अभेद

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हिन्दी

प्रकाशितकोशों से अर्थ

शब्दसागर

अभेद ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰] [वि॰ अभेदनीय, अभेद्य]

१. भेद का अभाव । अभिन्नता । एकत्व ।

२. एकरूपता । समानता ।

३. रूपक अलंकार के दो भेदों में से एक जिसमें उपमेय और उपमान का अभेद बिना निषेध के कथन किया जाय, जैसे—मुखचंद, चरणाकमल । उ॰—रंभन मंजरि पुच्छ फिरावत मुच्छ उसीरनि की फहरी है । चंदन, कुंद, गुलाबन, आमन सीत सुगंधन की लहरी है । ताल बड़े फणि चक्र प्रवीन जू मित बियोगिनि की कहरी है । आनन ज्वाल गुलाल उड़ावत ब्याल बसंत बड़ो जहरी है ।—बेनी (शब्द॰) । इसकी कोई कोई पृथक् अलंकार भी मानते हैं ।

अभेद ^२ वि॰

१. भेदशून्य । एकरूप । समान । उ॰—ब्रह्म जो व्यापक बिरज अज अकल अनीह अभेद ।—मानस, १ ।५० ।

अभेद ^३ पु वि॰ [सं॰ अभेद्य] जिसका भेदन या छदन न हो सके । जिसके भीतर कोई वस्तु न घुस सके । जिसका विभाग न हो सके ।—उ॰—कवच अभेद बिप्र गुरु पूजा । एहि सम विजय उपाय न दूजा ।—मानस, ६ ।७९ ।