आँख

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हिन्दी

संज्ञा

  1. शरीर का एक अंग

प्रकाशितकोशों से अर्थ

शब्दसागर

आँख ^१ संज्ञा स्त्री [सं॰ अक्षि, प्रा॰ अक्खि, पं॰ अँक्ख] देखने की इंद्रिय । वह इंद्रिय जिससे प्राणियों को रूप अर्थात् वर्ण- विस्तार तया आकार का ज्ञान होता है । विशेष—मनुष्य के शरीर में यह एक ऐसी इंद्रिय है, जिंसपर आलोक के द्वारा पदार्थों का बिंब खिंच जाता है । जो जीव आरीह नियमानुसार अधिक उन्नत हैं, उनकी इंद्रियों की बनावट अधिक पेचीली और जटिल होती है, पर क्षुद्र जीवों में इनकी बनावट बहुत सादी, कहीं कहीं तो एक बिंदी के रूप में होती है; उनपर रक्षा के लिये पलक और बरौनी इत्यादि का बखेड़ा नहीं होता । बहुत क्षुद्र जीवों में चक्षुरिंद्रिय की जगह या संख्या नियत नहीं होती । शरीर के किसी स्थान में एक, दो, चार, छः बिदियाँ सी होती हैं जिनसे प्रकाश का बोध होता है । मकड़ियो की आठ आँखैं प्रसिद्ध हैं । । रीढ़वाले जीवों की आँखें खोपड़े के नीचे गड़ढों में बड़ी रक्षा के साथ बैठाई रहती हैं और उनपर पलक और बरौनी आदि का आवरण रहता है । वैज्ञानिकों का कथन है कि सभ्य जातियाँ वर्णभेद अधिक कर सकती हैं और पुराने लोग रंगों में इतने भेद नहीं कर सकते थे । आँख बाहर से लंबाई लिए हुए गोल तथा दोनों किनारों पर नुकीली दिखाई पड़ती है । सामने जो सफेद काँच की सी झिल्ली दिखाई पड़ती है उसके पीछे एक और झिल्ली है जिसके बीचोबीच एक छेद होता है । इसके भीतर उसी से लगा हुआ एक उन्नतोदर काँच के सदृश पदार्थ होता है जो नेत्र द्वारा ज्ञान का मुख्य कारण है, क्योंकि इसी के द्वारा प्रकाश भीतर जाकर रेटिना पर के ज्ञानतंतुओं पर कंप वा प्रभाव डालता है । पर्या॰—लोचन । नयन । नेत्र । ईक्षण । अक्षि । दृक् । दृष्टि । अंबक । विलोचन । वीक्षण । प्रेक्षण । चक्षु । यौ॰—उनोंदी आँख = नींद से भरी आँख । वह आँख जिसमें नींद आने के लक्षण दिखाई पड़ते हों । कंजी आँख = नीली और भूरी आँख । बिल्ली की सी आँख । कँटीली अख = घायल करनेवाली आँख । मोहित करनेवाली आँख । गिलाफी आँख = पपोटों से ढकी हुई आँख; जैसे कबुतर की । चंचल आँख = यौवन के उमंग के कारण स्थिर न रखनेवाली आँख । चरबाँक आँख = चंचल आँख । चियाँ सी आँख = बहुत छोटी आँख । चोर आँख=(१) वह आँख जिसमें सुरमा या काजल मालूम न हो । (२) वह आँख जो लोगों पर इस तरह पड़े कि मालूम न हो । धँसी आँख = भीतर की ओर धँसी हुई आँख । मतवाली आँख = मद से भरी आँख । मदभरी आँख, रसभरी आँख = वह आँख जिससे भाव टपकता हो । रसीली आँख, शरबती आँख = गुलाबी आँख । मुहा॰—आँख=(१) ध्यान । लक्ष्य । जैसे, उनकी आँख बुराई ही पर रहती है । (२) विचार । विवेक परख । शिनाख्त । जैसे—(क) उसके आँख नहीं है; वह क्या सौदा लेगा । (ख) राजा के आँख नहीं कान होता है । (३) कृपादृष्टि । दया भाव; जैसे, —अब तुम्हारी वह आँख नहीं रही । (४) संतति । संतान । लड़का बाला; जैसे—(क) सोगिन मर गई, आँख छोड़ गई । (ख) एक आँख फूटती है तो दूसरी पर हाथ रखते हैं । (अर्थात् जब एक लड़का मर जाता हे तब दूसरे की देखकर धीरज धरते हैं और उसकी रक्षा करते हैं ।) (ग) मेरे लिये तो दोनों आँखे बराबर हैं । आँख आना = आंख में लाली, पीड़ा और सूजन होना । आँख उठना = आँख आना । आँख में लाली और पीड़ा होना । आँख उठाना = ताकना । देखना । सामने नजर करना । जैसे—आँख उठाई तो चारों और मैदान देख पड़ा । ( ) बुरी नजर से देखना । बुरा बर्ताव करना । हानि पहुँचाने की चेष्टा करना । जैसे— हमारे रहते तुम्हारी ओर कोई आँख उठा सकता है ? आँख डठाकर न देखना = (१) ध्यान न देना । तिरस्कार करना; जैसे—(क) मैं उनके पास घंटों बैठा रहा पर उन्होंने आँख उठाकर भी नहीँ देखा । (ख) ऐसी चीजों को तो हम आँख उठाकर भी नहीँ देखते । (२) सामने न ताकना । लज्जा या संकोच सो बराबर दृष्टि न करना; जौसे—वह लड़का तो आँख ही ऊपर नहीं उठाता, हम समझावें क्या । आँख उलट जाना= (१) पुतली का ऊपर चढ़ जाना । आँख पथराना (यह मरने के समय होता है); जैसे,—आँखें उलट गई, अब क्या आशा है । (२) घमंड से नजर बदल जाना । अभिमान होना; जैसे—इतने ही धन में तुम्हारी आँख उलट गई हैं । आँख ऊँची न होना=लज्जा से बराबर ताकने का साहस न होना । लज्जा से दृष्टि नीचे रहना; जैसे, —उस दिन से फिर उसकी आँख हमारे सा मने ऊँची नहीं हुई । आँख ऊपर न उठाना = (१) लज्जा या भय से नजर ऊपर की ओर न करना । दृष्टि नीची रखना । आँख ओट, पहाड़ ओट = (१) निःसंकोच होना । (२) जब आँख के सामने नहीं, तब क्या दूर, क्या नजदीक । आँख कड़ु आना = अधिक ताकने या जागने से एक प्रकार की पीड़ा होना । आँख का अंधा, गाँठ का पूरा = मूर्ख धनवान । अनाड़ी मालदार । वह धनी जिसे कुछ विचार या परख न ही; जैसे—(क) हे भगवान् भेजो कोई आँख का अंधा गाँठ का पूरा । (ख) जो आँख का अँधा होगा, वही यह सड़ा कपड़ा लेगा । आँख का काँटा होन = (१) खटकना । पीड़ा देना । (कंटक होना । बाधक होना । शत्रु होना; जैसे,— उसी के मारे तो हमारी