आपस

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

आपस संज्ञा स्त्री॰ [हिं॰ आप] [वि॰ आपसी]

१. संबंध । नाता । भाईचारा । जैसे,—आपसवालों से धोखा न होगा ।

२. एक दूसरे का साथ । एक दूसरे का संबंध । विशेष—इस शब्द का प्रयोग केवल 'षष्ठी' और सप्तमी में होता हे । नियमानुसार षष्ठी में यह विशेषण की तरह आता है । जैसे,—(क) यह तो आपस की बात है । (ख) वे आपस में लड़ रहे है । मुहा॰—आपस का =(१) एक दूसरे समान संबंध रखनेवाला । अपने भाई बंधु के बीच का । जैसे,—आपस का मामला । आपस की बात । आपस की फूट । जैसे,—कहो न, यहाँ तो सब आपस ही के लोग बैठे हैं । (२) परस्परिक । परस्पर का । जैसे,—जरा सी बात पर उन्होंने आपस का आना जाना बंद कर दिया । आपस में =परस्पर । एक दूसरे के साथ । एक दूसरे के बीच । उ॰—(क) हिंदू यमन शिष्य रहै दोऊ । आपस में भाषै सब कोऊ ।—कबीर (शब्द॰) । (ख) सुख पाइहै कान सुने बतियाँ कल आपुस में कछु पै कहिहै ।— तुलसी ग्रं॰, पृ॰ १६७ । यौ॰—आपसदारी=परस्पर का व्यवहार । भाईचारा । आपसरूप =आत्मस्वरूप ।