आकृति

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

आकृति संज्ञा स्त्री॰ [सं॰]

१. बनावट । गढ़न । ढाँचा ।

२. अवयव । विभाग । उ॰—जानु सुजघन करभकर आकृति, कटि प्रदेस किंकिन काजै ।—सूर॰, १ । ६९ । विशेष—इसका प्रयोग हिंदी में चेतन के लिये अधिक और जड़ के लिये कम होता है ।

२. मूर्ति । रूप ।

३. मुख । चेहरा । जैसे,—उसकी आकृति बड़ी भयावनी है ।

४. मुख का भाव । चेष्टा । जैसे,—मरते समय उस मनुष्य की आकृति बिगड़ गई ।

५. २२ अक्षरों का एक वर्णवृत्त । हँसी । भद्रक । मंदारमाला इसका भेद है । यह यथार्थ में एक प्रकार का सवैया है । उ॰— भासत गौरि गुसाँइन को बर राम धनू दुइ खंड कियो । मालिनि को जयमाल गुहो हरि के हिय जानकि मेलि दियो । रावन की उतरी मदिरा चुपचाप पयान जो लंक कियो । राम बरी सिय मोदभरी नभ में सुर जै जैकार कियो ।— (शब्द॰) ।

६. जातिविशेष [को॰] ।

७. (गणित में) २२ की संख्या [को॰] । यौ॰.—आकृतिगण । आकृतिच्छत्रा । आकृतियोग ।