कुछ चलने नहीं पाती; वही तो हमारी आँख का काँटा हो रहा है । आँख का काजल चुराना = गहरी चोरी करना । बड़ी सफाई के साथ चोरी करना । आँख का जाना = आँख फूटना; जैसे,—उसकी आँख शीतला में जाती रही । आँख का जाला = आँख की पुतली पर एक सफेद झिल्ली जिसके कारण धुंध दिखाई देता है । आँख का डेंला = आँख का बट्टा । आँख का वह उभड़ा हुआ सफेद भाग जिसपर पुतली रहती है । आँख का तारा = (१) आँख का तिल । कनीनिका । (२) बहुत प्यारा व्यक्ति । (३) संतति । आँख का तिल = आँख की पुतली की बीचोबीच छोटा गोल तिल के बराबर काला धब्बा जिसमें सामने की वस्तु का प्रति बिंब दिखाई पड़ता है । यह यथार्थ में एक छेद है जिससे आँख के सबसे पिछले परदे का काला रंग दिखाई पड़ता है । आँख का तारा । कनीनिका । आँख का तेल निकालना = आँक को कष्ट देना । ऐसा महीन काम करना जिसमें आँखों पर बहुत जोर पड़े, जैसे सीना पिरोना, लिखना, पढ़ना आदि । उ॰—कयों न खो देंगे आँख का तिल वे, आँख का तेल जो निकालेंगे ।— चोखेठ, पृ॰ १७ । आँख कान खुला रहना = सचेत रहना । सावधान होना । होशियार रहना । आँख का परदा = आँख के भीतर की झिल्ली जिससे होकर प्रकाश जाता है । आँख का पर्दा उठना = ज्ञानचक्षु का खुलना । अज्ञान या भ्रम का दूर होना । चेत होना; जैसे—उसकी आँख का परदा उठ गया है, अब वह ऐसी बातों पर विश्वास न करेगा । आँख पर पर्दा पड़ना = कुछ सुझाई न पड़ना । मोहग्रस्त होना । आँख का पानी ढल जाना = लज्जा छूट जाना । लाज शर्म का जाता रहना, जैसे, —जिसकी आँख का पानी ढल गया है, वह चाहे जो कर डाले । आँख का पानी मरना = दे॰ 'आँख का पानी ढलना' । आँख की किरकिरी = आँख का काँटा । चक्षुशूल । खटकनेवाली वस्तु या व्यक्ति । आँखों की ठंढक = अत्यंत प्यार व्यक्ति या वस्तु । आँख की पुतली = आँख के भीतर कार्निया और लेंस के बीच का रंगीन भूरी झिल्ली का वह भाग जो सफेदी पर की गोस काट से होकर दिखाई पड़ता है । इसी के बीच में वह तिल या कृष्णतारा दिखाई पड़ता है जिसमें सामने की वस्तु का प्रतिबिंब झलकता है । इसमें मनुष्य का प्रतिबिंब एक छोटी पुतली के समान दिखाई पड़ना है, इसी से इंसे पुतली कहते हैं । (२) प्रिय व्यक्ति । प्यारा मनुष्य । जैसे,—वह हमारी आँख की पुतली है; उसे हम पास से जाने न देंगी । आँख की पुतली फिरना = आँख की पुतली का चढ़ जाना । पुतली का स्थान बदलाना । आँख का पथराना (यह मरने का पूर्वलक्षण है) । आँख की बदी भौं के आगे = किसी के दोष को उसके इष्ट मित्र या भाई बंधु के सामने ही कहना । आँख की सूइयाँ निकालता = किसी काम के कठिन और अधिक भाग के अन्य व्यक्ति द्वारा पूरा हो जाने पर उसके शेष अल्प और सरल भाग को पूरा करके सारा फल लेने का उद्योग करना; जैसे,—इतने दिनों तक तो मर मरकर हमने इसको इतना दुरुस्त किया; अब तुम आए हो आँखों की सूइयाँ निकालने । विशेष—इस मुहाविरे पर एक कहानी है । एक राजकन्या का विवाह बन में एक मृतक से हुआ जिसके सारे शरीर में सूईयाँ चूभी हुई थीं । राजकन्या नित्य बैठकर उन सूहयों को निकाला करती थी । उसकी एक लौंड़ी भी साथ थी जो यह देखा करती थी । एक दिन राजकन्या कहीं बाहर गई । लौंड़ी ने देखा कि मृतक के शरीर की सारी सूइयाँ निकल चुकी हैं, केवल आँखों की बाकी हैं । उसने आँकों की सूइयाँ निकाल डालीं और वह मृतक जी उठा । उस लौंड़ी ने अपने को उसकी विवाहिता बत- लाया; और जब वह राजकन्या आई, तब उसे अपनी लौंड़ी कहा । बहुत दिनों तक वह लौंडी इस प्रकार रानी बनकर रही । पर पीछे से सब बातें खुल गईं और राजकन्या के दिन फिरे । आँखों के आगे अँधेरा छाना=मास्तिष्क पर आघात लगने या कमजोरी से नजर के सामने थोड़ी देर के लिये कुछ न दिखाई देना । बेहोशी होना । मूर्च्छा आना । आँखों के आगे अँधेरा होना = संसार सूना दिखाई देना । विपत्ति या दुःख के समय घोर नैराश्य होना । जैसे,—लड़के के मरते ही उनकी आँखों के आगो अँधरा हो गया । आँखों के आगे उजाला होना = प्रकाश होना । ज्ञान होना । आँखों में चमक आना = प्रसन्न होना । आँखों के आगी चिनगारी छूटना = आँखो का तिलमिलाना । तिलमिली लगना । मस्तिष्क पर आघात पहुँतने पर चकाचौंध सी लगना । आँखों के आगे नाचना = दे॰ 'आँखों में नाचना' । आँखों के आगे पलकों की बुराई = किसी के इष्ट-मित्र के आगे ही उसकी निंदा करना । जैसे—नहीं जानते थे कि आँखों के आगे पलकों की बुराई कर रहे हैं, सब बातें खुल जायँगी ? आँखों के आगे फिरना = दे॰ 'आँखो में फिरना' । आँखों के आगे रखना = आँखों के सामने रखना । आँखों के कोए = आँखों के डेले । आँखों के डोरे = आँखों के सफेद डेलों पर लाल रंग की बहुत बारीक नसें । आँखो के तारे छूटना = दे॰ 'आँखों के आगे चिनगारी छूटना' । आँखों के सामने नाचना = दे॰ 'आँखों में नाचना' । आँखों के सामने रखाना= निकट रखना । पास से जाने न देना । जैसे,—हम तो लड़र्कों को आँखों के सामने ही रखाना चाहते हैं । आँखों के सामने होना = संमुख होना । आगे आना । आँखों को रो बैठना = आँखों को खो देना । आँध होना; जैसे,— यदि यही रोना धोना रहा तो आँखों को रो बैठेगी (स्त्री॰) । आँख खटकना = (१) आँख टीसना । आँख किराकिराना । उ॰—कुमकुम मारो गुलाल, नंद जू के कृष्णालाल, जाय कहूँगी कंसराज से आँख खटक मोरी भई है लाला ।