तु को मुक्त करना;मोड़ी या तह की हुई वस्तु को फैलाना।--खोल्हणा----खोलना----मुच़रुनमुच़रुनवाहरावुन--उधडणे, आवरण हटविणे, अनावृन्त करणेंछोड़णुखोलणु--उधड़णेसोडणेदुमडलेली बस्तू पसरणें--खोलवुंछोडवुंघडी करेली चीज ने फेलाववी--खोला, उन्मोचन कराखोलाखोला--खोल, एरुवाखोल, मुकालि करमेल, खोल--खोलिबामुक्त कंरिबामोड खोलिबा--तेरचुटविप्पुटविप्पुट--तिर॒क्कअविऴक्कविरिक्क--तुर॒ककुक, अटप्पु माट॒टुककॆट्टऴिक्कुकविरिककुक--तॆरॆयुवुदुबिच्चुवुदुहासुवुदु--
812खौलनासकारात्मक क्रिया----तरल पदार्थ को इतना अधिक गरम करना कि उसमें उबाल आने लगे, उबालना।----उब्बलणा, खौलणा (खून)----खौलना----ग्ररवयिन्य----टहिकणु----उतास येणे, उकळणे----ऊकळवुं----उथलान, फोटा----उतल----फुटिबा----मसलुट उडुकुट----कॊदिक्क----तिळक्कुक----कुदियुवुदु----
813ख्यातिस्त्रीलिंग----यश, प्रसिद्धि, कीर्त्ति।----जस, सोभा----शुहरत, नामवरी----महशूरी----नामूसु, जसु, मशहूरी----प्रसिद्धि, कीर्त्ति ख्याति----ख्याति, कीर्त्ति शान----ख्याति, यश----ख्याति, यश----ख्याति----ख्याति, प्रसिद्धि----पुगळ्, कियादि----प्रसिद्धि, ख्याति----यशस्सु, हॊगळिकॆ----
814गंजाविशेषण, पुंलिंग----जिसके सिर के बाल झड़ गए हों (बॉल्ड)।----गंजा----गंजा----खॊर, त्रामु॑ कलु॑----गंजो----टकल्या----माथे तालवाळु----टेको----तपा मूरा, ताक परा रोग----चंदा----बट्टतलगल----बळुक्कै तलै----कषण्टियाय----बोळुतलॆयव----
815गंदाविशेषणविशेषण---अपवित्र, दूषित, बुरा;धूल, मिट्टी आदि से युक्त, मैला।---गंदा----गंदा----गंदु॑, मा॑लु, मांकूर----गंदो, मेरो----घाणेरडा, दूषित, वाईट, अपवित्रधूल, मात्तीनी बरबटलेला, घाणेरडा---गंदुं----अपवित्र, अशुद्धमयला---अपबित्र, लेतेरामयला, मलियन---अपरिठकार, दुषितमैळा---चेड्ड, मलिनमुमुरिकि अयिन---अळुक्कानअशुद्दमान---दुषिच्चअळुक्कुळ्ळ---अपवित्र, अशुद्धक॑ळॆयाद---
816गंधस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---कुछ विशिष्ट पदार्थों से सूक्ष्म कणों का वायु के साथ मिलकर होने वाला प्रसार जिसका अनुभव नाक से होता है, बास, दुर्गधं;सुगंधित द्रव्य।---बो, गंधसुगंध---बूख़ुशबू---मुशिख----बूइ, गंधखुशबूदारु शइ---वास, दुर्गंधसुगंधित द्रव्य, सुवास---गंध----दुर्गन्धसुगंधित द्रव्य---गोन्ध, बाससुगन्धि बस्तु---गन्ध, दुर्गन्ध, बाससुगंधित द्रव्य---वासनसुगंध द्रव्यमु---वासनैवासनैप्पॊरुळ्---गणं, गन्धंसुगंधद्रव्यं---वासनॆसुगंध---
817गंभीरविशेषणविशेषणविशेषण--गहरा;जटिल, गूढ;शांत, धीर।--गंभीर-संजीदा--अ़मीक़ (गहरा)पेचीदा---संजीदु॑, सॊन----गंभीरु----गहनजटिल, गूडशांत, धीर, गंभीर--गंभीर----गभीरजटिल, गूढशांत, धीर--गभीर दजाटिल, गूढ़गहीन, गम्भीर--गॅभीरगूढशांत, धीर--लोतयिनगंभीर मयिनगंभीर मयिन--आळ्न्दगंबीरमानअमैदियान--आऴमायजटिलंशान्तं, धीरं--आळवादगूढ, जटिलशांत, धीर--
818गंवानासकारात्मक क्रियासकारात्मक क्रिया---खोना;नष्ट करना।---गुआउणा----गंवाना----रावु॑नरावुरावु॑न---विञाइणु, खोहिणुगंवाइणु---हरविणेनष्ट करणें, गमावणें---गुमाववुंनाशकरवो---हाराननष्ट करा---हेरुवानष्ट कर---हजाइ देबानाट करिब---पोगोट्टुकोनुटचेडगोट्टु---इऴक्कनाशं चॆय्य---कळयुकनष्टप्पॆटुत्तुक---कॆळॆदु कॊळ्ळुवुदुहाळुमाडुवुदु---
819गंवारविशेषण, पुंलिंगविशेषण, पुंलिंग---असभ्य, अशिष्ट;मूर्ख, अनाड़ी।---गवारगवार---गंवार----बॆत॑मीजअनाड्य---गंवारु, मूर्ख, बेबकूफु----खेडवळ, अशिष्ट, असभ्यमूर्ख, गांवठी, अडाणी---गमार----गोंयार, असभ्यगोंयार, मूर्ख, अनाडी---अशिष्ट, असभ्यमूर्ख, अबुण नजना---गुआंर, अशिष्टअनाडी, मूर्ख---पल्लेटूरुवाड मोरटु वाडुमूर्खुडु चेतगानिवाडु---नाट्टुप्पुर॒त्तानमुट्टाल---परिष्कारमिल्लात्त, अपरिष्कृतन्मठयन्---असभ्य, तिळिगेडिमूर्ख, हळ्ळियव---
820गगनपुंलिंग----आकाश, आसमान।----गगन----गगन, आसमान----असमान----गगनु, आकासु, उभु----गगन आकाश, नभ, आभाळ----गगन----गगन----गगन, आकाश----गगन, आकाश----गगनमु, आकाशमु----आगायम्, वानं----आकाशं----आकाश----
821गजपुंलिंगपुंलिंगपुंलिंग--हाथी;लंबाई की एक माप जो सोलह गिरह या छत्तीस इंच के बराबर होती है, माप उपकरण;उक्त माप का उपकरण।--हाथी, गजगज़गज़--हाथीगज़---हॊसगज़गज़--हाथी, गजुगजु, वालु---हत्ती, गजवारगज--गज, हाथीगज (माप)---गजगजगज--गज, हातीगज (दीघर एट जोख)---गज, हाथीगज---एनुगुगजमुगजमु-बद्द--यानैगॆजम्गॆजक्कोल्--गजं, आनगजं, वारमुऴक्कोल्--आनॆगजगजकड्डि--
822गजरापुंलिंग----फूलों की घनी गुंथी हुई माला।----गजरा----गजरा, हार----गजरु॑----गुलनि जो हारु----गजरा----गजरो----फुलेर माला----फुलर माला----गजरा----दंड----पू माळै----पूमाल----मालॆ----
