अंगी

विक्षनरी से
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विशेषण

  1. शरीरी
  2. देहधारी
  3. शरीरवाला
  4. अवयवी
  5. उपकार्य
  6. अंशी
  7. समष्टि
  8. प्रधान
  9. मुख्य

विशेषण स्त्रीलिंग

  1. अंगवाली (केवल समास में प्रयुक्त, जैसे तन्वंगी, कोमलांगी आदि] ।

संज्ञा पुल्लिंग

  1. नाटक का प्रधान नायक
  2. नाटक या काव्य का प्रधान रस

संज्ञा स्त्रीलिंग

  1. चौदह विद्याएँ । (डिंगल)
  2. कुरती
  3. अँगिका
  4. चोली
  5. कंचुकी
  6. छोटा कपड़ा

हिन्दी

प्रकाशितकोशों से अर्थ

शब्दसागर

अंगी ^१ वि॰ [सं॰ अङ्गी]

१. शरीरी । देहधारी । शरीरवाला ।

२. अवयवी । उपकार्य । अंशी । समष्टि ।

३. प्रधान । मुख्य ।

अंगी ^२ वि॰ स्त्री॰ अंगवाली (केवल समास में प्रयुक्त, जैसे तन्वंगी, कोमलांगी आदि] ।

अंगी ^३ संज्ञा पुं॰

१. नाटक का प्रधान नायक, जैसे सत्यहरिशचंद्र में हरिशंद्र ।

२. प्रधान रस । नाटकों में श्रृगार और वीर ये दो रस अंगी (प्रधान) कहलाते है और शेष रस अंग (अप्रधान) ।

अंगी ^४ संज्ञा स्त्री॰ [डिं॰] चौदह विद्याएँ ।

अंगी पु ^५ संज्ञा स्त्री॰ दे॰ 'अंगिया' ।