अविद्या

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हिन्दी

प्रकाशितकोशों से अर्थ

शब्दसागर

अविद्या संज्ञा स्त्री॰ [सं॰]

१. विरुद्ध ज्ञान । मिथ्या ज्ञान । अज्ञान । मोह । उ॰—(क) जिन्हहिं सोक ते कहौं बखानी । प्रथम अविद्या निसा नसानी ।—मानस, ७ । ३१ (ख) विषम भई संकल्प जब तदाकार सो रूप । महाँ अँधेरो काल सो परे अविद्या कूप ।—कबीर (शब्द॰) ।

२. माया । उ॰—हरि सेवकहि न व्याप अविद्या । प्रभु प्रेरित व्यापै तेहि विद्या । — तुलसी (शब्द॰) ।

३. माया का भेद । उ॰— तेहि कर भेद सुनहु तुम सोऊ । विद्या अपर अविद्या दोऊ ।-तुलसी (शब्द॰) ।

४. कर्मकांड ।

५. सांख्यशास्त्रानुसार प्रकृति । अव्यक्त । अचित् । जड़ ।

६. योगशास्त्रानुसार पाँच क्लेशों में पहला । विपरीत ज्ञान । अनित्य में नित्य, अशुचि में शुचि, दुःख में सुख और अनात्मा (जड़) में आत्मा (चेतन) का भाव करना ।

७. वैशेषिकशास्त्रानुसार इंद्रियों के दोष तथा संस्कार के दोष से उत्पन्न दुष्ट ज्ञान ।

८. वेदांतशास्त्रानुसार माया । यौ.—अविद्याकृत=अविद्या से उत्पन्न । अविद्याजन्य=अविद्या से उत्पन्न । अविद्याच्छन्न=अविद्या या अज्ञान से आवृत्त । अविद्यामार्ग=प्रेम । वह मार्ग जो संसार में मनुष्यों को अनुरक्त करता है । अविद्याश्रव=अज्ञान (बौद्ध) ।