823गड़बड़पुंलिंगपुंलिंगपुंलिंग--ऐसी अवस्था जिसमें क्रम, व्यवस्था आदि का अभाव हो;असावधानी, भूल आदि से कुछ का कुछ कर देने की क्रिया या भाव;उत्पाद, उपद्रव।--गड़बड़----गड़बड़----गड़बड़गड़बड़गड़बड़--गड़िब॒ड़ि----अस्ताव्यस्तगडबड, गोंधळउत्पात, गडबड--गडबड, गरबडगडबड गोटाळोउत्पात--अव्यवस्था, गोलमालगोलमाल---खेलिमेलिबिशृंखलाउत्पाद, उपद्रव--गड़बड़, अन्यबस्थाअसाबधानताउत्पाद, उपद्रव--चिंदरबंदर, तारुमारुपोरपाटुगडबिड--ऒळुंगिन्मैकुऴप्पम्कलगम्--अव्यवस्थअविवेकंबहळं--गडिबिडिगडिबिडिउपद्रव--
824गढ़पुंलिंगपुंलिंग---किला, दुर्ग;केन्द्र, मुख्य स्थान, अड्डा।---किला, गढ़----क़िलागढ़ (मर्कज़)---कु॑लु॑गड़---किलो, ग॒ढ़ुमर्कजु, मुख्यु हंधु---किल्ला, गडकेन्द्र, स्थळ, मुख्य स्थान---गढ़केन्द्रस्थान, मुख्यस्थान---गड़ केल्ला, दुर्गगड़, आड्डा---गड़, दुर्गकेन्द्र, आड्डा---गड़, किला, दुर्गआड्डा, केन्द्र---कोटकेन्द्रमु---कोट्टैतलैमै निलैयम्---कोट्टकेंद्रं---कोटॆ, दुर्गकेन्द्र, मुख्यस्थान---
825गढ़नासकारात्मक क्रियासकारात्मक क्रिया---कोई नई चीज बनाने के लिए किसी स्थूल पदार्थ को काट, छील ढाल कर तैयार या दुरुस्त करना;कोई कल्पित बात बनाना या कोई बात नमक-मिर्च लगाकर सुन्दर रूप में प्रस्तुत करना।---घड़णाघड़णा---घड़ना (गढ़ना)----गरुन, बनावुनसॊंबरावुन---घड़णु----बनविणे, तयार करणेबनवून सांगणे---घड़वुंउपजीवी ने कहेवुं---गड़ागनगड़ा कथा---गढ़, साज, तैयार करसाजि क---गडिबा, तिआरि करिबाकल्पित कथा---चेक्कुटकल्पिंचुट---उरुवाक्यकदै कट्ट---निर्मिक्कुक, रचिक्कुकर्कोट्टच्चमक्कुक---रचिसुवुदुकल्पिसुवुदु---
826गणपुंलिंग----समूह, झुंड, वर्ग।----गण----गुरोह (गिरोह)----ख्यॊल----मेडु, मज्मूओ, गिरोहु----गण, समूह समुदाय, वर्ग----गण----गण, समूह----गण, समूह वर्ग----गण, समूह बर्ग----गणमु, समूहमु, वर्गमु----कूट्टम्----समूहं, गणं----गुंपु, वर्ग, समूह----
827गणतंत्रपुंलिंग----वह राज्य या राष्ट्र जिसकी सत्ता जनसाधारण (विशेषत: मतदाताओं या निर्वाचकों) में निहित होती है।----गणतंतर----जम्हूरिया----जमहूरिया----गणतंत्रु----प्रजासत्ताक गणराज्य----गणतंत्र----गणतंत्र----गणतंत्र----गणतन्त्र----प्रजा प्रभुत्वमु----कुडियरशु----गणतंत्रं, रिप्पब्लिक्----प्रजातंत्र----
828गणनास्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---गिनती करने की क्रिया या भाव;गिनती, संख्या।---गिणती----शुमार (गिनती)----ग्रन्द----गणपअंगु, अददु---मोजणी, गणनागणती, हिशेब, मोजदाद---गणनाअंदाज, गणत्री---गणना, गोनागुनति---गणनासंख्या---गणनागणति, संख्या---लेक्कसंख्य---ऎण्णिक्कैए॑ण्---ऎण्णलए॑ण्णं---ऎणिकॆसंख्यॆ---
829गणितपुंलिंग----वह शास्त्र जिसमें परिमाण, मात्रा, संख्या आदि निश्चित करने की रीतिओं का विवेचन होता है, हिसाब (मैथेमेटिक्स़)।----गणित, हिसाब----रियाज़ी (रियाज़ीयात)----हिसाब----हिसाब, हिसाबी इल्मु----गणित----गणित----गणित, अंकशास्त्र----गणित----गणित, अकंशास्त्र----गणित शास्त्रमु, लेक्कलु----कणक्कु----गणितं----शुद्ध गणित----
830गतिस्त्रीलिंगस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग--चाल, रफ्तार;हरकत, चेष्टा, हिलना-डुलना;दशा, अवस्था, हालत, स्थिति।--गतीगतीगती--रफ़्तारहरकतगत (हालत)--रफ्तार----रफ़्तार, चालि, गतीचुरिपुरि, हर्कतहालति, अवस्था--गति, चाल, वेगप्रयत्न, हालचालदशा, अवस्था--गति चाल, झडपप्रयत्न, हालचालदशा, अवस्था--गति, चालगति, चेष्टागति, अवस्था--गतिचेष्टा, आचरणदशा, अवस्था--गति, चालचेष्टादशा, स्थिति--नडक, चलनमुकदलिकगति, दश, अवस्थ--वेगम्अशैदलगदि, निलैमै--गतिअनक्कंस्थिति गति--वेगगतिस्थिति दशॆ--
831गतिरोधपुंलिंगपुंलिंग---चलते हुए काम का रुक जाना;झगड़े या बातचीत के समय की ऐसी स्थिति जिसमें दोनों पक्ष अपनी-अपनी बात पर अड़ जाते हैं और समझौते का कोई रास्ता दिखाई नही देता (डैड लॉक)।---अड़िक्काअड़िक्का---तअ़त्तुल----क्रेछरवॅज़ाल---रुकावट, रंडक, रोक----गतिरोध, काम थांबणेपेचप्रसंग---गति भंगगूंचवा वाळो मामला---गतिरोधगतिरोध---गतिरोधअचल अवस्था, बन्द्य---गतिरोध----अड्डंकुअवरोघमु---तडै-पंडुदल्मुट्टुक्कट्टै---तदस्संप्रतिसंधि---तडॆबिक्कट्टु---