—होली (शब्द॰) । (२) किसी से मनमुटाव होना । आँख खुलना = (१) पलक खुलना । परस्पर मिली या चिपकी हुई पलकों का अलग हो जाना; जैसे,—(क) बच्चे की आँखों धो डालो तो खुस जायँ ।—(ख) बिल्ली के बच्चों ने अभी आँखें नहीं खोली । (२) नींद टूटना; जैसे,—तुम्हारी आहट पाते हो मेरी आँखें खुल गईं । (३) चेत होना । ज्ञान होना । भ्रम का दूर होना; जैसे,—पश्चिमीय शिक्षा से भारतवासियों की आँखें खुल गईं । (४) चित्त स्वस्थ होना । ताजगी आना । होश- हवास—दुरुस्त होना । तबियत ठिकाने आना । जैसे,—इस शरबत के पीते ही आँखें खुल गईं । आँख खुलवाना = (१) आँख बनवाना । (२) मुसलमानों के विवाह की रीति जिसमें दुलहिन के सांमने एक दर्पण रखा जाता है और वे उसमें एक दूसरे का मुँह देखते हैं । आँख खोलना = (१) पलक उठाना । ताकना । (२) आँख बनाना । आँख का जाला या माँड़ा निकालना । आँख को दुरुस्त करना; जैसे,—डाक्टर ने यहाँ बहुत से अंधीं की आँखें खोलीं । (३) चेताना । सावधान कराना । ज्ञान का संचार करना । वास्तविक बोध करना; जैसे,—उस महात्मा ने सदुपदेश से हमारी आँखें खोल दीं । (४) ज्ञान का अनुभव करना । वाकिफ होना । सावधान होना । उ॰—भाई बंधु और कुटुंब कबीला झूठे मित्र गिनावे । आँख खोल जब देख बावरे सब सपना कर पावे ।—कबीर (शब्द॰) । (५) सुध होना । स्वस्थ होना; जैसे— चार दिन पर आज बच्चे ने आँख खोली है । आँख गड़ना— (१) आँख किरकिराना । आँख दुखना; जैसे-हमारी आँखें कई दिनों से गड़ रही हैं, आवेंगी क्या ? (२) आँख देखकर तुम आँख बैठना; जैसे,—उसकी गड़ी आँखें देखकर तुम उसे पहचान लेना । (३) दृष्टि जमना । टकटकी बंधना । जैसे,—(क) किस चीज पर तुम्हारी आँखें इतनी देर से गड़ी हुई हैं । (ख) उसकी आँखें तो लिखने में गड़ी हुई हैं, उसे इधर उधर की क्या खबर । (४) बड़ी चाह होना । प्राप्ति की उत्कट इच्छा होना, जैसे,—जिस वस्तु पर तुम्हारी आँख गड़ती है, उसे तुम लिए बिना नहीं छोड़ते । आँखगड़ना = (१) टकटकी बाँधना । स्तब्ध दृष्टि से ताकना । (२) नजर रखना । चाहना । प्राप्ति की इच्छा करना । जैसे,—अब तुम इसपर आँख गड़ाए हो, काहे को बचेगी । आँखें धुलना = चार आँखें होना । खूब घूराघूरी होना । दृष्टि से दृष्टि मिलना; जेसे, घंटों से खूब आँखें घुल रही हैं । आँखें चढ़ना = नशी, नींद या सिर की पीड़ा से पलकों का तन जाना और नियामित रूप से न गिरना । आँखों का लाल होना; जैसे—देखते नहीं उसकी आँखें चढ़ी हुई हैं और मुँह से सीधी बात नहीं निकलती । आँख चमकाना = आँखों से तरह तरह के इशारे करना । आँख की पुतली उधर घुमाना । आँख मटकाना । आँख चरने जाना = दृष्टि का जाता रहना, जैसे—तम्हारी आँख क्या चरने गई थी जो सामने से चीज उठ गई । आँख चार करना, चार आँखे करना = देखादेखी करना । सामने आना; जैसे,—जिस दिन से मैने खरी खरी सुनाई, वे मुझसे चार आँखें नहीं करते । आँखें चार होना, चार आँखें होना = (१) देखादेखी करना । सामना होना । एक दूसरे के दर्शन होना, जैसे,—आँखें चार होते हो वे एक दूसरे पर मरने लगे । (२) विद्या का होना, जैसे,—हम तो अपढ़ हैं, पर तुम्हें तो चार आँखें हैं, तुम ऐसी भूल क्यों करते हो । आँखचीर चीर कर देखना= दे॰ 'आँख फाड़ फाड़ कर देखना' । आँख चुराना =नजर बचाना । कतराना । सामने न होना । जैसे—उस दिन से रुपया ले गया है, आँख चुराता फिरता है । (२) लज्जा से बराबर न ताकना । दृष्टि नीची करना (३) रुखाई करना । ध्यान न देना, जैसे—अब वे बड़े आदमी हो गए हैं, अपने पुराने मित्रों से आँख चुराते हैं । आँख चुराकर कुछ करना = छिपकर कोई काम करना । आँख चूकना = नजर चूकना । दृष्टि हट जाना । असावधानी होना, जैसे,—आँखचूकी कि माल यारों का । आँख छ़त से लगना = (१) आँख ऊपर को चढ़ना । आँख टँगना । स्तब्ध होना । आँख का एकदम खुली रहना । (यह मरने के पूर्व की अवस्था है ।) (२) टकटकी बँधना । आँख छि़पाना = (१) नजर बचाना । कतराना । टाल- मटूल करना । (२) लज्जा से बराबर न ताकना । दृष्टि नीची कराना । (३) रुखाई करना । बेसुरौवती करना । ध्यान न देना । आँख जमना=नजर ठहरना । दृष्टि का स्थिर रहना; जैसे,—पहिया इतनी जल्दी जल्दी घूमता है कि उसपर आँखानहीं जमती । आँख झपकना (१) आँखा बंद होना । पलक गिरना । (२) नींद आना । झपकी लगना, जैसे,—आँख झपकी ही थी कि तुमने जगा दिया । आँख झपकाना = आँक मारना । इशारा करना । आँख झेंपना = दृष्टि नीची होना । लज्जा मालूम होना, जैसे,—सामने आते ही आँख झेपती है । आँख टँगना =(१) आँख ऊपर को चढ़ जाना । आँख की पुतली का स्तब्ध होना । आँखा का एकदम खुला रहना (यह मरने का पूर्वलक्षण है) (२) टकटकी बँधना, जैसे,—तुम्हारे आसरे में हमारी आँखें टंगी रह गईं, पर तुम न आए । आँख टेढ़ी करना = (१) भौं टेढ़ी करना । रोष दिखाना । (२) आँखें बदलना । रुखा ई