अनार

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हिन्दी

प्रकाशितकोशों से अर्थ

शब्दसागर

अनार ^१ संज्ञा पुं॰ [फा॰]

१. एक पेड़ और उसके फल का नाम । दाड़िम । विशेष—यह पेड़ १५-२० फुट ऊँचा और कुछ छतनार होता है । इसकी पतली पतली टहनियों में कुछ कुछ काँटे रहते हैं । इसके फूल लाल होते हैं । फल के ऊपर के कड़े छिलके को तोड़ने से रस से भरे लाल सफेद दाने निकलते हैं जो खाए जाता हैं । फल खट्टा मीठा दो प्रकार का होता है । गर्मी के दिनों में पीने के लिये इसका शरबत भी बनाते हैं । फूल रंग बनाने और दवा के काम में आता हैं । फल का छिलका अतिसार, संग्रहणी आदि रोंग में दिया जाता है । पेड़ की छाल में चमड़ा सिझाते हैं । पश्चिम हिमालय और सुलेमान की पहाड़ियों पर यह वृक्ष आप से आप उगता है । इसका कलम भी लगता है । प्रति वर्ष खाद देने से फल भी अच्छे आते हैं । काबुल और कंधार के अनार प्रसिद्ध हैं ।

२. एक आतशबाजी । विशेष—अनार फल के समान मिट्टी का एक गोल पात्र जिसमें लोहचून और बारुद भरा रहिता है और जिसके मुँह पर आग लगाने से चिनगारियों का एक पेड़ सा बन जाता है । यौ.—अनारदाना । विशेष—दाँतों की उपमा कवि लोग अनार से देते आए हैं ।

३. वह रस्सी जिसमें दो छप्पर एक साथ मिलाकर बाँधे जाते हैं ।

अनार पु ^२ संज्ञा पुं॰ [सं॰ अन्याय] अनीति । अन्याय ।