832गतिविधिस्त्रीलिंगस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग--कार्य-कलाप;चेष्टा, हरकत;आचरण-व्यवहार करने या रहने-सहने का रंग-ढंग।--तौर-तरीका, रंग, ढंग, गतीविधि----सरगर्मीहरकततर्ज़े-अ़मल, रफ़्तार--दवु॑दवतुलुत्रावचाल--मश्गूली, कमु कारिचुरिपुरिहालु चालु, वहिंवारु--रागरंग, कार्यकलाप, गतिविधिहालचाल, प्रयत्नपद्धत, रीति--कार्यकलापचेष्टाचालचलगत--गतिविधिगतिविधिगतिविधि--कार्य-कलाप, गतिबिधिआचरण, चाल-चलनगतिबिधि--गतिविधि-कार्ज्यकळाप (कार्ज्य-कळप)चेष्टाआचरण--कार्यकलापमुलु पनिपाटलुचर्च, क्रियनडवडिक--नडैमुरै॒मुयर्चिनडत्तै--प्रवर्तनंप्रयत्नंप्रवर्तिकुन्न रीति--कार्यकलापचलनॆ, गतिनडतॆ--
833गदरानाअकारात्मक क्रियाअकारात्मक क्रिया---फलों आदि का पकने पर आना;जवानी में शरीर के अंगों का भरना और सुडौल होना।---गदराउणा----गदराना----पपुन----रंगु कढणु (मेवे बगैरह जो पचण ते अचणु)खुली पवणु, जुवानीअ सबबि बुत जो सुडोल थियणु---पाडास येगेंतरुणपणांत शरीराची अंगें हृष्ट-पुष्ट होणे---पाकवुं (फल आदि)जुबानी मां शरीर भरावा लागवुं---आधपाका हओयायौवनें अंग फुष्ट हओया (जौ)---पूरठ ह, पैनत हयौवन लाभ कर---पाकळजौबन शरीर सुढळ हबा---पंडुट, परिपक्वमुगुटवळ्ळनिंडुट---कनियइळमैयिल् अंगंगळ् वाळिप्पडैय---मूक्कुक, पळुक्कारा॒कुकयौवनॊक्कळुप्पुण्टाकुक---पक्ववागुवुदुमैतुबुवुदु---
834गद्दापुंलिंग----बिछाने की मोटी रूई दार भारी तोशक।----गद्दा----गद्दा----ग॑दलु॑, गबु॑----गादेलो, गादेली, गदो----गादी----गादलुं----गदि----गादी----गदि----परुपु----मॆद्दै----मॆत्त----मॆत्तॆ----
835ग़बनपुंलिंग----अमानत की रकम खा जाना (ऐम्बैज़लमेंट)----गबन----ग़बन----गबन----अमानत जी रकम फबाए वञणु, ख़ियानत----अफरातफर, अपहार----बेईमानी करवी ते----तहबिल तछरूप धन आत्मसात् करण (न)----आत्मसात् करण----तोसरफ करिबा----अक्रममुगतिनिवेयुट कबळिंचुट----पिरर् सॊत्तै गबळीगरम् शॆय्दल (कैयाडळ्)----धनापहरणं----हण तिंदुहाकुवुदु, दस्तुमाडुवुदु----
836गमलापुंलिंग----नांद के आकार का एक प्रकार का मिट्टी, धातु या लकड़ी का पात्र जिसमें फूलों आदि के पौधे लगाए जाते हैं।----गमला----गमला----गमलु॑----कूंडी----कुंडी----कुंडुं----गामला----फुलर टाब, फुलदानी----गमला----पूलतोट्टि----पूत्तॊट्टि----पूच्चट्टि----हूतॊट्ट्टि----
837गरजनाअकारात्मक क्रिया----गंभीर तथा घोर शब्द करना, जोर से कड़क कर बोलना।----गरजणा----गरजना----ग्रजुन----गर्जणु, गजणु----गरजणें----गरजवुं----गर्जन करा----गर्जन करा----गरजिबा----गर्जिंचुट----गर्जिक्क----गर्जिक्कुक, उलरु॒क----गर्जिसुवुदू----
838गरम (गर्म)विशेषणविशेषण---साधारण से अधिक तापमान वाला, उष्ण;उग्र, उत्कट, आवेश प्रधान।---गरमगरम---गर्मतेज़---गरु॑मतॊत---गर्मु, गरमु----कढत, गरमउग्र, उत्कट, आवेश प्रधान, गरम---गरमउम्र; उत्कट; वेगीलुं गरम---गरम, उष्णउम्र---गरमउग्र, खङाल---गरम----वेच्चनि, वेडिउग्रमु---शूडानतीविरमान---चूटायउग्रमाय, आवेशं निर॒ञ्ञ---बिसिउग्र, उत्कट---
839गरिष्ठविशेषणविशेषण---बहुत भारी;(खाद्य पदार्थ) जो बहुत कठिनता से या देर में पचता हो।---भारी----सक़ीलदेर हज़्म---स्यठाह गॊबॆ----गौ॒रोगौ॒रो, देरि हज़मु---जड, भारीपचावयास जड पदार्थ---गरिष्ठपचावामां मुश्केल---गरिष्ठ----गरिष्ठगुरुपाकी---गरिष्ठ, बहुत भारीवदहजम पदार्थ---बरुवयिनबलमयिन---मिग गनमानसीक्किरम् जीरणमागाद---भारमुळ्ळगुरुवाय, दहिक्कान् विशममुळ्ळ---बहळ भारवादबेग अरगद पदार्थ---
840गरीस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---नारियल के अंदर का वह सफेद मुलायम गूदा जो खाया जाता है;किसी बड़े बीच के अंदर का मुलायम गूदा, गिरी।---गिरी, गरी----गरीगिरी, मग्ज़---गूज----गोरो (नारेल जो), डूंघीगोरो, ग॒भु---खोबरेगीर, गर---कोपरुंगीर, गर्भ---नारिकेलेर शाँसशाँस---नारिकलर शाहभितर र शाह---(नडिआ-भीतर-अंश) शस (नड़िआशस)मंजिशस---कोब्बरिपप्पु---कॊप्परैविदैकळिन् परुप्पु---नाळिकेरत्तिन्टॆ परिप्पु, काम्पु, कऴम्पुपरिप्पॅ---तिरुळुतिरुळु---
841गरीबविशेषण, पुंलिंगविशेषण, पुंलिंगविशेषण, पुंलिंग--निर्धन, दरिद्र;दीन और नम्र;निरुपाय, बेचारा।--ग़रीब----ग़रीबमस्कीनलाचार--ग़रीब----गरीब, निर्धन----गरीबदीन, व नम्र, गरीबबिचारा, गरीब---दीन, दयामणुंबिचारो--गरीब, निर्धनदीन, नम्रनिरुपाय, बेचारा--गरीब, दुखीयादीनदुखीनिछला--गरिब, दरिद्रदीनबिचारा--बीदवाडु, निरुपेददीनुडुपापमु, निस्सहायुडु--शदैप्पट॒टुळ्ळ बागम्एळैऎळिय--दरिद्रन्दीननुं विनीतनुँपावं--बडव, दरिद्रदीन, नम्रअसहाय, बडपायि--
842गर्वपुंलिंगपुंलिंगपुंलिंग--अपने को दूसरों से बढ़कर समझने का भाव, अभिमान, घमंड;अपनी शक्ति, समर्थता आदि की दृष्टि से मन में होने वाली अयुक्तिपूर्ण अहंभावना;अपने किसी श्रेष्ठ कार्य, बात, वस्तु और व्यक्ति आदि के संबंध में होने वाली न्यायोचित अहंभावना।--गरबगरबगरब--गुरूर, घमंडतकब्बुरनाज़ (फ़ख़्र)--फखु॑रअहंकारफखु॑र--गर्बु, अभिमानुअभिमानुगर्व, फखु--गर्व, घमेंडअंहकारअभिमान--गर्व, घमंडअहंकारअभिमान--गर्व, अभिमानगर्व, अभिमानगर्व, अभिमान--गर्ब्ब, बराईअहंकारगर्ब्ब--गर्ब्ब, अभिमानअहं भावना, अइंकारअहं भावना--गर्वमुअहंकारमुगर्वमु--गर्वम्शॆरुक्कुमननॆगिऴचि--गर्वुअंहंकारंअभिमानं--अभिमान, गर्वअंहभाव, दुरहंकारअभिमान--