करना । बेमुरौवती करना । आँखें ठंढी होना=तृप्ति होना । संतोष होना । मन भरना । इच्छी पूरी होना, जैसे,—अब तो उसने मार खाई, तुम्हारी आँखें ठंढ़ी हुईं ? आखें डबडबाना= (१) (क्रि॰ अ॰) औखों में आँसू भर आना । आँखों में आँसू आना, जैसे,—यह सुनते ही उसकी आखों डबडबा आईं । (२) (क्रि॰ स॰) आँख में आँसू लाना । आँसू भरना, जैसे,— वह आँखों डबडबाकर बोला । आँखा डालना= दृष्टि डालना । देखाना । ध्यान देना । चाह करना । इच्छा करना, जैसे— भले लोग पराई वस्तु पर आँख नहीं डालते । आंखें ढँकर ढकर करना = पलकों की गति ठीक न रहना । आँखों का तिलमिलाना जैसे,—इतने दिनों के उपवास से उसकी आँखें ढकर ढकर कर रही हैं । आँखे तरसना = देखने के लिये आकुल होना । दर्शन के लिये दुखी होना; जैसे—तुम्हें देखने के लिये आँखें तरस गईं । आँखें तरेरना = क्रोध से आँखें निकाल कर देखना । क्रोध की दृष्टि से देखना । उ॰—सुनि लछिमन बिहँसे बहुरि नयन तरेरे राम ।—मानस, १ ।२७८ । आँख तले न आना = कुछ भी न जँचना । उ॰—देव देखि तब बालक दोऊ । अब न आँखि तर आवत कोऊ ।—मानस, १ ।२७८ । आँखों तले न लाना = कुछ न समझना । तुच्छ समझना; जैसे,— वह किसी को अपनी आँखों तले लाता है जो तुम्हारी बात मानेगा ? आँख दबाना = पलक सिकोड़ ना । आँख भचकाना; जैसे, (क) वह जरा आँख दबाकर ताकता है । तब प्रभु ने आग की ओर आँख दबाय सैन की, वह तुरंत बुझ गई । आँख दिखाना = क्रोध से आँखें निकालकर देखना । क्रोध की दृष्टि से देखना । कोप जताना । उ॰—(क) जानै ब्रह्म सो विप्रबर आँखि देखावहिं डाटि ।—मानस, ७ ।९९ । (ख) सुनि सरोष भृमुनायकु आए । बहुत भाँति तिन्ह आँखि देखाए ।— मानस, १ ।२९३ । (ग) बाजराज के बालकहिं लवा दिखा- वत आँखि ।—तुलसी ग्रं॰, पृ॰ ११५ । आँख दीदे से डरना= दे॰ 'आँख नाक से डरना' । आँखें दुखना = आँख में पीड़ा होना । आँखों देखते = (१) आँखों के सामने । देखते हुए । जानबूझकर; जैसे,—(क) आँखों देखते तो हम ऐसा अन्याय नहीं होने देंगे ।—(क) आँखों देखते मक्खी नही निगली जाती । (२) देखते देखते । थोड़े ही दिनों में; जैसे—आँखों से देखाते इतना बड़ा घर बिगड़ गया । आँखों देखा = आखों से देखा हुआ । अपना रखा । उ॰—जल में उपजे जल में रहे । आँखों देखा खसरो कहे ।— (पहेली, काजल । ); जैसे, —यह तो हमारी आँखों देखी बात है । आँखें दौड़ाना = नजर दौड़ाना । डीठ पसारना । चोरों ओर दृष्टि फरेना । इधर उधर देखना; जैसे,—मैंने इधर उधर बहुत आँख दौड़ाई पर कहीं कुछ न देख पड़ा । आँख न उठना = (१) लज्जा से दृष्टि नीची रहना । (२) एहसान से दबा रहना । (३) दे॰ 'आँख न आना' । आँख न उठाना=(१) नजर न उठाना । सामने न देखना । बराबर न ताकना (२) लज्जा से दृष्टि नीची किए रहना (३) किसी काम में बराबर लगे रहना; जैसे,—वह सबेरे से जो सीने बैठा तो दिन भर आँख न उठाई । आँख न खोलना=(१) आँख बंद रखना । (२) सुस्त पड़ा रहना । बेसुध रहना । गाफिल रहना; जैसे,—आज चार दिन हुए बच्चे ने 'आँख न खोली । बादल का आँख न खोलना = बादल का घिरा रहना । आकाश का बादलों से ढका रहना । मेंह का आँख न खोलना = पानी का न थमना । वर्षा का न रुकना । आँख न ठहरना = चमक या द्रुत गति के कारण दृष्टि न जमना । जैसे,—(क) वह ऐसा भड़कीला कपड़ा है कि आँख नहीं ठहरती । (ख) पहिया इतनी तेजी से घूमता था कि उसपर आँख नहीं ठहरती थी । आँख न पसीजना = आँख में आँसु न आना । (एक) आँख न भाना = बिलकुल अच्छा न लगना; जैसे,—ये बातें हमें एक आँख नहीं भीतीं । आँख नाक से डरना = ईश्वर से डरना जो पापियों को अँधा और नकटा कर देता है । पाप से डरना जिससे आँख नाक जाती रहती है; जैसे—भाई, मुझ दीन से न डर तो अपनी आँख नाक से तो डर । आँख निकालना = आँख दिखाना । क्रोध की दृष्टि से देखना; जैसे,—हमपर क्या आँख निकालते हो; जिसने तुम्हें कुछ कहा हो उसके पास जाओ ।—(२) आँख के डेले तो छुरी से काटकर अलग कर देना । आँख फोड़ना; जैसे,—उस दुष्ट सरदार ने शाह आलम की आँख निकाल ली । आँख नीची करना = दृष्टि नीची करना । सामने न ताकना जैसे—वहाँ आँख नीची किए चला जा रहा था । (२) लज्जा या संकोच से बराबर नजर न करना । दृष्टि न मिलाना । जैसे,— कब तक आँखे नीची किए रहोगे ? जो पूछते हैं, उसका उत्तर दो । आँख नीची होना = सिर नीचा होना । लज्जा उत्पन्न होना । अप्रतिष्ठा होना; जैसे,—कोई ऐसा काम न करना चाहिए जिससे हर आदमी के सामने आँख नीची हो । आँख नीली पीली करना = बहुत क्रोध करना । तेवर बदलना । आँख दिखलाना । आँख पटपटा जाना =(१) आँख फूट जाना (स्त्रियाँ गाली देने में अधिक बोलती हैं) । (२) अत्याधिक भूख या प्यास से व्याकुल होना । आँख पट्टम होना = आँख फूट जाना आँख पड़ना = (१) दृष्टि पड़ना । नजर पड़ना; जैसे,—संयोग से हमारी आँख उसपर पड़ गई नहीं तो वह बिलकुल पास आ जाता । (२) ध्यान जाना । कृपादष्टि होना; जैसे,— गरीबों पर किसी की आँख नहीं पड़ती । (३) चाह की दृष्टि होना । पाने की इच्छा होना; जैसे,—उसकी इस किताब पर बार बार आँख पड़ रही है । (४) कुदृष्टि पड़ना । ध्यान जाना; जैसे,—जिस वस्तु पर तुम्हारी आँख पड़े, भला वह रह जाय ? आँख पथराना = पलक का नियमित गति से न गिरना और पुतली की गति का मारा जाना । नेत्र स्तब्ध होना (यह मरने का पूर्वलक्षण है); जैसे,—(क) अब उनकी आँखे पथरा गई हैं, और बोली भी बंद हो गई है ।