अच्छा

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हिन्दी[सम्पादन]

विश्लेषण[सम्पादन]

यदि किसी में कोई बुराई न हो तो उसे अच्छा कहते है।

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

अच्छा ^१ वि॰ [सं॰ अच्छक, प्रा॰ अच्छश्र=स्वच्छ, निर्मल]

१. उत्तम । भला । बाढ़िया । उमदा । खरा । चोखा । मुहा॰—अच्छा आना=(१) ठीक या उपयुक्त अवसर पर आना । जैसे—तुम अच्छे आए, अब सब ठीक हो जायगा (शब्द॰) । (२) ठीक उतरना । सुंदर बनना; जैसे—इस कागज पर चित्र अच्छा नहीं आता (शब्द॰) । अच्छा करना=अच्छा काम करना । जैसे,—तुमने अच्छा नहीं किया जो चले आए (शब्द॰) । अच्छा कहना प्रशंसा करना; जैसे—कोई तुम्है अच्छा नहीँ कहता (शब्द॰) । अच्छा घर=संपन्न घर । प्रतिष्ठित कुल । अच्छा दिन=सुख संपत्ति का दिन; जैसे—उसने अच्छे दिन देखे हैं (शब्द॰) । अच्छी काटना, गुजरना या बीतना=अच्छी तरह बीतना । आनंद से दिन काटना, जैसे—यहाँ से वहाँ अच्छी बीतेगी (शब्द॰) । अच्छा रहना=अच्छी दशा में रहना । लाभ वा आराम में रहना; जैसे—तुम से तो हमी अच्छे रहे जो कहीं नहीं गए (शब्द॰) । अच्छा लगना=(१) भला जान पड़ना । सजना । सोहना; जैसे—तुम्हारे सिर पर यह टोपी नहीं अच्छी लगती (शब्द॰) (२) रुचिकर होना । पसंद आना; जैसे—हमें यह फल नहीं अच्छा लगता । हमें तुम्हारी यह चाल नहीं अच्छी लगती (शब्द॰) । अच्छी वक्त=ठीक समय से । आवशयकता के समय । जरुरत के वक्त । अच्छे से पाला पड़ना=बेढ़गे व्याक्ति से काम पड़ना । अच्छे हालों गुजरना=साधारणतः सुख से दिन बितना । विशेष—इस शब्द का प्रयाग व्यग्य रूप से बहुत होता है । जैसे— 'आप भी अच्छी कहनेवाले आए वा मिले' । जब कोई बात किसी को नहीं जँचती तब उसके कहन वा करनेवाले के प्रति प्रायः कहना है कि 'अच्छे आए' वा 'अच्छे मिले' ।

२. स्वस्थ । चंगा । तंदुरुस्त । नीरोग । आरोग्य; जैसे—'तुम किसकी दवा मे अच्छे हुए' (शब्द॰)? क्रि॰ प्र॰—करना ।—होना ।

अच्छा ^२ संज्ञा पुं॰

१. बड़ा आदमी श्रेष्ठ पुरुष । जैसे—मैने अच्छे अच्छे को निकाले जाते देखा है, तुम क्या हो (शब्द॰) ।

२. गुरुजन । बापदादा । बड़ा बूढ़ा; जैसे—दोगे क्यों नहीं? मैं तो तुम्हारे अच्छे अच्छों से लूँगा (शब्द॰) ।

अच्छा ^३ क्रि॰ वि॰ अच्छी तरह । खूब । बहुत । जैसे—तुमने यहाँ बुलाकर हमें अच्छा तंग किया (शब्द॰) ।

अच्छा अव्य॰

१. प्रार्थना या आदेश के उत्तर में (प्रश्न के नहीं) स्वीकृतिसूचक शब्द । जैसे—'(आदेश)—तुम कल आना (उत्तर)—अच्छा' (शब्द॰) । उ॰—फिर बोले—अच्छा याही कैं कर बैचत तन ।— रत्नाकर, भा॰ १, पृ॰ ७३ ।

२. इच्छा के विरुद्ध कोई बात हो जाने पर अथवा उसे होती हुई या होनेवाली सुन या देखकर भी यह शब्द कहा जाता है । खैर । जैसे—(क) अच्छा जो हुआ सो हुआ अब आगे से सावधान रहना चाहिए । (ख) अच्छा हम देख लेंगे (शब्द॰) ।