843गलतविशेषणविशेषणविशेषण--जो सही या ठीक न हो, अशुद्धमिथ्या, असत्य।अनुचित।--गलत----ग़लत----अपुज़, गलतगलत---ग़लति----चुकीचेमिथ्या, असत्यअनुचित--गलत, भूल, भरेलुंजूठुंअयोग्य--गलद, अशुद्धमिथ्या, असत्यअनुचित--भुल, अशुद्धमिछा, असत्यअनुचित--बेठिक, अशुद्धमिथ्या, असत्यअनुचित--तप्पुअबद्धमुतप्पु--तवरा॒नपॊय्तगाद--तॆट्टा॒यअसत्यंअनुचितं--तप्पाद, अशुद्धसुळ्ळाद्, असत्यअनुचित--
844गलतीस्त्रीलिंग----भूल, अशुद्धि, त्रुटि।----गलती----ग़लती----गलती----ग़ल्ती, ग़लती----भूल, चूक----गलती, भूल-चूक----गलद, भुल, त्रुटि----भुल, त्रुटि, अशुद्धि----गल्ति, भूल----तप्पु, पोरपाटु----पिऴै, तवरु॒----अशुद्धि, तॆट॒ट॒----अशुद्धि, दोष, तप्पु----
845गलानासकारात्मक क्रियासकारात्मक क्रियासकारात्मक क्रिया--किसी ठोस वस्तु को तरल बनाना, पिघलाना;किसी कड़ी चीज या कच्चे अन्न आदि को उबाल कर नरम करना;घुलाना--गालणागालणागालणा--गलाना----गालुनगालुनगालुन--गा॒रणु, पधारणुगा॒रणुगा॒रणु--विरघळविणेविरघळविणे, वितळविणेविरघळविणे, वितळविणे--पिगाळवुंनरम करवुंओगाळवुं--गलान, तरल करागलान, तरल करागलान, गलिये नरम करा--गलाकामलागुल, पनीया कर--तरळाइबासिझाइबा (सिझाइबा )धोळिबा--करिगिंचुटउडिकिंचुटकरिगिंचुट--उरुक्कसमैत्तु पक्कुवमाक्ककरैक्क--उरुक्कुकवॆविक्कुकअलियिक्कुक--करगिसुवुदुमृदुमाडुवुदुकरगिसुवुदु--
846गलीस्त्रीलिंग----सड़क से कम-चौड़ा, संकरा रास्ता जिसके दोनों ओर मकानो की कतार हो।----गली----गली----कोचि----घिटी, गली----बोळ, गल्ली----गली, शेरी----गलि----गली, रास्ता, सरु बाट----गळी----संदु----सन्दु----तॆरुवु----ओणि, गल्लि----
847गवाहपुंलिंगपुंलिंगपुंलिंग--ऐसा व्यक्ति जिसने कोई घटना स्वयं देखी हो अथवा जिसे किसी घटना, तथ्य, बात आदि की ठीक और पूरी जानकारी हो, साक्षी;न्यायालय में तथ्य का सत्यापन या समर्थन करने वाला, साक्षी;दो पक्षों में होने वाले लेन देन, व्यवहार, समझौते आदि के लेख पर हस्ताक्षर करने वाला। (विटनेस, उक्त तीनों अर्थों में)।--गवाहगवाहगवाह--गवाह----गवाहगवाहगवाह--शाहिदु, गवाहु----साक्षीदारसाक्षीदारसाक्षीदार--गवाह, साक्षीसाक्षी पूरनारसाक्षी--साक्षी॒ (क्ख)साक्षीसाक्षी--साक्षी, प्रत्यक्षदर्शीसाक्षीसाक्षी--गुहा (साक्खी)साक्षी (साक्खी)साक्षी (साक्खी)--साक्षिसाक्षिसाक्षि--साट्चिसाट्चि अळिप्पवन्साट्चियाग कैयॊप्पम् इडुबवन्--साक्षिसाक्षिसाक्षि--साक्षिसाक्षिसाक्षि--
848गहनविशेषणविशेषणविशेषण--गहरा;दुर्लभ, दुरूह, कठिन;घना, निविड़।--डूंघा----गहरादुशवारघना--सॊनकठ्युनगॊन--गहिरो, ऊन्होंडुख्यो, दुर्गमुघाटो--गहनदुर्गम; कठिण; गहनसघन, पाट, निबिड--गहन, ऊंडुंदुर्गम; कठण; गहनसघन; धट्ट--गहन, गभीरगहन, दुर्गम, दुरुहगहन निविड़--गभीर ददुर्गम, कठिनधन, निबिड़ गहन--गहन, गहराकठिन, दुर्गम, दुरुह---लोतयिनकठिनमु, दुर्गममुदट्टमयिन--आळ्न्दतगर्क्कमुडियादअडर्न्द--गहनमायदुर्गमंनिबिडं--आळवादकठिणवादनिबिडवाद, दट्टवाद--
849गहनापुंलिंग----आभूषण, जेवर।----गहिणा----गहना (ज़ेवर)----ज़ेवर, गहनु॑----गह॒णो, जेवरु----दागिना----धरेणुं----गयना, गहना----गहना, आभूषण----गहणा, अळंकार----आभरणमु, नग----नगै, आवरणम्----आभरणं, उरुप्पटि----ऒडवॆ----
850गहराविशेषणविशेषणविशेषण--जिसका तल चारों ओर के स्तर से नीचे की ओर अधिक दूरी तक हो;जिसकी थाह बहुत नीचे हो, 'उथला' का विपर्याय;(व्यक्ति या विषय) गूढ, गहन, गंभीर।--डूंघा, गहराडूंघा, गहराडूंघा, गहरा--गहरा----सॊन-सॊन--गहिरो, ऊन्हों----खोलखोल, अथांगगंभीर, गूढ--ऊंडुंअतलगूढ--गभीरगभीरगभीर--गभीर दअथाइगुढ़ (बस्तु बा बिषय) गम्भीर (व्यक्ति)--गहरा (गंभीर)गहिरागंभीर--लोतयिनलोतयिनगूढमयिन--आऴमानआऴमानगंबीरमान--आऴमायअगाधमायगूढमाय--आळवादआळवादगूढवाद, गंभीरवाद--
851गांवपुंलिंग----बहुत छोटी बस्ती, खेड़ा, ग्राम।----पिंड----गांव----गाम----गो॒ठु----गांव, खेडे----गाम, गामडुं----ग्राम, गाँ----गाँओ----गां, ग्राम----ग्राममु, पल्लेटूरु----गिरामम्----ग्रामं, नाट्टिन् पुरं॒----हळ्ळि, ग्राम----