— (ख) तुम्हारी राह देखते देखते आँखे पथरा गईं । आँखों पर आइए या बैठिए = आदर के साथ आइए । सादर पधारिंए । (जब कोई बहुत प्यारा या बड़ा आता है या आने के लिये कहता है, तब लोग उसे ऐसा कहते हैं) । आँखों पर ठिकरी रख लेना = (१) जान बूझकर अनजान वनना । (२) रुखाई करना । बेमुरौवती करना । शील न करना । (३) गुण न मानना । उपकार न मानना । कृतघ्नता करना । (४) लज्जा खो देना । निर्लज्ज होना । बेहया होना । आँखों में पट्टी बाँधना = (१) दोनों आँखों के ऊपर कपड़ा ले जाकर सिर के पीछे बाँधना जिससे कुछ दिखाई न पड़े । आँखों को ढकना । (२) आँख बंद करना । ध्यान न देना; जैसे—तुमने खूब आँखों पर पट्टी बाँध ली है कि अपना भला बुरा नहीं सूझता । आँखों पर परदा पड़ना = अज्ञान का अंधकार छाना । प्रमाद होना । भ्रम होना; जैसे,— तुम्हारी आँखों पर परदा पड़ा है; सच्ची बात क्यों मन में धँसेगी । (२) विचार का जाता रहना । विवेक का दूर होना; जैसे,—क्रोध के समय मनुष्य की आँखों पर परदा पड़ जाता है । (३) कमजोरी से आँखों के सामने अँधेरा छाना; जैसे—भूख प्पास के मारे हमारी आँखों पर परदा पड़ गया है । आँखों पर वलकों का वोझ नहीं होता = (१) अपनी चीज का रखना भारी नहीं मालुम होता (२) अपने कुटुंबियों को खिलाना पिलाना नहीं खलता । (३) काम की चीज महँगी नहीं मालूम होती । आँखों पर बिठाना । = बहुत आदर सत्कर करना । आवगत । प्रीतिपूर्वक व्यवहार करना; जैसे—वह हमारे घर तो आवें, हम उन्हें आँखों पर बिठावेंगे । आँखों पर रखना = बहुत प्रिय करके रखना । बहुत आराम से रखना; जैसे,—आय निश्चित रहिए; मैं उन्हें अपनी आँखों पर रखूँगा । आँखपसारना या फैलाना = दूर तक दृष्टि बढ़ाकर देखना । नजर दौड़ाना । आँखें फटना = चोट या पीड़ा से यह मालूम पड़ना कि आँखे निकली पड़ती है; जैसे,—सिर के दर्द से आँखे फटी पड़ती हैं । (२) पु आंखे बढ़ना । आँखों की फाँक का फैलना । उ॰—दौरत थोरे ही में थकिए, थहरै पग, आवत जाँघ सटी सी । होत घरी घरी छीन खरी कटि, और है पास सुबास अटी सी । हे रघुनाथ? बिलोकिबे को तुम्हें आई न खिलन सोच पटी सी । मैं नहीं जानति हाल कहा यह काहे ते जाति है औखि फटी सी ।— रघूनाथ (शब्द॰) । आँख फड़कना = आँख की पलक का बार बार हिलना । वायु के संचार से आँख की पलक का बार बार फड़- फड़ाना । (दाहिनी या बाईं आँख के फड़कने से लोग भावी शुभ अशुभ का अनुमान करते हैं) । उ॰ सुनु मंथरा बात फुर तोरी । दहिन आँखि नित फरकइ मोरी ।—मानस, २ ।२० । आँख फाड़ फाड़ कर देखना = खूब आँख खोलकर देखना । उत्सुकता से देखना । जैसे उधर क्या है जो आँख फाड़फाड़कर देख रहे हो । आँखे फिर जाना । = (१) नजर बदल जाना । पहले की सी कृपा या स्नेह दृष्टि न रहना । बेमुरौवती आ जाना; जैसे— जबसे वे हम लोगों के बीच से गए, तबसे तो उनकी आँखे ही फिर गई ।—(२) चित्त में विरोध उत्पन्न हो जाना । मन में बुराई आना । चित्त में प्रतिकूलता आना; जैसे,—उसकी आँखे फिर गई वह बुराई करने से नहीं चूकेगा । आँख फूटना = (१) आँख का जाता रहना । आँख की ज्योति का नष्ट होना । (२) आँख रहते कुछ दिखाई न पड़ना; जैसे— तुम्हारी क्या आँखे फूटी हैं, जो सामने की वस्तु नहीं दिखाई देती । (आँख एक बहुत प्यारी वस्तु है इसी से स्त्रियाँ प्राय: इस प्रकार की शपथ खाती हैं कि मेरी आँखे फूट जायँ, यदि मैंने ऐसा कहा हो) (३) बुरा लगना । कुढ़ना होना । उ॰— (क) उसको देखने से हमारी आँखे फुटती हैं । (ख) किसी की सुखी देखकर तुम्हारी आँखें क्यों फटती हैं । आँख फेरना= (१) निगाह फेरना नजर बदलना । पहले की सी कृपा या स्नेहदृष्टि न रखना । मित्रत्रा तो़ड़ना । (२) विरुद्ध होना । प्रतिकूल होना । वाम होना । (३) अनुकूल होना । कृपा करना । उ॰—फेर दी आँख जी आया जैसे रसाल बौराया ।—गीतगुंज, पृ. ४० । आँखफैलाना = आश्वर्य से स्तब्ध होना । आश्चर्यचकित होना । आँख फैलाना = दृष्टि फैलाना । दीठ पसारना । दूर तक देखना । नजर दौड़ाना । आँखफोड़ना = (१) आँखों को नष्ट करना । आँखों की ज्योंति का नाश करना । (२) कोई काम ऐसा करना जिसमें आँखों पर जोर पड़े । कोई ऐसा काम करना, जिसमें देर तक दृष्टि गड़ानी पड़े; जैसे लिखना पढ़ना, सीना, पिरोना; जैसे-(क) घंटों बैठकर आँखें फोड़ी है, तब इतना सीया गया है (ख) घंटों चूल्हे के आगे बैठकर आँखें फोड़ी हैं तब रसोई बनी है । आँख फोरना= दे॰ 'आँख फोड़ना' । उ॰—सुरपति सुत जानै बल थोरा । राखा जियत आँखि गहि फोरा ।