अजर

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हिन्दी

प्रकाशितकोशों से अर्थ

शब्दसागर

अजर ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰]

१. निर्जर । देवता (को॰) ।

२. परब्रह्म । ईश्वर का एक नाम ।

३. वृद्धदारक या जीर्णफंजी नामक पौधा (को॰) ।

अजर ^२ वि॰

१. जरारहित । जो बूढ़ा न हो । उ॰—अजर अमर सो जीति न जाई । हारे सुर करि विविध लराई । —मानस, १ ।८१ ।

२. नाशरहित । क्षयरहित ।

अजर ^३ वि॰ [सं॰ अ = नहीं + जृ (जर) = पचना] अपाच्य । गरिष्ठ । उ॰—अजर अंस अतीथ का गृही करै जो अहार । निश्चय होय दरिद्री कहै कबीर बिचार । —कबीर (शब्द॰) ।

अजर ^४ संज्ञा पुं॰ [अ॰] इनाम । पुरस्कार । फल । उ॰—जे मुकर्रर है सबूरे को अजर । —दक्खिनी॰, पृ॰ १७३ ।

अजर ^५पु संज्ञा पुं॰ [सं॰ अजिर] दे॰ 'अजिर' । —नागर जू मेरे भौन छाए हैं उछाह युत, और सोभा ह्वै गई हैं काल्हि ते अजर की —नट॰, पृ॰ ६९ ।