852गाड़नासकारात्मक क्रियासकारात्मक क्रिया---गड्ढे में रखकर मिट्टी से ढकना, दफनाना;धरती या दीवार आदि में धंसाना।---गड्णा, दब्बणागड्णा, दब्बणा---गाड़ना----दफनावुनवडरावुन---पूरणुअंदर घेड़णु, खोड़णु---पुरणेंपुरणे---गाडवुं, खाडो करीने दाबवुंपूरवुं---पोंता, गाड़ापोंता, गाड़ा---योत, गाँरबहुवा, मार---गाड़िवा, पोलिबापोतिबा---पूड़चुट, पातुटनाटुट---पुदैक्कबूमियिल् सुवट्टिल तिणिक्क---कुऴिक्कुककुऴिच्चिटुक---हूळुवुदुमुच्चिडुवुदु---
853गाढ़ाविशेषणविशेषणविशेषण--जो पतला न हो;(रंग आदि) जो अधिक गहरा हो;दृढ़, पक्का, घनिष्ठ।--गाढ़ा, संघणागूढ़ागूढ़ा--गाढ़ागाढ़ागाढ़ा (गहरा)--मॊटगॊट, शोखसख्त--घाटो----घट्टगडददृढ़ पक्का, धनिष्ट--गाढुंघेरूंपाक्कु, धनिष्ट--गाठ, घन, मोटागाठगाठ--डाठगाठ, डाठदृढ़ पक्का, घनिष्ठ--गाठगहरा---दट्टमयिन, चिक्कनिगाढमयिनघनिषृमयिन--गॆट्टियानआऴन्दअडर्न्द--कट्टियायकटुत्तदृढमाय--गट्टियागिरुवदप्पवाद, दट्टवादघनिष्ट, गाढवाद--
854गानासकारात्मक क्रियापुंलिंग---लय, ताल के साथ पदों का उच्चारण करना।गाई जाने वाली चीज या रचना, गीत।---गाउणागाउण---गानागाना---ग्यवुनग्यवुन---गा॒इणुरागु, गानो---गाइणेंगीत---गावुंगीत, गायवं---गानकरा, गाओयागान, गीत---गागीत---गाइबागीत---पाडुटपाट---पाडपाट्टु---पाटुकपाट्टु, गीतं गान---हाडुवुदुहाडु; गीत---
855गायकपुंलिंग----गाने वाला, गवैया।----गवइआ----गदैया (गुलूकार)----ग्यवन वोल----गायकु, गवैयो, रागी॒----गायक, गाणारा गवैया, गवई----गायक, गवैयो----गायक----गायक----गायक, गाइबा लोक----गायकुडु----पाडगर्----गायकन्----हाडुगार, गायक----
856गाहक (ग्रहक)पुंलिंग----खरीदने वाला, खरीददार।----गाहक----गाहक, ख़रीदार----ह्य॑नु वोल----ग्राहक, खरीदारु----ग्राहक, गिर्हाइक----ग्राहक, घराक----ग्राहक, क्रेता----ग्राहक, खरिद्दार----ग्राहक, गराक----कोनुगोलुदारु----विलैक्कु वांगुबवर्, वाडिक्कैक्कारर्----वाड्.डुन्न वन्----गिराकि----
857गिनतीस्त्रीलिंगस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग--गिनने की क्रिया या भाव, गणना;संख्या;एक से सौ तक की अंक माला।--गिणतीगिणतीगिणती--गिनती----ग्रन्दग्रन्दग्रन्द--ग॒णपअंगु, अददुअंग (हिक खां सौ ताई)--मोजणी, गणनासंख्याअंक--गणतरी, गणत्रीसंख्याअंक--गणना करा (न) गोनासंख्यागुनति--गणनासंख्याएकर परा शलैके संख्या--गणति, गणनासंख्यागणना--लेक्कपेट्टुट, एंचुटसंख्यअंकेलु--ऎण्णिक्कैऎण्ओन्रुमुदल नूरुवरै ऎण्गळ्--ऎण्णं, ऎण्णल्संख्य, ऎण्णंऎण्णं--ऎणिकॆ, गणनॆसंख्यऎणिकॆ--
858गिननासकारात्मक क्रियासकारात्मक क्रिया---संख्या सूचक अंको का नियमित क्रम से उच्चारण करना, गिनती करना;गणना करना।---गिणनागिणना---गिनना----गंज़रुनगंजरुन---ग॒णणु----गणती करणे, मोजणेगाणना करणें---गणवुंगणत्री करवी---गोनागणना करा (न)---गणना कर, गन्ति करगणना कर---गणिबा----लेक्कपेट्टुट, एंचुटलेक्कपेट्टुट---ऎण्णकणक्किड---ऎण्णुकऎण्णुक---ऎणिसुवुदुलॆंक्क माडुवुदु---
859गिरजापुंलिंग----ईसाइयों का प्रार्थना-मंदिर।----गिरजा----गिरजा----गिरजु॑----देवलि, गिरजा-घरु----चर्च----गिरजा, गिरजाघर----गिर्जा----गीर्जा---------चर्चि----मादाककोविल्----क्रिस्त्यन् पऴळि----चर्चु----
860गिरफ्तारविशेषण----जो किसी अपराध के कारण पुलिस अधिकारियों द्वारा पकड़ा गया हो।----गिरफतार----गिरिफ़्तार----गिरिफतार----गिरफ्तारु----बंदी, कैदी----गिरफ्तार----ग्रेप्तार, धृत----ग्रेफ्तार करा, बन्दी करा----गिरफदार----कैदुचेयबडिन----कैदु सॆय्यप्पट्ट----तटविलाय, बन्धनस्थन्----दस्तगिरियाद----
861गिरवीस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---बंधक, रेहन;बंधक रखी हुई चीज।---गहणे----गिरवी (रेहन)गिरवी---गिरवी, अमानथबंद---गिर्वीगिर्वी रख्यल शइ, ग॒हु---गहाणगहाण ठेवलेली वस्तू---गिरवीगिरो मूकेली वस्तु---बन्धक----बन्धकबन्धकी बस्तु---बन्धा, बंधक----ताकट्टुताकट्टु---अडगुअडगु वैक्कप्पट्ट---पणयंपणय वस्तु---गिरवि, अडवुअडवु---
862गिरानासकारात्मक क्रियासकारात्मक क्रियासकारात्मक क्रिया--नीचे डालना, फेंकना;ढहाना, जमीन पर लुढ़का देना;किसी वस्तु या रचना को तोड़-फोड कर उसका नाश या ध्वंस करना।--डेगणा, ढाहुणडेगणा, ढाहुणाडेगणा, ढाहुणा--गिराना----त्रावुनवालुनलुहु॑रावुन--केराइणुकेराइणु, डाहिणुभञी-भोरे नासु करणु--पाडणें, खाली टाकणेंफेकणें, जमीन दोस्त करणेंध्वंस करणें--पाडवुंफेकवुं, जमीनदोस्त करवुं---फेला, फेले देओयाबओयानोनष्ट, पण्ड अथवा ध्वंस्त करा--पेलाखहाफालि चिरि पेला--पकाइबातके गड़िबानष्ट बा ध्वंस करिब--पडिवेयुटदोर्लिंचुंटध्वंसमु चेयुट--कीऴे पोळ्तरैमेल् वीऴ्त्तअऴित्तुविड--वीऴ्त्तुकतळ्ळि वीळ्त्तुकतल्लिप्पॊट्टिक्कुक--बीळिसुवुदुउरुळिसुवुदुध्वंसमाडुवुदु--