—मानस, ३ । ३५ । आँख बंद करके कोई काम करना, आँखमूँद कर कोई काम करना = (१) बिना पूछे पाछे कोई काम करना । बिना जाँच परताल किए कोई काम करना । बिना कुछ सोचे विचारे कोई काम करना । बिना आगा पीछा किए कोई काम करना; जैसे— (क) आँख मूँदकर दवा पी जाओ । (ख) जितना रुपया वे माँगते गए हम उनको आँख बंद करके देते गए । (२) दूसरी बातों की ओर ध्यान न देकर अपना काम करना । और बातों की परवाह न करके अपना नियत कर्तव्य करना । किसी के कुछ कहने—सुनने की परवाह न करके अपना काम करना; जैसे,—तुम आँख मूँदकर अपना काम किए चलो, लोगों को बकने दो । आँख बंद होना = (१) आँख भपकना । पलक गिरना; जैसे—कहो तो वह पाँच मिनट तक ताकता रह जाय, आँख बंद न करे । (२) मृत्यु होना । मरण होना; जैसे,—जिस दिन इसके बाप की आँखें बंद होंगी, यह अन्न को तरसेगा । आँख बचाकर कोई काम करना = इस रीति से कोई काम करना कि दूसरे न देख पाएँ । छिपाकर कोई काम करना; जैसे;—बुराई भी करते तो जरा आँख बचाकर । आँख बचाना = नजर बचाना । सामना न करना । कतराना; जैसे,—रुपया लेने को ले किया, अब आँख बचाते फिरते हो । आँख बचे का चाँटा = लड़कों का एक खेल जिसमें यह बाजी लगती है कि जिसे असावधान देखें, उसे चाँटा लगावें । आँख बदल जाना = पहले की सी कृपादृष्टि या स्नेहदृष्टि न रह जाना । पहले का सा व्यवहार न रह जाना नजर बदल जाना । मिजाज बदल जाना । बतवि में रूखापन आ जाना; जैसे, —(क) अब उनकी आँखे बदल गई हैं, क्यों हम लोगों की कोईबात सुनेंगे ।—(ख) गौं निकल गई, आँख बदल गई ।—(शब्द॰) । (२) आकृति पर क्रोध दिखाई देना । क्रोध की दृष्ट़ि होना । रिस चढ़ना; जैसे,—थोड़े ही में उनकी आँखे बदल जाती हैं । आँख बनवाना = आँख का जाला कटवाना = आँख का माड़ा निकलवाला । आँख की चिकित्सा करना; जैसे, —जरा आँखबनवा आओ तो कपड़ा खरीदाना । आँख बराबर करना= (१) आँख मिलाना । सामने ताकना; जैसे,—वह चोर लड़का अब मिलने पर आँख बराबर नहीं करता । (२) मुंह पर बातचीत करना । सामने डटकर बातचीत करना । ढिठाई करना; जैसे,—उसकी क्या हिम्मत है कि आँख बराबर कर सके । आँखबराबर होना=दृष्टि सामने होना । नजर से नजर मिलाना; जैसे,—जबसे उसने वह खोटा काम किया तबसे मिलने पर कभी उसकी आँख बराबर नहीं होती । आँख बहना=(१) आँसु बहाना । (२) आँख की बीनाई या रोशनी जाती रहना । आँख वहाना= आँसू बहाना । रोना । आँख बिगड़ना=(१) दृष्टि कम होना । नेत्र की ज्योंति घटना । आँख में पानी उतरना या जाला इत्यादि पड़ना । (२) आँख उलटना । आँख पथराना; जैसे,— उनकी आँखों बिगड़ गई हैं और बोली भी बंद हो गई है' । आखें बिछना = भव्य स्वागत-सत्कार होना । आँख बिछाना = प्रेम से स्वागत करना; जैसे,—वे यदि मेरे घर पर उतरे, तो मैं अपनी आँखों बिछाऊँ । (२) प्रेमपूर्वक प्रतीक्षा करना । बाट जोहना । टकटकी बाँधकर राह देखना, जैसे,—हम तो कब से आँख बिछाए बैठे हैं, वे आवें तो । आँख बैठना=(१) आँख का भीतर की ओर धँस जाना । चोट या रोग आँख का डेला गड़ जाना (२) आँख फूटना । आँख भर आना = आँख में आँसू आना । आँख भर देखना=खूब अच्छी तरह देखना । तृप्त होकर देखना । अघाकर देखना । इच्छा भर देखना । उ॰—गाज् परै यहि लाज पै री अँखियाँ भरि देखन हू नहिं पाई ।—(शब्द॰); जैसे,—तनिक वे यहाँ आ जाते, हम उन्हें आँखा भर देखा तो लेते । आँख भर लाना = आँसू भर लाना । आँखा डबडबाना । रोवाँसा हो जाना । आँख भैं ठेढ़ी करना = आँख दिखाना । क्रोध की दृष्टि से देखाना । तेवर बदलना; जैसे,—हमपर क्या आँखा भौं टेढ़ी करते हो, जिसने तुम्हारी जीज ली हो उसके पास जाओ । आँख मचकाना = (१) आँख खोलना और फिर बंद करना । पलकों को सिकोड़कर गिराना । (२) इशारा करना । सैन मारना, जैसे,— तुमने आँखा मचका दी, इसी से वह भड़क गया । आँखमलना= सोकर उठने पर आँखों को जल्दी खुलने के लिये हाथ से धीरे धीरे रगड़ना, जैसे,—इतना दिन चढ़ गया, तुम अभी चारपाई पर बैठै आँख मलते हो । आँख मारना = (१) इशारा करना । सनकारना । पलक मारना । आँख मटकाना (२) आँखा से निषेध करना । इशारे से मना करना, जैसे,—वह तो रुपये दे रहा था, पर उन्होंने आँख मार दी । आँख मिलना = साक्षात्कार होना । देखा देखी होना । नजर से नजर मिलना । आँख मिलाना = (१) आँख सामने करना । बराबर ताकना । नजर मिलाना । (२) सामने आना । संमुख होना । मुँह दिखाना, जैसे,—अब इतनी बेईमानी करके वह हमसे क्या आँख मिलावेगा । आँख मुँदना = आँखा बंद होना । आँख मूँदना = (१) आँख बंद करना । पलक गिराना । (२) मरना, जैसे—सब कुछ उनके दम तक है, जिस दिन वे आँख मूँदेंगे, सब जहाँ का तहाँ हो जायगा । (३) ध्यान न देना, जैसे,—उन्हें जो जी में आवे करने दो, तुम आँखा मूँद लो, उ॰—मँदे आँखि कतहुँ कोउ नाहीं ।—मानस, १ ।२८० । आँखों में = दृष्टि में । नजर में । परख में । अनुमान में; जैसे,—(क) हमारी आखों में तो इसका दाम अधिक है । (ख) हमारी आँखों में यह जँव गई है । आँख में आँख डालना = (१) आँखा से आँख मिलाना । बराबर ताकना । (२) ढिठाई से साकता, जैसे- बैठा आँखा में आँख डालता है, अपना काम नहीं देखता । आँख में काजल घुलना = काजल का आँख में खूब लगना ।