अपस्मार

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

अपस्मार संज्ञा पुं॰ [सं॰] एक रोगविशेष । मृगी । विशेष—इसमें हृदय काँपने लगता है और के सामने अँधेरा छा जाता है । रोंगी काँपकर पृथ्वी पर मुर्च्छित हो गिर पड़ता है । वैद्यक शास्त्रानुसार इसकी उत्पत्ति चिंता, शोक और भय के कारण कुपित त्रिदोष से मानी गी है । यह चार प्रकार का होता है—(१) वातज, (२) पित्तज, (३) कफज और (४) सन्निपातज । यह रोग नैमित्तिक है । वातज का दौरा बारहवें दिन, पित्तज का पंद्रहवें दिन और कफज का तीसवें दिन होता है । पर्या॰—अंगविकृति । लालाध । भूतविक्रिया । मृगी रोग ।

२. अपस्मृति । भुलक्कडपन । स्मृतिभ्रंश [को॰] ।