863गिरोहपुंलिंग----एक साथ काम करने वाले व्यक्तियों का समूह, गुट या झुंड।----गुट----गिरोह (गुरोह)----जमाथ----टोलो, गिरेहु----टोळी----समूह-टोली----दल----एके लगे काम करा मानुहर दलबा समूह----दळ-समूह----गुंपु, ज़ट्टी----कूट्टम----संघं----गुंपु----
864गीतपुंलिंग----छोटी पद्यात्मक रचना जो गाए जाने के लिए बनी हो, गाना।----गीत----गीत----बा॑थ----गीतु----गीत----गीत----गीत, गान----गीत----गीत----पाट, गेयमु----पाट्टु, गीतम्----गीतं, पाट्टु----हाडु, गीत----
865गीतकारपुंलिंग----गीत लिखने वाला।----गीतकार----गीतकार----बा॑थ लेखन वोल----गीतकारु----गीतकार----गीतकार----गीतकार----गीतिकार----गीतकार----वाग्गेयकारुडु----पाडलाशिरियर्----गीतकारन्, गानरचयितावु----गीतकार----
866गुंडाविशेषण, पुंलिंग---बुरे चाल-चलने वाला, बदमाश।----गुंडा----गुंडा----गुंडु॑, बदमाश----गूंडो----गुंड, बदमाश, मवाली----गुंडो----गुण्डा, बदमायेस----गुण्डा, बदमाच----गुंडा----रौडीत----गुण्डन् पोक्किरि----गुण्ड----पोकरि----
867गुंडागर्दीस्त्रीलिंग----गुंडो का सा आचरण या व्यवहार, बदमाशी।----गुंडागरदी----गुंडा गर्दी----गुंडु॑गरी----गूंडागर्दी----गुंडगिरि, बदमाशी, गबलिगिरी----गुंडागीरी----गुण्डामि, बदमासि----गुण्डामि----गुंडमि----रौडीतनमु----गुण्डात्तनम् पोक्किरित्तनम्----गुण्डा विऴयाट्टं तॆम्मटित्तर----गुंडागिरि पोकरितन----
868गुंबदपुंलिंग----वास्तु रचना में वह शिखर जो गोले के आकार का और अंदर पोला होता है, गुंबज।----गुंबद----गुंबद----गुंबद----गुंबजु----घुमट----गुंबज, घूमट----गुम्बज----गुम्बज, गुम्बज----गंबुज----गुम्मटमु----कुविन्द गण्डपम् कुविन्द गोपुरम्----ताऴिक क्कुटं----गुम्मट, गुंबज्----
869गुच्छापुंलिंग----एक ही प्रकार की बहुत-सी वस्तुओं का समूह जो एक साथ गुंथा या उपजा हो।----गुच्छा----गुच्छा----गुच्छु॑----छुगो॒----गुच्छ----गुच्छो----गोछा, तोड़ा----गुच्छ, समूह----गोछा----गुत्ति----कॊत्तु----गुच्छ, कूट्टं----गॊंचलु, गॊनॆ----
870गुजरनाअकारात्मक क्रियाअकारात्मक क्रिया---किसी स्थान से होते हुए आगे बढ़ना;व्यतीत होना, बीतना।---लंघणाबीतणा---गुजरना----नेरुनगुजु॑रुन---गुज़िरणु, लंघणुगुज़िरणु---पुढे जाणेंव्यतीत होणें, कालक्षेप होणें---गुजरवुं, जवुंव्यतीत थवुं, वीतवुं---कोनो स्थानेर मध्य दिया पेरियेव्यतीत हओया, अतीत हओया---आगुवाइ या आगबाढ़पार ह, अतिवाहित ह---चालिजिबाबितिजिबा---गडचुटगडचुट---कडन्दु शेल्लनाट्कळ् कऴिय---कटन्नु पोकुककऴियुक---होगुवुदुकळॆदु होगुवुदु---
871गुटपुंलिंग----टोली, गिरोह, छोटा दल।----गुट----गुरोह----टूल्य, जमाथ, छॅख----टोलो, टोली, गुटु----गट, लहानदळ, टोळी----टोळी----दल, समूह----समूह, दल----छोटदल----दळमु, गुंपु----कुऴु----चेरि, संधं----तंड, पार्टि----
872गुणपुंलिंगपुंलिंगपुंलिंग--महत्वपूर्ण विशेषता जिसके कारण एक वस्तु दूसरी से अलग मानी जाती है;किसी वस्तु का लाभदायक तत्व, प्रभाव;प्रशंसनीय बात।--गुण----गुन (वस्फ़, सिफ़त)खासियत, खूबी---वुसु॑फ़----गुणु----गुणधर्मगुणप्रशंसनीय गोष्ट--गुणगुणवखाणवेली बात--गुण, विशेषत्वफलोत्पदिका शक्ति, प्रभावगुण--गुणलाभजनक बा भाल कथाप्रशसनीय कथा, गुण--गुणप्रभाबप्रशंसनीय कथा--गुणमुगुणमुगुणमु--गुणम्, इयल्बुउपयोगमुळ्ळ तत्तुवम्मॆच्चत्तक्क विषयम्--गुणंमॆच्चंवैशिष्ट्यं--गुणप्रभाबवैशिष्ठ्य--
873गुणवानविशेषण----गुणशाली, गुणी, गुणों से युक्त।----गुणवान----हुनरमंद (लाइफ़)----ग॑नु॑वान----गुणवानु----गुणवान----गुणवान----गुणवान, गुणी----गुणवान्----गुणबान्----गुणवन्तुडु----नल्ल गुणमुडैय----गुणवान्----गुणवंत----
874गुणापुंलिंग----गणित में जोड़ने की एक संक्षिप्त रीति जिसमें कोई संख्या कई बार जोड़ने की बजाय एक बार में ही उतनी गुनी बढ़ाई जा सकती है (मल्टीप्लिकेशन)।----गुणा, जरब----ज़र्ब (तज़ीब)----ज़रु॑ब----ज़र्ब----गुणिलेला----गुणाकार----गुणन गुण----पूरण, गुणन----गुणन----इंतलु----पॆरुक्कल्----मटइ.डु, गुण----गुणिसुवुदु, गुणाकार----
875गुदगुदानासकारात्मक क्रिया----किसी के कोमल या मांसल अंगों को इस तरह खुजलाना या सहलाना कि वह हंसने लगे।----कुतकुतारी करना----गुदगुदाना----कु॑तु॑ कु॑तु॑ करुन----कितकिताई, कितकिताड़ी करणु----गुदगुल्या करणें----गलगलियां करवां----सुड़सुड़ि देओया----कुटकुटा, मेकुटकटा----कुतुकुतु----चक्कालिगिंलिपेट्टुट----किचु किचु मूट्ट----इक्किळियाक्कुक----कचगुळि इडुवुदु----
876गुदगुदीस्त्रीलिंग----गुदगुदाने की क्रिया या भाव।----कुतकुतारी----गुदगुदी----कु॑तु॑कु॑तु॑----कितकिताड़ी, कितकिताई----गुदगुली----गलगली----सड़सुड़ि----कुटकुटनि, भेकुटकुटनि----कुतकुत करिबा क्रिया----चक्कलिगिलि----किळुकिळुप्पु----इक्किळि----कचगुळि----