आँख में खटकना = नजरों में बुरा लगना । अच्छा न लगना, जैसे—उनका रहना हमारी आँखों में खटक रहा । है । आँखों मै खून उतरना = क्रोध से आँख लाल होना । रिस चढ़ना । आँख में गड़ना = (१) आँख में खटकना । बुरा लगना । (२) मन मे बसना । जँवना । पसंद आना । ध्यान पर चढना; जैसे,— वह वस्तु तो तुम्हारी आँख मे गड़ी हुई है । उ॰—जाहु भले हौ, कान्ह, दान अँग अँग तो माँगत । हमारो यौवन रूप आँख इनके गड़ी लागत ।—सूर (शब्द॰) । किसी की आँखो में घर करना =(१) आँख में बसना । हृदय में समाना । ध्यान पर चढना । (२) किसी को मोहना या मोहित करना; जैसे—पहली ही भेंट में उसने राजा की आँखो में घर कर लिया । आँखो में चढना = नजर में जँवना । पसंद आना । आँखो में चरबी छाना =(१) घमंड, बेपरवाही या असावधानी से सामने की चीज न दिखाई देना । प्रमाद से किसी वस्तु की ओर ध्यान न जाना; जैसे,—देखते नहीं वह सामने किताब रखी है, आँखो में चरबी छाई है ?(२) मदांध होना । गर्व से किसी की ओर ध्यान न देना । अभिमान में चूर होना; जैसे,—आजकल उनकी आँखों में चरबी छाई है; क्यों किसी को पहचानेंगे । आँख में चुभना = (१) आँख मे धँसना । (२) आँख में खटकना । नजरों में बुरा लगना । (३) दृष्टि में जँचना । ध्यान पर चढना । पसंद आना; जैसे,—तुम्हारी घड़ी हमारी आँखो में चुभी हुई है; हम उसे बिना लिए न छोडेंगे । आँखो में चुभना = (१) नजर में खटकना । बुरा लगना । (२) आँखों में जँचना । पसंद आना । (३) आँखो पर गहरा प्रभाव डालना; जैसे,—इसके दुपट्टे का रंग तो आँखो में चुभा जाता है । आँख में चोभ आना = चोट आदि लगने से आँखो में ललाई आना । आँखो में झाँई पडना = आँखो का थक जाना । उ॰—आँखडियाँ झाँई परीं, पंथ निहरि निहरि । जीभडियाँ छाला परयो, राम पुकारि पुकारि ।—कबीर (शब्द॰) । आँखो में टेसू फूलना, आँखो में तीसी फूलना, आँखो में सरसों फूलना = चारों ओर एक ही रंग दिखाई पडना । जो बात जी मे समाई हुई है, उसी का चारों ओर दिखाई पडना । जो बात ध्यान में चढी है, चारों ओर वही सूझना ।(२) नशा होना । तरंग उठना; जैसे-भाँग पीते ही आँखो में सरसों फूलने लगी । (३) घमंड होना । गर्व से किसी को न देखना । आँखो में तकला या टेकुआ चुभाना = आँख फोड़ना । (स्त्रीयाँ जब किसी पर उसकी दृष्टि की वजह से बहुत कुपित होती हैं, तब कहती हैं कि 'जी चाहता है कि इसकी आँखो में टेकुआ चुभा दूँ ) । आँखो में तरावट आना = आँखो में ठंढक आना । तबयीत का ताजी होना । आँखो में धूलदेना, आँखो में धूल डालना = सरासर धोखा देना । भ्रम में डालना, जैसे,—अभी तुम किताब ले गए हो, अबब हमारी आँखो में धूल डालते हो । उ॰—(क) हरि की माया कोउ न जानै आँखि धूरि सी दीन्हीं । लाल ढीगनि की सारी ताको पीत उढनीयाँ कीनी ।— सूर (शब्द॰) । (ख) सोई अब अमृत पिवति है मुरली, सबहिनि के सिर नाँखि । लियौ छँडाइ सकल सुनि सूरज बैनु धूरि दै आँखि ।—सूर (शब्द॰) । आँखो में नाचना = दे॰ आँखो में फिरना । आँखो में नून देना = आँख फोडना । आँखों में नून राई = आँखे फूटें । ( स्त्रीयाँ उन लोगों के लीये कहती हैं जो उनके बच्चों को नजर लगाते हैं । किसी बच्चे कौ नजर लगने का संदेह होने पर वे उसका नाम लेकर और बच्चे के चारों और राई नमक घुमाकर आँखो में छोडती हैं) । आँखो में पालन = बडे सुख चैन से पालना । बड़े लाड प्यार से पालन पोषण करना, जैसे,—जो लड़के आँखो में पाले गए, उनकी यह दशा हो रही है । आँखो में फिरना = ध्यान पर चढना । स्मृति में बना रहना, जैसे,—उसकी सूरत मेरी आँखों के सामने फिर रही है । आँखो में बसना = ध्यान पर चढना । हृदय में समाना । किसी वस्तु का इतना प्रिय लगना कि उसका ध्यान हर समय चित्त में बना रहे, जैसे-उसकी मूर्ति तुम्हारी आँखों में बस गई है । आँखों में बैठना = (१) नजर में गड़ना । पसंद आना । (२) आँखों पर गहरा प्रभाव डालना । आँखों में धँसना ( चटकीले रंग के विषय में प्रायः कहते हैं कि 'इस कपडे का रंग तो आँखों में बैठा जाता है ।') । आँखों में भंग घुटना = आँखों पर भाँग का खूब नशा छाना । गहागड्ड नशा होना । आँखों में रहना = (१)लाड़ प्यार से रखना । प्रेम से रखना । सुख से रखना; जैसे,—आप निश्चिंत रहिए मैं इस लडके को आँखो में रखूँगा । उ॰—आँखिन में सखि राखिबे जोग इन्है किमि कै बन- वास दियो है ।—तुलसी ग्रं॰, पृ॰ १६६ । (२) सावधानी से रखना । यत्न और रक्षापूर्वक रखना । हिफाजत से रखना । जैसे, —मैं इस चीज को आँखों में रखूँगा, कहीं इधर उधर न होने पाएगी । आँखों में रात कटना = किसी कष्ट, चिंता या व्यग्रता से सारी रात जागते बीतना । सारी रात नींद न पडना । वियोग में तड़पना । आँखों में रात काटना= किसी कष्ट, चिंता या व्यग्रता के कारण जागकर रात बिताना । किसी कष्ट, चिंता या व्यग्रता के कारण रात भऱ जागना; जैसे,—बच्चे की बीमारी से कल आँखों में रात काटी । आँखों में शील होना = चिंता में कोपलता होना । दिल में मुरौवत होना; जैसे,—उसकी आँखों में शील नहीं है, जैसे होगा, वैसे अपना रुपया लेगा । आँखों में समाना = हृदय में बसना । ध्यान पर चढ़ना । चित में स्मरण बना रहना; जैसे,—दमंयती की आँखों में तो नल समाए थे; उसने सभा में और किसी राजा की ओर देखा तक नहीं । आँख मोडना = दे॰ 'आँख फेरना' । आँख रखना = (१) नजर रखना । चौकसी करना; जैसे,—देखना, इस लड़के पर भी आँख रखना कहीं भागने न पावे ।