आँचल

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

आँचल संज्ञा पुं॰ [ सं॰ अच्चल]

१. धोती, दुपट्टा आदि बिना सिले हुए वस्त्रों के दोनों छोरों पर का भाग । पल्ला । छोर । उ॰— पिअर उपरना काखा सोती । दुहुँ आँचरन्हि लगे मनि मोति । मानस, १ ।३२६ ।

२. साधुओं का अँचला ।

३. स्त्रियों की साडी या ओढनी का वह छोर या भाग जो सामने छाती पर रहता है । उ॰—वह मग में रुक, मानो कुछ झुक आँचल सभाँरती फेर नयन । —ग्राम्या,पृ॰ १७ । मुहा॰—आँचल डालना = मुसलमान लोगों में विवाह की एक रीति । (जब दुल्हा दुलहिन के घर जाने लगता है, तब उसकी बहन दरवाजे से उसके सिर पर आँचल डालकर उसकी घऱ में ले जाती है । इसका नेग बहन को मीलता है ) । आँचल = दबाना = दुध पीना । स्तन मुँह में डालना । जैसे,—बच्चे ने आज दिन भर से आँचल मुंह में नहीं दबाया । आँचल देना = (१) बच्चे को दुध पिलाना (स्त्री॰) । जैसे, बच्चे को किसी के सामने आँचल मत दीया करो ।— (२) विवाह की एक रीति । (जब बारात वर के यहाँ से चलने लगती है, तब दजुल्हे की माँ फउसके उपर आँचल डालती है और उसे काजल लगाती है । इस रीति को आँचल देना कहते हैं ।)

३. आँचल से हवा करना (स्त्री॰) । जैसे—(क) दीए को आँचल दे दो;व्यर्थ जल रहा है । (ख) थोडा आंचल दे दो तो आग सुलग जाय । आँचल पडना = आँचल छु जाना । जैसे,—देखो, बच्चे पर आँचल न पड जाय । (स्त्रीयाँ बच्चे पर आँचल पडना बुरा समझती हैं और कहती हैं कि इससे बच्चों की देह फुल जाती है) । आँचल फाडना = बच्चे की जीने के लीये टोटका करना । (जिस स्त्री के बच्चे नहीं या बाँझ होती है, वह किसी बच्चेवाला स्त्री का आँचल घात पाकर कतर लेती है, और उसे जलाकर खा जाता है । स्त्रीयों का विश्वास है कि ऐसा करने से जिसका आँचल कतरा जाता है, उसके बच्चे तो मर जाते हैं और जो आँचल कतरती हैं, उसके बच्चे जीने लगते हैं ) । आँचल में बाँधना = (१) हर समय साथ रखना । प्रतिक्षण पास रखना । जैसे,—वह किताब क्या हम आँचल में बाँधे फिरते हैं;जो इस वक्त माँग रहे हो । (२) कपडे के छोर में इस अभीप्राय से गाँठ देना कि उसे देखने से वक्त पर कोई बात याद आ जाय । जैसे,—तुम बहुत भुलते हो, आँचल में बाँध रखो । आँचल में बात बाँधना = (१) किसी कही हुई बात को अच्छी तरह स्मरण रखना । कभीं न भुलना । जैसे,—कीसी के झगडे में पडना बुरा है यह बात आँचल में बाँध रखो । (२) दृढ निश्चय करना । पुरा विश्वास रखना । जैसे,—इस बात को आँचल में बाँध रखो कि उन लोगों में अवश्य खटपट होगी । आँचल में सात बातें बाँधना = टोटका करना । जादु करना । आँचल लेना = (१) किसी स्त्री का अपने यहाँ आई हुई दुसरी स्त्री का आँचल छुकर सत्कार या अभिवादन करना । (२) किसी स्त्री का अपने से बडी स्त्री का आँचल से पैर छुना । पाँव छुना । पाँव पडना । जैसे— जीज, बुआ आई है;उठकर आँचल ले । आँचल सँभालना= आँचल ठीक करना । शरीर को अच्छी तरह ढकना । उ॰— फुलवा बिनत डार डार गोविन के संग कुमार चंद्रबदन चमकत वृषमानु की लली । हे हे चंचल कुमारि अपनो आँचल सँभार आवत बृजराज आज बिनन को कली । (शब्द॰) ।