877गुनगुनाविशेषण----हल्का गरम।----कोसा----गुनगुना, नीम गर्म----शीर गरु॑म----हलको गरमु, नंहं सोसिड़ो----कोमट----नवशेकुं----ईष्दुष्ण अल्पगरम----कुहुमीया----उषुम----नुलिवेच्चानि----वॆदुवॆदुप्पान, इळम्शूडान----इळं चूटाय----बॆच्चगिन----
878गुनगुनानासकारात्मक क्रिया----धीमे स्वर में अस्पष्ट शब्दोच्चारण करते हुए गाना।----गुणगुणाउणा----गुनगुनाना----गूंग॑राय करुन्य----गुनगुनाइणु----गुणगुणणें----गणगणवुं----गुंजन करा----गुनगुना----गुणुगुणु करिबा----कूनरागमुतीयुट----मॆदुवान कुरि॒लिल् वातैंगळै पादि उच्चरित्तु पाड----मूळुक----मॆत्तगॆ हाडुवुदु----
879गुप्तचरपुंलिंग----जासूस, भेदिया।----जासूस, सूहीआ----जासूस, सुराग़रसां----जासूस----जासूसु----गुप्त पोलिस, जासूद, गुप्तचर----गुप्तचर, जासूस----गुप्तचर, गोयेन्दा----गुप्तचर, चोशंचोवा----गुप्तचर----गुढचारुडु, गूढचारि----ऒट॒ट॒न्, उळ्वाळि----चारन्----गुप्तचर, बेहुगा----
880गुफास्त्रीलिंग----जमीन अथवा पहाड़ के अंदर का गहरा तथा अंधेरा गड्ढा, कंदरा।----गुफा----गुफा (ग़ार)----गॅफ----गुफ़ा----गुहा, गुंफा----गुफा----गुफा, गुहा----गुहा----गुंफा----गुह----गुहै----गुह----गुहॆ----
881गुब्बारापुंलिंग----बच्चों के खेलने की रबड़ की थैली जिसमें हवा, गैस भरी जाती है (बैलून)।----गुबारा----गुब्बारा----फॅकुबाल----फूकिणो----फुगा----फुग्गो----बेलुन----बेलुन----बेलुन----बूर, बेलूनु----बलून्----बलूण्----बॆलूनु----
882गुमनामविशेषणविशेषण---अप्रसिद्ध;बिना नाम का, जिसमें किसी का नाम न लिखा हो, अनाम।---गुमनाम----गुमनाम----गुपित, गुमनामगुमनाम---गुमनामु----अप्रसिद्धनिनावी---गुमनाम, अप्रसिद्धननामुं---अप्रसिद्धअनामा---अप्रसिद्ध, अख्यातअनामी---अप्रसिद्धअनाम---अनामकुडु, ऊरुपेरुलेनिवाडुपेरुलेनि---पुगळ् इल्लादपॆयरिल्लाद---अप्रसिद्धमायपेरिल्लात्त, अज्ञातनामा---अप्रसिद्धअनामधेय, हॆसरिल्लद---
883गुरुविशेषणविशेषणपुंलिंग--भारी;कठिन, मुश्किल।विद्या देने वाला, शिक्षक।--भारीकठिनगुरू--भारी (सक़ील)संगीन, दुश्वारगुरू (मुअ़ल्लिम)--गॅबगॅबगॅर--गौ॒रोडुख्योगुरू--भारी वजनदारकठिणशिक्षक, गुरु--गुरु, भारे, वजनदारकठणशिक्षक, गुरु--गुरु, भारीकठिनगुरु, शिक्षक--गुरू, गघुरकठिन, मस्किलशिक्षागुरु, शिक्षक--गुरू, भारीकठिनशिख्यक--बरुवयिनकष्टमयिनगुरुवु--गनत्तकडिनमानगुरु, अशिरियर्--भारमुळ्ळविषममायगुरु--भारिकष्टवादगुरु--
884गुरुकुलपुंलिंगपुंलिंग---गुरु का वास स्थान जहाँ रह कर शिष्य विद्याध्ययन करते हों;प्राचीन पद्धति पर स्थापित विद्यापीठ।---गुरुकुल----गुरूकुलताल़ीमगाह, द्रसगाह, मद्रसा---गॅरु॑ कॅलगुरुकुल---गुरूकुल----गुरुकुलप्राचीन पद्धतीचे विद्यापीठ---गुरुकुलप्राचीन पध्धतिनी विद्यापीठ---गुरुकुल----गुरुकुलगुरुकुल बिद्यापीठ---गुरुकुळ----गुरुकुलमुगुरुकुलमु---गुरुकुलमुपंडै कालत्तिय कल्वि निलैयम्---गुरुगृहंगुरुकुलं---गुरुकुलगुरुकुल---
885गुर्रानासकारात्मक क्रियासकारात्मक क्रिया---कुत्ते बिल्ली आदि का क्रोध में मुंह बंद करके भारी आवाज निकालना;क्रोध में कर्कश स्वर से बोलना।---गुराउणा----ग़ुर्राना----रोंखु करुनग्रज़ुन---गिरणु, गीर करणु (कुते, बि॒लीअ वगैरह जो गुसे में आवाजु करणु)कावड़ि सबबि तिखो गा॒ल्हाइणु---गुरगुरणेंरागाने गुरकावणें---धूरकणुंघूरकवुं---कुकुर बिडालादिर रागें गरगर करा----धेङा, गोरगोरागोरगोरा---गुरेंइबा----गुर्रूमनुटगुर्रूमनुट---उरुमकोबत्तिनाळ् अडित्तॊडयाल् पेश---मुरळुकशकारिक्कुक---गुगु॑नुवुदुगुरुगुट्टुवुदु---
886गुलामपुंलिंगपुंलिंग---मोल लिया हुआ नौकर, दास;ताश का एक पत्ता जिस पर गुलाम की आकृति होती है।---गोला, गुलाम----गुलाम----गॅलाम----गुलामुगुलामु, गोलो---गुलामपत्त्यातील गुलाम---गुलामपानां नो गुलाम---गोलाम, दास----गोलाम, दासताच पातर गोलाम---गोलाम, दास----बानिसजाकी---अडिमैशीट्टाट्टत्तिळ् जाक्कि शीट्टु---अटिम, दासन्जाक्कि, गुलान्---गुलामगुलाम---
887गुलालपुंलिंग----एक प्रकार का रंगदार चूर्ण जिसे होली के दिनों में एक-दूसरे पर डालते या मलते है।----गुलाल----गुलाल----गुलाल----गुलालु----गुलाल----गुलाल----आबीर----फाकु गुरि----फगु, अबीर----वक्कापोडि रंगु----होलि पंडिगैयिल् उबयोगिक्कुम् शिवप्पु पॊडि----(होळियिले) गुलाल पॊटि----गुलाबि हुडि----
888गुल्लक (गोलक)स्त्रीलिंग----वह थैली या संदूक जिसमें धन संग्रह किया जाता है।----गोलक----गोलक (गुल्लक)----गलतानु॑----भंडारी----गोलक, गल्ला----गोलक----टाकापयसा राखार सिन्दुक----धन, रखा चन्दुक----सिंदूक----गल्ला पेट्टे----उंडियल्----भंडारप्पॆट्टि गोळक----गोलक----