—(२) चाह रखना । इच्छा रखना; जैसे,—हम भी उस वस्तु पर आँख रखते हैं । (३) आसरा रखना । भलाई की आशा रखना; जैसे,—उस कठोरहृदय से कोई क्या आँख रखे । आँख लगना = नींद लगना । झाकी आना । सोना । उ॰—जब जब वै सुधि कीजियै, तब तब सब सुधि जाँहि । आँखनु आँखि लगी रहे, आँखै लागति नाँहि ।— बिहारी र॰, दो॰ ६२; जैसे,—आँख लगती ही थी कि तुमने जगा दिया । (२) प्रीति होना । दिल लगाना । उ॰— (क) धार लगै तरवार लगै पर काहु से काहु की आँख लगै ना ।—(शब्द॰) । (ख) ना खिन टरत टारे, आँखि न लगत पल, आँखिन लगैरी श्यामसुंदर सलोने से ।—देव (शब्द॰) । (३) टकटकी लगना । दृष्टि लगना; जैसे,—हमारी आँखें उसी ओर तो लगी है; पर वे कहीं आते दिखाई नहीं देते । उ॰—पलक आँख तेहि मारग, लागी दुनहु रहहिं । कोउ न संदेशी आवही, तेहिक सँदेस कहाहिं ।—जायसी (शब्द॰) । आँखों लगना = आँखो में लगना । ऊपर पड़ना । ऊपर आना । शरीर पर बीतना । उ॰—झरज रज लागे मोरी अँखियनि रोग दोष जंजाल । -सूर॰, १० । १३८ । आँख लगाना = (१) टकटकी बाँधकर देखना । प्रीति लगाना । नेह जोड़ना । आँख लगी =(१) जिससे आँख लगी हो । प्रेमिका । (२) सुरैतीन । उढरी । आँख लड़ना = (१) देखा देखी होना । आँख मिलना । घुराघुरी होना । नजर- बाजी होना । (२) प्रेम होना । प्रीति होना; जैसे,—अब तो आँखे लड़ गई हैं; जो होना होगा सो होगा । आँख लडाना = आँख मिलाना । घूरना । नजरबाजी करना । ( लडकों का यह एक खेल भी है जिसमें एक दूसरे को टकटकी बाँधकर ताकते हैं । जिसकी पलक गिर जाती है, उसकी हार मानी जाती है ) । आँख ललचाना = देखने की प्रबल इच्छा होना । आँख लाल करना = आँख दिखाना । क्रोध का दृष्टी से देखना । क्रोध करना । आँख वाला = (१) जिसे आँख हो । जो देख सकता हो; जैसे,—भाई, हम अंधे सही; तुम तो आँखवाले हो देखकर चलो । (२) परखवाला । पहचाननेवाला । जानकार । चतुर; जैसे,—तुम तो आँखेवाले हो तुम्हे कोई क्या ठगेगा । आँख सामने न करना = सामने न ताकना । नजर न मिलाना । दृष्टी बराबर न करना (लज्जा और भय से प्रायः ऐसा होता है । ); जैसे— जब से उसने मेरी पुस्तक चुराई कभी आँख सामने न की । (२) सामने ताकने या वाद प्रतिवाद करने का साहस न करना । मुँह पर बातचीत करने की हिम्मत न करना; जैसे,—भला उसकी मजाल है कि आँख सामने कर सके । आँख सामने न होना = लज्जा से दृष्टि बराबर न होना । शर्म से नजर न मिलना; जैसे,—उस दिन से फिर उसकी आँख सामने न हुई । आँखों सुख कलेजे ठंढक = पुरी प्रसन्नता । एन खुशी । ( जब किसी बात को लोग प्रसन्नतापूर्वक स्वीकृत करते हैं तब यह वाक्य बोलते हैं ।) आँख सेंकना = (१) दर्शन का सुख उठाना । नेत्रानंद लेना । (२) सुंदर रूप देखना । नज्जारा करना । उ॰—जरा आँखे सेक आइए, भैरवी उड़ रही होगी—रसीली नयनोंवालियों ने फंदा मारा ।— फिसाना॰, भा॰,१, पृ॰३ । आँख से आँख मिलाना =(१) सामने ताकना । दृष्टि बराबर करना । (२) नजर लड़ाना । आँखों से उतरना = नजरों से गिरना । दृष्टि में नीचा ठहरना; जैसे—वह अपनी इन्हीं चालों से सबकी आँखों से उतर गया । आँखों से उतारना या उतार देना = (१) किसी वस्तु या व्यक्ति को जानबुझकर भुला देना । (२) किसी वस्तु या व्यक्ती का मूल्य कम कर देना । आँखों से ओझल होना = नजर से गायब होना । सामने से दूर होना । आँखों से काम करना = इशारों से काम निकालना । आँखों से कोई काम करना = बहुत प्रेम और भक्ति से कोई काम करना; जैसे,—तुम मुझे कोई काम बतलाओ तो, मैं आँखों से करने के लीये तैयार हुँ । आँखों से गिरना = नजरों से गिरना । दृष्टि में तुच्छ ठहरना, जैसे,— अपनी इसी चाल से तुम सबकी आँखो से गिर गए । आँख से भी न देखना = ध्यान भी न देना । तुच्छ समझना; जैसे,— उससे बातचीत करने की कौन कहे मैं तो उसे आँखों से भी न देखूँ । आँखों से लगाकर रखना = बहुत प्रिय करके रखना । बहुत आदर-सत्कार से रखना । आँखो से लगाना = प्यार करना । प्रेम से लेना; जैसे,—उसने अपनी प्रिया के पत्र को आँखों से लगा लिया । आँख होना = परख होना । पहचान होना । शिनाख्त होना । जैसे,—तुम्हे कुछ आँख भी है कि चीजों का दाम ही लगाना जानते हो ।(२) नजर गड़ाना । इच्छा होना । चाह होना, जैसे,—उस तसवीर पर हमारी बहुत दिनों से आँख है । (३) ज्ञान होना । विवेक होना । उ॰—देखों राम कैसो कहि कदै किए. किए हिये, हूजिये कृपाल हनुमान जू दयाल हौ । ताही समै फैलि गए कोटि कोटि कपि नए लौचैं तनु खैचैं चीर भयो यों विहाल हो । भई तब आँखें दुख सागर को चाखैं, अब वही हमें राखैं भाखें वारों धन माल हो । । —प्रिया॰ (शब्द॰) ।

आँख ^२ संज्ञा पुं॰ [सं॰ अक्षि, प्रा॰ अक्खि पं॰ अंक्ख] आँखों के आकार का छेद या चिह्न, जैसे,—(१) प्रालू के उपर के नखाक्षत के समान दाग । (२) ईख की गाँठ पर की ठोंठी जिसमें से पत्तियोँ निकलती हैं । (३) अनन्नास के उपर के चिह्न या दाग । (४) सूई का छेद ।