आकाशगङ्गा

विक्षनरी से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

आकाशगंगा संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ आकाशगङ्गा]

१. बहुत से छोटे छोटे तारों का एक विस्तृत समूह जो आकाश में उत्तर—दक्षिण फैला है । विशेष—इसमें इतने छोटे छोटे तारे हैं जो दूरबीन के ही सहारे दिखाई पड़ते हैं । खाली आँख से उनका समूह एक सफेद सड़क की तरह बहुत दूर तक दिखाई पड़ता है । इसकी चौड़ाई बरा- बर नहीं है, कहीं अधिक कहीं बहुत कम है । इसकी कुछ शाखाएँ भी कुछ इधर उधर फैली दिखाई पड़ती हैं । इसी से पुराणों में इसका यह नाम है । देहाती लोग इसे आकाशजनेऊ, हाथी की डहर या केवल डहर अथवा दूधगंगा कहते हैं ।

२. पुराणानुसार वह गंगा जो आकाश में है । पर्या॰—मंदाकिनी । वियदगंगा । स्वर्गंगा । स्वर्णदी । सुरदीर्धिका ।