889गूंगाविशेषण----जो बोल न सके, मूक।----गूंगा----गूंगा----कॊल----गूंगो----मुका----मंगु, गूंगो----बीबा, मूक----मूक, बोबा----घुंगा, मूक----मूग----ऊमै----ऊम----मूक, मूग----
890गूंजस्त्रीलिंग----टकरा कर लौटने वाली आवाज, प्रतिध्वनि।----गूँज----गूंज (बाज़गश्त)----गुम्बद----गूंज, पड़ाडो॒----प्रतिध्वनि----गुंज, गुजन----प्रतिध्वनि----प्रतिध्वनि----प्रतिध्वनि----प्रतिध्वनि----ऎदिरोलि----मुऴककं, प्रतिध्वनि----प्रतिध्वनि----
891गूंजनाअकारात्मक क्रिया----आवाज का टकराकर लौटना, किसी ध्वनि से किसी स्थान का व्याप्त होना, ध्वनि का देर तक सुनाई देते रहना।----गूँजणा----गूंजना----गूंज़न----गूंजणु----घुमणें----गुंजवुं----प्रतिध्वनि हओया----प्रतिध्वनि ह, अनुरणित ह----प्रतिध्वनि----प्रतिध्वनिंचुट मारूम्रोगुट----ऎदिरॊलिक्क रींगारिक्क----मुऴङ्ङुक प्रतिध्वनिक्कुक----प्रतिध्वनिसुवुदु----
892गूंधनासकारात्मक क्रिया----किसी प्रकार के चूर्ण में थो थोडा पानी अथवा कोई तरल पदार्थ मिला कर तथा हाथ से मलते हुए उसे गाढ़े अवलेह के रूप में लाना, मांडना, सानना।----गुन्न्हंणा----गूंधना----मांडुन----गो॒हिणु----मळणें----गूंदवुं----माखा, ठासा----सान, मार----चकटिबा----रंगरिंचुट----पिशैय----(मावु) कुळक्कुक----हिट्टन्न नादि कलसुवुदु----
893गूढविशेषणविशेषण---छिपा हुआ, गुप्त;समझने में कठिन, दुरूह।---गूढ़----मख़फीदक़ीक़---गुपिथगूड़े---गुझोगूढ़ो---गूढ़ लपलेलेसमाजण्यास कठिण, गहन---गुप्त, गूठसमाजवुं मुश्केल गहन---गूठ, गुप्तदुरुह, गूढ़---लुकाइ चका, गुप्तगूढ़, दुरूह---गूढ़----गूढ मियनगूढ मयिन---मरै॒न्दपॊरुळ् पॊदिन्द---गूढमायदुर्ग्रहं---गुप्त, रहस्यवादकठिण---
894गूथना-----धागो या बालों को समेट कर सुंदरतापूर्वक बांधना;पिरोना।---गुंदणापरोणा---गूंधनापिरोना---पनस वुरुन----चोटि ठाहिणुपूअणु, पोइणु---गुंफणेआवणे---गुंफवुंपरोववुं---गाँथा, बींधागांथा---गुँथबेजीत सूता भरा---गुंथिबामाळी गुंथिबा---अल्लुट, गुच्चुटकूर्चुट---नूलगलै, कून्दलै, शेर्त्तु अऴगाह मुडियपिन्न---पिन्नुककोर्क्कुक---हॆणॆयुवुदुपोणिसुवुदु---
895गूदापुंलिंगपुंलिंग---फल आदि के अंदर का कोमल और गुदगुदा सार भाग;किसी चीज को कूट कर तैयार किया हुआ उसका गीला पिंड या रूप (पल्प)।---गुद्दा, गुल्फा----गूदा----गूजमांड---गोरो, ग॒रुका शइ कुटे उन मां तयारु कंयलु आलो मालु---गरलगदा---गरलुगदी---शाँसपिण्ड, मण्ड---शाह, सार भागमण्ड, पाल्प---शस, शस, मंतमंडु पिंड---गुज्जुपल्चटिमुद्द---पऴंगळिन् सदैप्पट॒ट॒ळ्ळ बागम्कागिदम् सॆय्युम् कूऴ्---काम्पु, कऴम्पुपऴपु---तिरुळुरुब्बिद तिख्ळु---
896गृहयुद्धपुंलिंग----किसी एक ही राष्ट्र के विभिन्न प्रदेशों के निवासियों या राजनीतिक दलों का आपस में होने वाला युद्ध (सिविल वार)।----ग्रिह जूद्ध----ख़ाना जंगी----गरु॑लडा॑य----घरू लड़ाई----गृहयुद्ध----गृह युद्ध----गृह युद्ध----गृह युद्ध----गृह जुद्ध----अन्त: कलहमु गृह कलहमु----अल्-नाट्टु कलहम्----गृहयुद्धं आम्यन्तर युद्धं----ओळयुद्ध, सिविलवार्----
897गृहस्थीस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---घर-बार और बाल-बच्चे;घर का सब सामान, माल-असबाब।---घरिसती----ख़ानादारी (गिरहस्ती)----ग्रिहसथी, खानदारी----गृहस्ती, घर-बा॒र वारोघर जो सामानु-सड़ो---संसारधरचे सामान-सुमान---गृहस्थाईधरेलु सामान---घर-संसार----परियालगृहस्थी, धर-गृहस्थी---गृहस्थिघर जिनिस---कुटुम्बमुइंटिसामानु---कुडुंबम्कुडुंम सॊत्तु---कुटुंमवीट्टुसामान-ङ्ङळ्---संसारमनॆय सामानु---
898गृहिणीस्त्रीलिंग----घर की मालकिन, पत्नी।----घरवाली----गिरहस्तन----खानुदारॆन्य----घर धयाणी----गृहिणी----गृहिणी----गृहिणी, गिन्नी----गृहिणी----गृहिणी, पत्नी----गृहिणी----बीट्टु ऎजमानि, मनैवि----गृहिणी, वीट्टम्म----हॆण्डति, गृहिणि----
899गेरूपुंलिंग----एक प्रसिद्ध खनिज, लाल मिट्टी जो रंगने और दवा के काम आती है।----गेरी, गेरू----गेरू----ग्यूर----गेरु॒----गेरु----गेरू----गौरिक, गेरिमाटि----गेरुमाटि----गेरु----ऍर्रमट्टि----काविक्कल्----कावि----काविमण्णु----
900गोंदपुंलिंग----कछ विशिष्ट पौधों तथा वृक्षों से निकलने वाला चिपचिपा लसीला, तरल निर्यास जिसे पानी में घोल कर कागज आदि चिपकाए जाते है तथा जिसे औषधि के रूप में भी प्रयुक्त किया जाता है।----गोंद----गोंद----गोंद----खौरु----डिंकु----गुंद----गँद, आठा----एठा----अठा----बंक----गोन्दु, पिसिन्----पश, कर॒----गोंदु, अण्टु----